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📖 लंबी सूरह — छोटे भागों में बांटी गई (93 आयत)
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27:1 🔁 0/5
طسٓۚ تِلۡكَ ءَايَٰتُ ٱلۡقُرۡءَانِ وَكِتَابٍ مُّبِينٍ  ۝١
Taa-Seeen; tilka Aayaatul Qur-aani wa Kitaabim Mubeen
ता सीन ये क़ुरान वाजेए व रौशन किताब की आयतें है
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27:2 🔁 0/5
هُدًى وَبُشۡرَىٰ لِلۡمُؤۡمِنِينَ  ۝٢
Hudanw wa bushraa lil mu`mineen
(ये) उन ईमानदारों के लिए (अज़सरतापा) हिदायत और (जन्नत की) ख़ुशखबरी है
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27:3 🔁 0/5
ٱلَّذِينَ يُقِيمُونَ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُؤۡتُونَ ٱلزَّكَوٰةَ وَهُم بِٱلۡأٓخِرَةِ هُمۡ يُوقِنُونَ  ۝٣
Allazeena yuqeemoonas Salaata wa yu`toonaz Zakaata wa hum bil Aakhirati hum yooqinoon
जो नमाज़ को पाबन्दी से अदा करते हैं और ज़कात दिया करते हैं और यही लोग आख़िरत (क़यामत) का भी यक़ीन रखते हैं
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27:4 🔁 0/5
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤۡمِنُونَ بِٱلۡأٓخِرَةِ زَيَّنَّا لَهُمۡ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَهُمۡ يَعۡمَهُونَ  ۝٤
Innal lazeena laa yu`mimoona bil Aakhirati zaiyannaa lahum a`maalahum fahum ya`mahoon
इसमें शक नहीं कि जो लोग आखिरत पर ईमान नहीं रखते (गोया) हमने ख़ुद (उनकी कारस्तानियों को उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है
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27:5 🔁 0/5
أُوْلَٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَهُمۡ سُوٓءُ ٱلۡعَذَابِ وَهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِ هُمُ ٱلۡأَخۡسَرُونَ  ۝٥
Ulaaa`ikal lazeena lahum sooo`ul `azaabi wa hum fil Aakhirati humul akhsaroon
तो ये लोग भटकते फिरते हैं- यही वह लोग हैं जिनके लिए (क़यामत में) बड़ा अज़ाब है और यही लोग आख़िरत में सबसे ज्यादा घाटा उठाने वाले हैं
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27:6 🔁 0/5
وَإِنَّكَ لَتُلَقَّى ٱلۡقُرۡءَانَ مِن لَّدُنۡ حَكِيمٍ عَلِيمٍ  ۝٦
Wa innaka latulaqqal Qur-aana mil ladun Hakeemin `Aleem
और (ऐ रसूल) तुमको तो क़ुरान एक बडे वाक़िफकार हकीम की बारगाह से अता किया जाता है
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27:7 🔁 0/5
إِذۡ قَالَ مُوسَىٰ لِأَهۡلِهِۦٓ إِنِّيٓ ءَانَسۡتُ نَارًا سَـَٔاتِيكُم مِّنۡهَا بِخَبَرٍ أَوۡ ءَاتِيكُم بِشِهَابٍ قَبَسٍ لَّعَلَّكُمۡ تَصۡطَلُونَ  ۝٧
Iz qaala Moosaa li ahliheee inneee aanastu naaran saaateekum minhaa bikhabarin aw aateekum bishihaabin qabasil la`allakum tastaloon
(वह वाक़िया याद दिलाओ) जब मूसा ने अपने लड़के बालों से कहा कि मैने (अपनी बायीं तरफ) आग देखी है (एक ज़रा ठहरो तो) मै वहाँ से कुछ (राह की) ख़बर लाँऊ या तुम्हें एक सुलगता हुआ आग का अंगारा ला दूँ ताकि तुम तापो
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27:8 🔁 0/5
فَلَمَّا جَآءَهَا نُودِيَ أَنۢ بُورِكَ مَن فِي ٱلنَّارِ وَمَنۡ حَوۡلَهَا وَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝٨
Falammaa jaaa`ahaa noodiya am boorika man finnnnaari wa man hawlahaa wa Subhaanal laahi Rabbil `aalameen
ग़रज़ जब मूसा इस आग के पास आए तो उनको आवाज़ आयी कि मुबारक है वह जो आग में (तजल्ली दिखाना) है और जो उसके गिर्द है और वह ख़ुदा सारे जहाँ का पालने वाला है
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27:9 🔁 0/5
يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّهُۥٓ أَنَا ٱللَّهُ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡحَكِيمُ  ۝٩
Yaa Moosaaa innahooo Anal laahul `Azeezul Hakeem
(हर ऐब से) पाक व पाकीज़ा है- ऐ मूसा इसमें शक नहीं कि मै ज़बरदस्त हिकमत वाला हूँ
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27:10 🔁 0/5
وَأَلۡقِ عَصَاكَۚ فَلَمَّا رَءَاهَا تَهۡتَزُّ كَأَنَّهَا جَآنٌّ وَلَّىٰ مُدۡبِرًا وَلَمۡ يُعَقِّبۡۚ يَٰمُوسَىٰ لَا تَخَفۡ إِنِّي لَا يَخَافُ لَدَيَّ ٱلۡمُرۡسَلُونَ  ۝١٠
Wa alqi `asaak; falammmaa ra aahaa tahtazzu ka annahaa jaaannunw wallaa mudbiranw wa lam yu`aqqib; yaa Moosaa laa takhaf innee laa yakhaafu ladaiyal mursaloon
और (हाँ) अपनी छड़ी तो (ज़मीन पर) डाल दो तो जब मूसा ने उसको देखा कि वह इस तरह लहरा रही है गोया वह जिन्दा अज़दहा है तो पिछले पावँ भाग चले और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने कहा) ऐ मूसा डरो नहीं हमारे पास पैग़म्बर लोग डरा नहीं करते हैं
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27:11 🔁 0/5
إِلَّا مَن ظَلَمَ ثُمَّ بَدَّلَ حُسۡنَۢا بَعۡدَ سُوٓءٍ فَإِنِّي غَفُورٌ رَّحِيمٌ  ۝١١
Illaa man zalama summa baddala husnam ba`da sooo`in fa innee Ghafoorur Raheem
(मुतमइन हो जाते है) मगर जो शख्स गुनाह करे फिर गुनाह के बाद उसे नेकी (तौबा) से बदल दे तो अलबत्ता बड़ा बख्शने वाला मेहरबान हूँ
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27:12 🔁 0/5
وَأَدۡخِلۡ يَدَكَ فِي جَيۡبِكَ تَخۡرُجۡ بَيۡضَآءَ مِنۡ غَيۡرِ سُوٓءٍۖ فِي تِسۡعِ ءَايَٰتٍ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ وَقَوۡمِهِۦٓۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمًا فَٰسِقِينَ  ۝١٢
Wa adkhil yadaka fee jaibika takhruj baidaaa`a min ghairisooo`in feetis`i Aayaatin ilaa Fir`awna wa qawmih; innahum kaanoo qawman faasiqeen
(वहाँ) और अपना हाथ अपने गरेबॉ में तो डालो कि वह सफेद बुर्राक़ होकर बेऐब निकल आएगा (ये वह मौजिज़े) मिन जुमला नौ मोजिज़ात के हैं जो तुमको मिलेगें तुम फिरऔन और उसकी क़ौम के पास (जाओ) क्योंकि वह बदकिरदार लोग हैं
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27:13 🔁 0/5
فَلَمَّا جَآءَتۡهُمۡ ءَايَٰتُنَا مُبۡصِرَةً قَالُواْ هَٰذَا سِحۡرٌ مُّبِينٌ  ۝١٣
Falammaa jaaa`at hum Aayaatunaa mubsiratan qaaloo haazaa sihrum mubeen
तो जब उनके पास हमारे ऑंखें खोल देने वाले मैजिज़े आए तो कहने लगे ये तो खुला हुआ जादू है
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27:14 🔁 0/5
وَجَحَدُواْ بِهَا وَٱسۡتَيۡقَنَتۡهَآ أَنفُسُهُمۡ ظُلۡمًا وَعُلُوًّاۚ فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُفۡسِدِينَ  ۝١٤
Wa jahadoo bihaa wastaiqanat haaa anfusuhum zulmanw-wa `uluwwaa; fanzur kaifa kaana `aaqibatul mufsideen
और बावजूद के उनके दिल को उन मौजिज़ात का यक़ीन था मगर फिर भी उन लोगों ने सरकशी और तकब्बुर से उनको न माना तो (ऐ रसूल) देखो कि (आखिर) मुफसिदों का अन्जाम क्या होगा
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27:15 🔁 0/5
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا دَاوُۥدَ وَسُلَيۡمَٰنَ عِلۡمًاۖ وَقَالَا ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي فَضَّلَنَا عَلَىٰ كَثِيرٍ مِّنۡ عِبَادِهِ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ  ۝١٥
Wa laqad aatainaa Daawooda wa sulaimaana `ilmaa; wa qaalal hamdu lil laahil lazee faddalanaa `alaa kaseerim min `ibaadihil mu`mineen
और इसमें शक नहीं कि हमने दाऊद और सुलेमान को इल्म अता किया और दोनों ने (ख़ुश होकर) कहा ख़ुदा का शुक्र जिसने हमको अपने बहुतेरे ईमानदार बन्दों पर फज़ीलत दी
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27:16 🔁 0/5
وَوَرِثَ سُلَيۡمَٰنُ دَاوُۥدَۖ وَقَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّاسُ عُلِّمۡنَا مَنطِقَ ٱلطَّيۡرِ وَأُوتِينَا مِن كُلِّ شَيۡءٍۖ إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلۡفَضۡلُ ٱلۡمُبِينُ  ۝١٦
Wa warisa Sulaimaanu Daawooda wa qaala yaaa aiyuhan naasu `ullimnaa mantiqat tairi wa ooteenaa min kulli shai`in inna haazaa lahuwal fadlul mubeen
और (इल्म हिकमत जाएदाद (मनकूला) गैर मनकूला सब में) सुलेमान दाऊद के वारिस हुए और कहा कि लोग हम को (ख़ुदा के फज़ल से) परिन्दों की बोली भी सिखायी गयी है और हमें (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है इसमें शक नहीं कि ये यक़ीनी (ख़ुदा का) सरीही फज़ल व करम है
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27:17 🔁 0/5
وَحُشِرَ لِسُلَيۡمَٰنَ جُنُودُهُۥ مِنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِ وَٱلطَّيۡرِ فَهُمۡ يُوزَعُونَ  ۝١٧
Wa hushira Sulaimaana junooduhoo minal jinni wal insi wattairi fahum yooza`oon
और सुलेमान के सामने उनके लशकर जिन्नात और आदमी और परिन्दे सब जमा किए जाते थे
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27:18 🔁 0/5
حَتَّىٰٓ إِذَآ أَتَوۡاْ عَلَىٰ وَادِ ٱلنَّمۡلِ قَالَتۡ نَمۡلَةٌ يَٰٓأَيُّهَا ٱلنَّمۡلُ ٱدۡخُلُواْ مَسَٰكِنَكُمۡ لَا يَحۡطِمَنَّكُمۡ سُلَيۡمَٰنُ وَجُنُودُهُۥ وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ  ۝١٨
hattaaa izaaa ataw `alaa waadin namli qaalat namlatuny yaaa aiyuhan namlud khuloo masaakinakum laa yahtimannakum Sulaimaanu wa junooduhoo wa hum laa yash`uroon
तो वह सबके सब (मसल मसल) खडे क़िए जाते थे (ग़रज़ इस तरह लशकर चलता) यहाँ तक कि जब (एक दिन) चीटीयों के मैदान में आ निकले तो एक चीटीं बोली ऐ चीटीयों अपने अपने बिल में घुस जाओ- ऐसा न हो कि सुलेमान और उनका लश्कर तुम्हे रौन्द डाले और उन्हें उसकी ख़बर भी न हो
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27:19 🔁 0/5
فَتَبَسَّمَ ضَاحِكًا مِّن قَوۡلِهَا وَقَالَ رَبِّ أَوۡزِعۡنِيٓ أَنۡ أَشۡكُرَ نِعۡمَتَكَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتَ عَلَيَّ وَعَلَىٰ وَٰلِدَيَّ وَأَنۡ أَعۡمَلَ صَٰلِحًا تَرۡضَىٰهُ وَأَدۡخِلۡنِي بِرَحۡمَتِكَ فِي عِبَادِكَ ٱلصَّٰلِحِينَ  ۝١٩
Fatabassama daahikam min qawlihaa wa qaala Rabbi awzi`nee an ashkura ni`mata kal lateee an`amta `alaiya wa `alaa waalidaiya wa an a`mala saalihan tardaahu wa adkhilnee birahmatika fee `ibaadikas saaliheen
तो सुलेमान इस बात से मुस्कुरा के हँस पड़ें और अर्ज क़ी परवरदिगार मुझे तौफीक़ अता फरमा कि जैसी जैसी नेअमतें तूने मुझ पर और मेरे वालदैन पर नाज़िल फरमाई हैं मै (उनका) शुक्रिया अदा करुँ और मैं ऐसे नेक काम करुँ जिसे तू पसन्द फरमाए और तू अपनी ख़ास मेहरबानी से मुझे (अपने) नेकोकार बन्दों में दाखिल कर
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27:20 🔁 0/5
وَتَفَقَّدَ ٱلطَّيۡرَ فَقَالَ مَالِيَ لَآ أَرَى ٱلۡهُدۡهُدَ أَمۡ كَانَ مِنَ ٱلۡغَآئِبِينَ  ۝٢٠
Wa tafaqqadat taira faqaala maa liya laaa aral hud hud, am kaana minal ghaaa`ibeen
और सुलेमान ने परिन्दों (के लश्कर) की हाज़िरी ली तो कहने लगे कि क्या बात है कि मै हुदहुद को (उसकी जगह पर) नहीं देखता क्या (वाक़ई में) वह कही ग़ायब है
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27:21 🔁 0/5
لَأُعَذِّبَنَّهُۥ عَذَابًا شَدِيدًا أَوۡ لَأَاْذۡبَحَنَّهُۥٓ أَوۡ لَيَأۡتِيَنِّي بِسُلۡطَٰنٍ مُّبِينٍ  ۝٢١
La-u`azzibanahoo `azaaban shadeedan aw la azbahannahoo aw layaatiyannee bisultaanim mubeen
(अगर ऐसा है तो) मै उसे सख्त से सख्त सज़ा दूँगा या (नहीं तो ) उसे ज़बाह ही कर डालूँगा या वह (अपनी बेगुनाही की) कोई साफ दलील मेरे पास पेश करे
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27:22 🔁 0/5
فَمَكَثَ غَيۡرَ بَعِيدٍ فَقَالَ أَحَطتُ بِمَا لَمۡ تُحِطۡ بِهِۦ وَجِئۡتُكَ مِن سَبَإِۭ بِنَبَإٍ يَقِينٍ  ۝٢٢
Famakasa ghaira ba`eedin faqaala ahattu bimaa lam tuhit bihee wa ji`tuka min Sabaim binaba iny-yaqeen
ग़रज़ सुलेमान ने थोड़ी ही देर (तवक्कुफ़ किया था कि (हुदहुद) आ गया) तो उसने अर्ज़ की मुझे यह बात मालूम हुई है जो अब तक हुज़ूर को भी मालूम नहीं है और आप के पास शहरे सबा से एक तहक़ीकी ख़बर लेकर आया हूँ
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27:23 🔁 0/5
إِنِّي وَجَدتُّ ٱمۡرَأَةً تَمۡلِكُهُمۡ وَأُوتِيَتۡ مِن كُلِّ شَيۡءٍ وَلَهَا عَرۡشٌ عَظِيمٌ  ۝٢٣
Innee wajattum ra atan tamlikuhum wa ootiyat min kulli shai`inw wa lahaa `arshun `azeem
मैने एक औरत को देखा जो वहाँ के लोगों पर सलतनत करती है और उसे (दुनिया की) हर चीज़ अता की गयी है और उसका एक बड़ा तख्त है
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27:24 🔁 0/5
وَجَدتُّهَا وَقَوۡمَهَا يَسۡجُدُونَ لِلشَّمۡسِ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَزَيَّنَ لَهُمُ ٱلشَّيۡطَٰنُ أَعۡمَٰلَهُمۡ فَصَدَّهُمۡ عَنِ ٱلسَّبِيلِ فَهُمۡ لَا يَهۡتَدُونَ  ۝٢٤
Wajattuhaa wa qawmahaa yasjudoona lishshamsi min doonil laahi wa zaiyana lahumush Shaitaanu a`maalahum fasaddahum `anis sabeeli fahum laa yahtadoon
मैने खुद मलका को देखा और उसकी क़ौम को देखा कि वह लोग ख़ुदा को छोड़कर आफताब को सजदा करते हैं शैतान ने उनकी करतूतों को (उनकी नज़र में) अच्छा कर दिखाया है और उनको राहे रास्त से रोक रखा है
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27:25 🔁 0/5
أَلَّاۤ يَسۡجُدُواْۤ لِلَّهِ ٱلَّذِي يُخۡرِجُ ٱلۡخَبۡءَ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَيَعۡلَمُ مَا تُخۡفُونَ وَمَا تُعۡلِنُونَ  ۝٢٥
Allaa yasjudoo lillaahil lazee yukhrijul khab`a fis samaawaati wal ardi wa ya`lamu maa tukhfoona wa maa tu`linoon
तो उन्हें (इतनी सी बात भी नहीं सूझती) कि वह लोग ख़ुदा ही का सजदा क्यों नहीं करते जो आसमान और ज़मीन की पोशीदा बातों को ज़ाहिर कर देता है और तुम लोग जो कुछ छिपाकर या ज़ाहिर करके करते हो सब जानता है
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27:26 🔁 0/5
ٱللَّهُ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ رَبُّ ٱلۡعَرۡشِ ٱلۡعَظِيمِ۩  ۝٢٦
Allaahu laaa ilaaha illaa Huwa Rabbul `Arshil Azeem
अल्लाह वह है जिससे सिवा कोई माबूद नहीं वही (इतने) बड़े अर्श का मालिक है (सजदा)
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27:27 🔁 0/5
۞ قَالَ سَنَنظُرُ أَصَدَقۡتَ أَمۡ كُنتَ مِنَ ٱلۡكَٰذِبِينَ  ۝٢٧
Qaala sananzuru asadaqta am kunta minal kaazibeen
(ग़रज़) सुलेमान ने कहा हम अभी देखते हैं कि तूने सच सच कहा या तू झूठा है
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27:28 🔁 0/5
ٱذۡهَب بِّكِتَٰبِي هَٰذَا فَأَلۡقِهۡ إِلَيۡهِمۡ ثُمَّ تَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَٱنظُرۡ مَاذَا يَرۡجِعُونَ  ۝٢٨
Izhab bikitaabee haaza fa alqih ilaihim summma tawalla `anhum fanzur maazaa yarji`oon
(अच्छा) हमारा ये ख़त लेकर जा और उसको उन लोगों के सामने डाल दे फिर उन के पास से जाना फिर देखते रहना कि वह लोग अख़िर क्या जवाब देते हैं
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27:29 🔁 0/5
قَالَتۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ إِنِّيٓ أُلۡقِيَ إِلَيَّ كِتَٰبٌ كَرِيمٌ  ۝٢٩
Qaalat yaaa aiyuhal mala`u innee ulqiya ilaiya kitaabun kareem
(ग़रज़) हुद हुद ने मलका के पास ख़त पहुँचा दिया तो मलका बोली ऐ (मेरे दरबार के) सरदारों ये एक वाजिबुल एहतराम ख़त मेरे पास डाल दिया गया है
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27:30 🔁 0/5
إِنَّهُۥ مِن سُلَيۡمَٰنَ وَإِنَّهُۥ بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ  ۝٣٠
Innahoo min Sulaimaana wa innahoo bismil laahir Rahmaanir Raheem
सुलेमान की तरफ से है (ये उसका सरनामा) है बिस्मिल्लाहिररहमानिरहीम
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27:31 🔁 0/5
أَلَّا تَعۡلُواْ عَلَيَّ وَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ  ۝٣١
Allaa ta`loo `alaiya waa toonee muslimeen
(और मज़मून) यह है कि मुझ से सरकशी न करो और मेरे सामने फरमाबरदार बन कर हाज़िर हो
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27:32 🔁 0/5
قَالَتۡ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَفۡتُونِي فِيٓ أَمۡرِي مَا كُنتُ قَاطِعَةً أَمۡرًا حَتَّىٰ تَشۡهَدُونِ  ۝٣٢
Qaalat yaaa aiyuhal mala`u aftoonee fee amree maa kuntu qaati`atan amran hattaa tashhhaddon
तब मलका (विलक़ीस) बोली ऐ मेरे दरबार के सरदारों तुम मेरे इस मामले में मुझे राय दो (क्योंकि मेरा तो ये क़ायदा है कि) जब तक तुम लोग मेरे सामने मौजूद न हो (मशवरा न दे दो) मैं किसी अम्र में क़तई फैसला न किया करती
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27:33 🔁 0/5
قَالُواْ نَحۡنُ أُوْلُواْ قُوَّةٍ وَأُوْلُواْ بَأۡسٍ شَدِيدٍ وَٱلۡأَمۡرُ إِلَيۡكِ فَٱنظُرِي مَاذَا تَأۡمُرِينَ  ۝٣٣
Qaaloo nahnu uloo quwwatinw wa uloo baasin shadeed; wal amru ilaiki fanzuree maazaa taamureen
उन लोगों ने अर्ज़ की हम बड़े ज़ोरावर बडे लड़ने वाले हैं और (आइन्दा) हर अम्र का आप को एख्तियार है तो जो हुक्म दे आप (खुद अच्छी) तरह इसके अन्जाम पर ग़ौर कर ले
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27:34 🔁 0/5
قَالَتۡ إِنَّ ٱلۡمُلُوكَ إِذَا دَخَلُواْ قَرۡيَةً أَفۡسَدُوهَا وَجَعَلُوٓاْ أَعِزَّةَ أَهۡلِهَآ أَذِلَّةًۚ وَكَذَٰلِكَ يَفۡعَلُونَ  ۝٣٤
Qaalat innal mulooka izaa dakhaloo qaryatan afsadoohaa wa ja`alooo a`izzata ahlihaaa azillah; wa kazaalika yaf`aloon
मलका ने कहा बादशाहों का क़ायदा है कि जब किसी बस्ती में (बज़ोरे फ़तेह) दाख़िल हो जाते हैं तो उसको उजाड़ देते हैं और वहाँ के मुअज़िज़ लोगों को ज़लील व रुसवा कर देते हैं और ये लोग भी ऐसा ही करेंगे
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27:35 🔁 0/5
وَإِنِّي مُرۡسِلَةٌ إِلَيۡهِم بِهَدِيَّةٍ فَنَاظِرَةُۢ بِمَ يَرۡجِعُ ٱلۡمُرۡسَلُونَ  ۝٣٥
Wa innee mursilatun ilaihim bihadiyyatin fanaaziratum bima yarji`ul mursaloon
और मैं उनके पास (एलचियों की माअरफ़त कुछ तोहफा भेजकर देखती हूँ कि एलची लोग क्या जवाब लाते हैं) ग़रज़ जब बिलक़ीस का एलची (तोहफा लेकर) सुलेमान के पास आया
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27:36 🔁 0/5
فَلَمَّا جَآءَ سُلَيۡمَٰنَ قَالَ أَتُمِدُّونَنِ بِمَالٍ فَمَآ ءَاتَىٰنِۦَ ٱللَّهُ خَيۡرٌ مِّمَّآ ءَاتَىٰكُمۚ بَلۡ أَنتُم بِهَدِيَّتِكُمۡ تَفۡرَحُونَ  ۝٣٦
Falammaa jaaa`a Sulaimaana qaala atumiddoonani bimaalin famaaa aataakum bal antum bihadiy yatikum tafrahoon
तो सुलेमान ने कहा क्या तुम लोग मुझे माल की मदद देते हो तो ख़ुदा ने जो (माल दुनिया) मुझे अता किया है वह (माल) उससे जो तुम्हें बख्शा है कहीं बेहतर है (मैं तो नही) बल्कि तुम्ही लोग अपने तोहफे तहायफ़ से ख़ुश हुआ करो
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27:37 🔁 0/5
ٱرۡجِعۡ إِلَيۡهِمۡ فَلَنَأۡتِيَنَّهُم بِجُنُودٍ لَّا قِبَلَ لَهُم بِهَا وَلَنُخۡرِجَنَّهُم مِّنۡهَآ أَذِلَّةً وَهُمۡ صَٰغِرُونَ  ۝٣٧
Irji` ilaihim falanaatiyan nahum bijunoodil laa qibala lahum bihaa wa lanukhri jannahum minhaaa azillatanw wa hum saaghiroon
(फिर तोहफा लाने वाले ने कहा) तो उन्हीं लोगों के पास जा हम यक़ीनन ऐसे लश्कर से उन पर चढ़ाई करेंगे जिसका उससे मुक़ाबला न हो सकेगा और हम ज़रुर उन्हें वहाँ से ज़लील व रुसवा करके निकाल बाहर करेंगे
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قَالَ يَٰٓأَيُّهَا ٱلۡمَلَؤُاْ أَيُّكُمۡ يَأۡتِينِي بِعَرۡشِهَا قَبۡلَ أَن يَأۡتُونِي مُسۡلِمِينَ  ۝٣٨
Qaala yaaa aiyuhal mala`u aiyukum yaateenee bi`arshihaa qabla ai yaatoonee muslimeen
(जब वह जा चुका) तो सुलेमान ने अपने अहले दरबार से कहा ऐ मेरे दरबार के सरदारो तुममें से कौन ऐसा है कि क़ब्ल इसके वह लोग मेरे सामने फरमाबरदार बनकर आयें
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27:39 🔁 0/5
قَالَ عِفۡرِيتٌ مِّنَ ٱلۡجِنِّ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن تَقُومَ مِن مَّقَامِكَۖ وَإِنِّي عَلَيۡهِ لَقَوِيٌّ أَمِينٌ  ۝٣٩
Qaala `ifreetum minal jinni ana aateeka bihee qabla an taqooma mim maqaamika wa innee `alaihi laqawiyyun ameen
मलिका का तख्त मेरे पास ले आए (इस पर) जिनों में से एक दियो बोल उठा कि क़ब्ल इसके कि हुज़ूर (दरबार बरख़ास्त करके) अपनी जगह से उठे मै तख्त आपके पास ले आऊँगा और यक़ीनन उस पर क़ाबू रखता हूँ (और) ज़िम्मेदार हूँ
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27:40 🔁 0/5
قَالَ ٱلَّذِي عِندَهُۥ عِلۡمٌ مِّنَ ٱلۡكِتَٰبِ أَنَا۠ ءَاتِيكَ بِهِۦ قَبۡلَ أَن يَرۡتَدَّ إِلَيۡكَ طَرۡفُكَۚ فَلَمَّا رَءَاهُ مُسۡتَقِرًّا عِندَهُۥ قَالَ هَٰذَا مِن فَضۡلِ رَبِّي لِيَبۡلُوَنِيٓ ءَأَشۡكُرُ أَمۡ أَكۡفُرُۖ وَمَن شَكَرَ فَإِنَّمَا يَشۡكُرُ لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن كَفَرَ فَإِنَّ رَبِّي غَنِيٌّ كَرِيمٌ  ۝٤٠
Qaalal lazee indahoo `ilmum minal Kitaabi ana aateeka bihee qabla ai yartadda ilaika tarfuk; falammaa ra aahu mustaqirran `indahoo qaala haazaa min fadli Rabbee li yabluwaneee `a-ashkuru am akfuru wa man shakara fa innamaa yashkuru linafsihee wa man kafara fa inna Rabbee Ghaniyyun Kareem
इस पर अभी सुलेमान कुछ कहने न पाए थे कि वह शख्स (आसिफ़ बिन बरख़िया) जिसके पास किताबे (ख़ुदा) का किस कदर इल्म था बोला कि मै आप की पलक झपकने से पहले तख्त को आप के पास हाज़िर किए देता हूँ (बस इतने ही में आ गया) तो जब सुलेमान ने उसे अपने पास मौजूद पाया तो कहने लगे ये महज़ मेरे परवरदिगार का फज़ल व करम है ताकि वह मेरा इम्तेहान ले कि मै उसका शुक्र करता हूँ या नाशुक्री करता हूँ और जो कोई शुक्र करता है वह अपनी ही भलाई के लिए शुक्र करता है और जो शख्स ना शुक्री करता है तो (याद रखिए) मेरा परवरदिगार यक़ीनन बेपरवा और सख़ी है
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27:41 🔁 0/5
قَالَ نَكِّرُواْ لَهَا عَرۡشَهَا نَنظُرۡ أَتَهۡتَدِيٓ أَمۡ تَكُونُ مِنَ ٱلَّذِينَ لَا يَهۡتَدُونَ  ۝٤١
Qaala nakkiroo lahaa `arshahaa nanzur atahtadeee am takoonu minal lazeena laa yahtadoon
(उसके बाद) सुलेमान ने कहा कि उसके तख्त में (उसकी अक्ल के इम्तिहान के लिए) तग़य्युर तबददुल कर दो ताकि हम देखें कि फिर भी वह समझ रखती है या उन लोगों में है जो कुछ समझ नहीं रखते
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27:42 🔁 0/5
فَلَمَّا جَآءَتۡ قِيلَ أَهَٰكَذَا عَرۡشُكِۖ قَالَتۡ كَأَنَّهُۥ هُوَۚ وَأُوتِينَا ٱلۡعِلۡمَ مِن قَبۡلِهَا وَكُنَّا مُسۡلِمِينَ  ۝٤٢
Falammaa jaaa`at qeela ahaakaza `arshuki qaalat kaanna hoo; wa ooteenal `ilma min qablihaa wa kunnaa muslimeen
(चुनान्चे ऐसा ही किया गया) फिर जब बिलक़ीस (सुलेमान के पास) आयी तो पूछा गया कि तुम्हारा तख्त भी ऐसा ही है वह बोली गोया ये वही है (फिर कहने लगी) हमको तो उससे पहले ही (आपकी नुबूवत) मालूम हो गयी थी और हम तो आपके फ़रमाबरदार थे ही
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27:43 🔁 0/5
وَصَدَّهَا مَا كَانَت تَّعۡبُدُ مِن دُونِ ٱللَّهِۖ إِنَّهَا كَانَتۡ مِن قَوۡمٍ كَٰفِرِينَ  ۝٤٣
Wa saddahaa maa kaanat ta`budu min doonil laahi innahaa kaanat min qawmin kaafireen
और ख़ुदा के सिवा जिसे वह पूजती थी सुलेमान ने उससे उसे रोक दिया क्योंकि वह काफिर क़ौम की थी (और आफताब को पूजती थी)
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27:44 🔁 0/5
قِيلَ لَهَا ٱدۡخُلِي ٱلصَّرۡحَۖ فَلَمَّا رَأَتۡهُ حَسِبَتۡهُ لُجَّةً وَكَشَفَتۡ عَن سَاقَيۡهَاۚ قَالَ إِنَّهُۥ صَرۡحٌ مُّمَرَّدٌ مِّن قَوَارِيرَۗ قَالَتۡ رَبِّ إِنِّي ظَلَمۡتُ نَفۡسِي وَأَسۡلَمۡتُ مَعَ سُلَيۡمَٰنَ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝٤٤
Qeela lahad khulis sarha falammaa ra at hu hasibat hu lujjatanw wa khashafat `an saaqaihaa; qaala innahoo sarhum mumarradum min qawaareer; qaalat Rabbi innee zalamtu nafsee wa aslamtu ma`a Sulaimaana lillaahi Rabbil `aalameen
फिर उससे कहा गया कि आप अब महल मे चलिए तो जब उसने महल (में शीशे के फर्श) को देखा तो उसको गहरा पानी समझी (और गुज़रने के लिए इस तरह अपने पाएचे उठा लिए कि) अपनी दोनों पिन्डलियाँ खोल दी सुलेमान ने कहा (तुम डरो नहीं) ये (पानी नहीं है) महल है जो शीशे से मढ़ा हुआ है (उस वक्त तम्बीह हुई और) अर्ज़ की परवरदिगार मैने (आफताब को पूजा कर) यक़ीनन अपने ऊपर ज़ुल्म किया
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27:45 🔁 0/5
وَلَقَدۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمۡ صَٰلِحًا أَنِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ فَإِذَا هُمۡ فَرِيقَانِ يَخۡتَصِمُونَ  ۝٤٥
Wa laqad arsalnaaa ilaa Samoda akhaahum Saalihan ani`budul lahha fa izaa hum fareeqaani yakhtasimoon
और अब मैं सुलेमान के साथ सारे जहाँ के पालने वाले खुदा पर ईमान लाती हूँ और हम ही ने क़ौम समूद के पास उनके भाई सालेह को पैग़म्बर बनाकर भेजा कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो तो वह सालेह के आते ही (मोमिन व काफिर) दो फरीक़ बनकर बाहम झगड़ने लगे
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27:46 🔁 0/5
قَالَ يَٰقَوۡمِ لِمَ تَسۡتَعۡجِلُونَ بِٱلسَّيِّئَةِ قَبۡلَ ٱلۡحَسَنَةِۖ لَوۡلَا تَسۡتَغۡفِرُونَ ٱللَّهَ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ  ۝٤٦
Qaala yaa qawmi lima tasta`jiloona bissaiyi`ati qablal hasanati law laa tas taghfiroonal laaha la`allakum turhamoon
सालेह ने कहा ऐ मेरी क़ौम (आख़िर) तुम लोग भलाई से पहल बुराई के वास्ते जल्दी क्यों कर रहे हो तुम लोग ख़ुदा की बारगाह में तौबा व अस्तग़फार क्यों नही करते ताकि तुम पर रहम किया जाए
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27:47 🔁 0/5
قَالُواْ ٱطَّيَّرۡنَا بِكَ وَبِمَن مَّعَكَۚ قَالَ طَٰٓئِرُكُمۡ عِندَ ٱللَّهِۖ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ تُفۡتَنُونَ  ۝٤٧
Qaalut taiyarnaa bika wa bimam ma`ak; qaala taaa`irukum `indal laahi bal antum qawmun tuftanoon
वह लोग बोले हमने तो तुम से और तुम्हारे साथियों से बुरा शगुन पाया सालेह ने कहा तुम्हारी बदकिस्मती ख़ुदा के पास है (ये सब कुछ नहीं) बल्कि तुम लोगों की आज़माइश की जा रही है
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27:48 🔁 0/5
وَكَانَ فِي ٱلۡمَدِينَةِ تِسۡعَةُ رَهۡطٍ يُفۡسِدُونَ فِي ٱلۡأَرۡضِ وَلَا يُصۡلِحُونَ  ۝٤٨
Wa kaana fil madeenati tis`atu rahtiny yufsidoona fil ardi wa laa yuslihoon
और शहर में नौ आदमी थे जो मुल्क के बानीये फसाद थे और इसलाह की फिक्र न करते थे-उन लोगों ने (आपस में) कहा कि बाहम ख़ुदा की क़सम खाते जाओ
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27:49 🔁 0/5
قَالُواْ تَقَاسَمُواْ بِٱللَّهِ لَنُبَيِّتَنَّهُۥ وَأَهۡلَهُۥ ثُمَّ لَنَقُولَنَّ لِوَلِيِّهِۦ مَا شَهِدۡنَا مَهۡلِكَ أَهۡلِهِۦ وَإِنَّا لَصَٰدِقُونَ  ۝٤٩
Qaaloo taqaasamoo billaahi lanubaiyitannahoo wa ahlahoo summaa lanaqoolana liwaliy yihee maa shahidnaa mahlika ahliee wa innaa lasaadiqoon
कि हम लोग सालेह और उसके लड़के बालो पर शब खून करे उसके बाद उसके वाली वारिस से कह देगें कि हम लोग उनके घर वालों को हलाक़ होते वक्त मौजूद ही न थे और हम लोग तो यक़ीनन सच्चे हैं
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27:50 🔁 0/5
وَمَكَرُواْ مَكۡرًا وَمَكَرۡنَا مَكۡرًا وَهُمۡ لَا يَشۡعُرُونَ  ۝٥٠
Wa makaroo makranw wa makarnaa makranw wa hum laa yash`uroon
और उन लोगों ने एक तदबीर की और हमने भी एक तदबीर की और (हमारी तदबीर की) उनको ख़बर भी न हुई
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27:51 🔁 0/5
فَٱنظُرۡ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ مَكۡرِهِمۡ أَنَّا دَمَّرۡنَٰهُمۡ وَقَوۡمَهُمۡ أَجۡمَعِينَ  ۝٥١
Fanzur kaifa kaana `aaqibatu makrihim annaa dammar naahum wa qawmahum ajma`een
तो (ऐ रसूल) तुम देखो उनकी तदबीर का क्या (बुरा) अन्जाम हुआ कि हमने उनको और सारी क़ौम को हलाक कर डाला
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27:52 🔁 0/5
فَتِلۡكَ بُيُوتُهُمۡ خَاوِيَةَۢ بِمَا ظَلَمُوٓاْۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةً لِّقَوۡمٍ يَعۡلَمُونَ  ۝٥٢
Fatilka buyootuhum khaa wiyatam bimaa zalamoo; inna fee zaalika la Aayatal liqaw miny-ya`lamoon
ये बस उनके घर हैं कि उनकी नाफरमानियों की वज़ह से ख़ाली वीरान पड़े हैं इसमे शक नही कि उस वाक़िये में वाक़िफ कार लोगों के लिए बड़ी इबरत है
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27:53 🔁 0/5
وَأَنجَيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ  ۝٥٣
Wa anjainal lazeena aamanoo wa kaanoo yattaqoon
और हमने उन लोगों को जो ईमान लाए थे और परहेज़गार थे बचा लिया
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27:54 🔁 0/5
وَلُوطًا إِذۡ قَالَ لِقَوۡمِهِۦٓ أَتَأۡتُونَ ٱلۡفَٰحِشَةَ وَأَنتُمۡ تُبۡصِرُونَ  ۝٥٤
Wa lootan iz qaala liqawmiheee ataatoonal faa hishata wa antum qawmun tajjhaloon
और (ऐ रसूल) लूत को (याद करो) जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि क्या तुम देखभाल कर (समझ बूझ कर) ऐसी बेहयाई करते हो
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27:55 🔁 0/5
أَئِنَّكُمۡ لَتَأۡتُونَ ٱلرِّجَالَ شَهۡوَةً مِّن دُونِ ٱلنِّسَآءِۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ تَجۡهَلُونَ  ۝٥٥
A`innakum lataatoonar rijaala shahwatam min doonin nisaaa`; bal antum qawmun tajhaloon
क्या तुम औरतों को छोड़कर शहवत से मर्दों के आते हो (ये तुम अच्छा नहीं करते) बल्कि तुम लोग बड़ी जाहिल क़ौम हो तो लूत की क़ौम का इसके सिवा कुछ जवाब न था
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27:56 🔁 0/5
۞ فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوۡمِهِۦٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَخۡرِجُوٓاْ ءَالَ لُوطٍ مِّن قَرۡيَتِكُمۡۖ إِنَّهُمۡ أُنَاسٌ يَتَطَهَّرُونَ  ۝٥٦
Fammaa kaana jawaaba qawmiheee illaaa an qaalooo akrijoon aalaa Lootim min qaryatikum innahum unaasuny yatatahharoon
कि वह लोग बोल उठे कि लूत के खानदान को अपनी बस्ती (सदूम) से निकाल बाहर करो ये लोग बड़े पाक साफ बनना चाहते हैं
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27:57 🔁 0/5
فَأَنجَيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ إِلَّا ٱمۡرَأَتَهُۥ قَدَّرۡنَٰهَا مِنَ ٱلۡغَٰبِرِينَ  ۝٥٧
Fa anjainaahu wa ahlahooo illam ra atahoo qaddarnaahaa minal ghaabireen
ग़रज हमने लूत को और उनके ख़ानदान को बचा लिया मगर उनकी बीवी कि हमने उसकी तक़दीर में पीछे रह जाने वालों में लिख दिया था
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27:58 🔁 0/5
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرًاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ  ۝٥٨
Wa amtarnaa `alaihimm mataran fasaaa`a matarul munzareen
और (फिर तो) हमने उन लोगों पर (पत्थर का) मेंह बरसाया तो जो लोग डराए जा चुके थे उन पर क्या बुरा मेंह बरसा
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27:59 🔁 0/5
قُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ وَسَلَٰمٌ عَلَىٰ عِبَادِهِ ٱلَّذِينَ ٱصۡطَفَىٰٓۗ ءَآللَّهُ خَيۡرٌ أَمَّا يُشۡرِكُونَ  ۝٥٩
Qulil hamdu lillaahi wa salaamun `alaa `ibaadihil lazeenas tafaa; aaallaahu khairun ammmaa yushrikoon
(ऐ रसूल) तुम कह दो (उनके हलाक़ होने पर) खुदा का शुक्र और उसके बरगुज़ीदा बन्दों पर सलाम भला ख़ुदा बेहतर है या वह चीज़ जिसे ये लोग शरीके ख़ुदा कहते हैं
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27:60 🔁 0/5
أَمَّنۡ خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ لَكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ حَدَآئِقَ ذَاتَ بَهۡجَةٍ مَّا كَانَ لَكُمۡ أَن تُنۢبِتُواْ شَجَرَهَآۗ أَءِلَٰهٌ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمٌ يَعۡدِلُونَ  ۝٦٠
Amman khalaqas samaawaati wal arda wa anzala lakum minas samaaa`i maaa`an fa ambatnaa bihee hadaaa`iqa zaata bahjjah; maa kanna lakum an tumbitoo shajarahaa; `a-ilaahum ma`al laah; bal hum qawmuny ya`diloon
भला वह कौन है जिसने आसमान और ज़मीन को पैदा किया और तुम्हारे वास्ते आसमान से पानी बरसाया फिर हम ही ने पानी से दिल चस्प (ख़ुशनुमा) बाग़ उठाए तुम्हारे तो ये बस की बात न थी कि तुम उनके दरख्तों को उगा सकते तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि ये लोग खुद अपने जी से गढ़ के बुतो को उसके बराबर बनाते हैं
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27:61 🔁 0/5
أَمَّن جَعَلَ ٱلۡأَرۡضَ قَرَارًا وَجَعَلَ خِلَٰلَهَآ أَنۡهَٰرًا وَجَعَلَ لَهَا رَوَٰسِيَ وَجَعَلَ بَيۡنَ ٱلۡبَحۡرَيۡنِ حَاجِزًاۗ أَءِلَٰهٌ مَّعَ ٱللَّهِۚ بَلۡ أَكۡثَرُهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ  ۝٦١
Ammann ja`alal arda qaraaranw wa ja`ala khilaalahaaa anhaaranw wa ja`ala lahaa rawaasiya wa ja`ala bainal bahraini haajizaa; `a-ilaahumma`allah; bal aksaruhum la ya`lamoon
भला वह कौन है जिसने ज़मीन को (लोगों के) ठहरने की जगह बनाया और उसके दरमियान जा बजा नहरें दौड़ायी और उसकी मज़बूती के वास्ते पहाड़ बनाए और (मीठे खारी) दरियाओं के दरमियान हदे फासिल बनाया तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) बल्कि उनमें के अकसर कुछ जानते ही नहीं
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27:62 🔁 0/5
أَمَّن يُجِيبُ ٱلۡمُضۡطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكۡشِفُ ٱلسُّوٓءَ وَيَجۡعَلُكُمۡ خُلَفَآءَ ٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٌ مَّعَ ٱللَّهِۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ  ۝٦٢
Ammany-yujeebul mud tarra izaa da`aahu wa yakshifussooo`a wa yaj`alukum khula faaa`al ardi `a-ilaahum ma`al laahi qaleelam maa tazak karoon
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो
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27:63 🔁 0/5
أَمَّن يَهۡدِيكُمۡ فِي ظُلُمَٰتِ ٱلۡبَرِّ وَٱلۡبَحۡرِ وَمَن يُرۡسِلُ ٱلرِّيَٰحَ بُشۡرَۢا بَيۡنَ يَدَيۡ رَحۡمَتِهِۦٓۗ أَءِلَٰهٌ مَّعَ ٱللَّهِۚ تَعَٰلَى ٱللَّهُ عَمَّا يُشۡرِكُونَ  ۝٦٣
Ammany-yahdeekum fee zulumaatil barri wal bahri wa many yursilu riyaaha bushram baina yadai rahmatih; `a-ilaahum ma`al laah; Ta`aalal laahu `ammaa yushrikoon
भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और तरी की तारिक़ियों में राह दिखाता है और कौन उसकी बाराने रहमत के आगे आगे (बारिश की) ख़ुशखबरी लेकर हवाओं को भेजता है-क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) ये लोग जिन चीज़ों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं ख़ुदा उससे बालातर है
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27:64 🔁 0/5
أَمَّن يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ وَمَن يَرۡزُقُكُم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِۗ أَءِلَٰهٌ مَّعَ ٱللَّهِۚ قُلۡ هَاتُواْ بُرۡهَٰنَكُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ  ۝٦٤
Ammmany-yabda`ul khalqa summa yu`eeduhoo wa many-yarzuqukum minas sammaaa`i wal ard; `a-ilaahum ma`allah; qul haatoo burhaanakum in kuntum saadiqeen
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान व ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) (ऐ रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो
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27:65 🔁 0/5
قُل لَّا يَعۡلَمُ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ ٱلۡغَيۡبَ إِلَّا ٱللَّهُۚ وَمَا يَشۡعُرُونَ أَيَّانَ يُبۡعَثُونَ  ۝٦٥
Qul laa ya`lamu mman fis sammaawaati wal ardil ghaiba illal laah; wa maa yash`uroona aiyaana yub`asoon
(ऐ रसूल इन से) कह दो कि जितने लोग आसमान व ज़मीन में हैं उनमे से कोई भी गैब की बात के सिवा नहीं जानता और वह भी तो नहीं समझते कि क़ब्र से दोबारा कब ज़िन्दा उठ खडे क़िए जाएँगें
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27:66 🔁 0/5
بَلِ ٱدَّٰرَكَ عِلۡمُهُمۡ فِي ٱلۡأٓخِرَةِۚ بَلۡ هُمۡ فِي شَكٍّ مِّنۡهَاۖ بَلۡ هُم مِّنۡهَا عَمُونَ  ۝٦٦
Balid daaraka `ilmuhum fil Aakhirah; bal hum fee shakkim minhaa bal hum minhaa `amoon
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं
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27:67 🔁 0/5
وَقَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓاْ أَءِذَا كُنَّا تُرَٰبًا وَءَابَآؤُنَآ أَئِنَّا لَمُخۡرَجُونَ  ۝٦٧
Wa qaalal lazeena kafarooo `a-izaa kunnaa turaabanw wa aabaaa`unaaa a`innaa lamukhrajoon
और कुफ्फार कहने लगे कि क्या जब हम और हमारे बाप दादा (सड़ गल कर) मिट्टी हो जाएँगें तो क्या हम फिर निकाले जाएँगें
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لَقَدۡ وُعِدۡنَا هَٰذَا نَحۡنُ وَءَابَآؤُنَا مِن قَبۡلُ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّآ أَسَٰطِيرُ ٱلۡأَوَّلِينَ  ۝٦٨
Laqad wu`idnaa haazaa nahnu wa aabaaa`unaa min qablu in haazaaa illaaa asaateerul awwaleen
उसका तो पहले भी हम से और हमारे बाप दादाओं से वायदा किया गया था (कहाँ का उठना और कैसी क़यामत) ये तो हो न हो अगले लोगों के ढकोसले हैं
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قُلۡ سِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلۡمُجۡرِمِينَ  ۝٦٩
Qul seeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana `aaqibatul mujremeen
(ऐ रसूल) लोगों से कह दो कि रुए ज़मीन पर ज़रा चल फिर कर देखो तो गुनाहगारों का अन्जाम क्या हुआ
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وَلَا تَحۡزَنۡ عَلَيۡهِمۡ وَلَا تَكُن فِي ضَيۡقٍ مِّمَّا يَمۡكُرُونَ  ۝٧٠
Wa laa tahzan `alaihim wa laa takun fee daiqim mimmaa yamkuroon
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो
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وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ  ۝٧١
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
और ये (कुफ्फ़ार मुसलमानों से) पूछते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (क़यामत या अज़ाब का) वायदा कब पूरा होगा
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27:72 🔁 0/5
قُلۡ عَسَىٰٓ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعۡضُ ٱلَّذِي تَسۡتَعۡجِلُونَ  ۝٧٢
Qul `asaaa any-yakoona radifa lakum ba`dul lazee tasta`jiloon
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम लोग जल्दी मचा रहे हो क्या अजब है इसमे से कुछ करीब आ गया हो
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27:73 🔁 0/5
وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضۡلٍ عَلَى ٱلنَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَشۡكُرُونَ  ۝٧٣
Wa innna Rabbaka lazoo fadlin `alan naasi wa laakina aksarahum laa yashkuroon
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार लोगों पर बड़ा फज़ल व करम करने वाला है मगर बहुतेरे लोग (उसका) शुक्र नहीं करते
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27:74 🔁 0/5
وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعۡلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمۡ وَمَا يُعۡلِنُونَ  ۝٧٤
Wa inna Rabbaka la ya`lamu maa tukinnu sudooruhum wa maa yu`linoon
और इसमें तो शक नहीं जो बातें उनके दिलों में पोशीदा हैं और जो कुछ ये एलानिया करते हैं तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनी जानता है
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27:75 🔁 0/5
وَمَا مِنۡ غَآئِبَةٍ فِي ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِلَّا فِي كِتَٰبٍ مُّبِينٍ  ۝٧٥
Wa maa min ghaaa`ibatin fis samaaa`i wal ardi illaa fee kitaabimm mubeen
और आसमान व ज़मीन में कोई ऐसी बात पोशीदा नहीं जो वाज़ेए व रौशन किताब (लौहे महफूज़) में (लिखी) मौजूद न हो
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27:76 🔁 0/5
إِنَّ هَٰذَا ٱلۡقُرۡءَانَ يَقُصُّ عَلَىٰ بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ أَكۡثَرَ ٱلَّذِي هُمۡ فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ  ۝٧٦
Inna haazal Qur-aana yaqussu `alaa Baneee israaa`eela aksaral lazee hum feehi yakhtalifoon
इसमें भी शक नहीं कि ये क़ुरान बनी इसराइल पर उनकी अक्सर बातों को जिन में ये इख्तेलाफ़ करते हैं ज़ाहिर कर देता है
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27:77 🔁 0/5
وَإِنَّهُۥ لَهُدًى وَرَحۡمَةٌ لِّلۡمُؤۡمِنِينَ  ۝٧٧
Wa innahoo lahudanw wa rahmatul lilmu`mineen
और इसमें भी शक नहीं कि ये कुरान ईमानदारों के वास्ते अज़सरतापा हिदायत व रहमत है
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27:78 🔁 0/5
إِنَّ رَبَّكَ يَقۡضِي بَيۡنَهُم بِحُكۡمِهِۦۚ وَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡعَلِيمُ  ۝٧٨
Inna Rabbaka yaqdee bainahum bihukmih; wa Huwal `Azeezul `Aleem
(ऐ रसूल) बेशक तुम्हारा परवरदिगार अपने हुक्म से उनके आपस (के झगड़ों) का फैसला कर देगा और वह (सब पर) ग़ालिब और वाक़िफकार है
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27:79 🔁 0/5
فَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنَّكَ عَلَى ٱلۡحَقِّ ٱلۡمُبِينِ  ۝٧٩
Fatawakkal `alal laahi innaka `alal haqqil mubeen
तो (ऐ रसूल) तुम खुदा पर भरोसा रखो बेशक तुम यक़ीनी सरीही हक़ पर हो
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27:80 🔁 0/5
إِنَّكَ لَا تُسۡمِعُ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَلَا تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ ٱلدُّعَآءَ إِذَا وَلَّوۡاْ مُدۡبِرِينَ  ۝٨٠
Innaka laa tusmi`ul mawtaa wa laa tusmi`us summad du`aaa izaa wallaw mudbireen
बेशक न तो तुम मुर्दों को (अपनी बात) सुना सकते हो और न बहरों को अपनी आवाज़ सुना सकते हो (ख़ासकर) जब वह पीठ फेर कर भाग ख़डें हो
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27:81 🔁 0/5
وَمَآ أَنتَ بِهَٰدِي ٱلۡعُمۡيِ عَن ضَلَٰلَتِهِمۡۖ إِن تُسۡمِعُ إِلَّا مَن يُؤۡمِنُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُم مُّسۡلِمُونَ  ۝٨١
Wa maaa anta bihaadil `umyi `an dalaalatihim in tusmi`u illaa mai yu`minu bi aayaatinaa fahum muslimoon
और न तुम अंधें को उनकी गुमराही से राह पर ला सकते हो तुम तो बस उन्हीं लोगों को (अपनी बात) सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान रखते हैं
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27:82 🔁 0/5
۞ وَإِذَا وَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِمۡ أَخۡرَجۡنَا لَهُمۡ دَآبَّةً مِّنَ ٱلۡأَرۡضِ تُكَلِّمُهُمۡ أَنَّ ٱلنَّاسَ كَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا لَا يُوقِنُونَ  ۝٨٢
Wa izaa waqa`al qawhu `alaihim akhrajnaa lahum daabbatam minal ardi tukal limuhum annan naasa kaanoo bi aayaatinaa laa yooqinoon
फिर वही लोग तो मानने वाले भी हैं जब उन लोगों पर (क़यामत का) वायदा पूरा होगा तो हम उनके वास्ते ज़मीन से एक चलने वाला निकाल खड़ा करेंगे जो उनसे ये बाते करेंगा कि (फलॉ फला) लोग हमारी आयतो का यक़ीन नहीं रखते थे
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27:83 🔁 0/5
وَيَوۡمَ نَحۡشُرُ مِن كُلِّ أُمَّةٍ فَوۡجًا مِّمَّن يُكَذِّبُ بِـَٔايَٰتِنَا فَهُمۡ يُوزَعُونَ  ۝٨٣
Wa Yawma nahshuru min kulli ummmatin fawjam mim many-yukazzibu bi Aayaatinaa fahum yooza`oon
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम हर उम्मत से एक ऐसे गिरोह को जो हमारी आयतों को झुठलाया करते थे (ज़िन्दा करके) जमा करेंगे फिर उन की टोलियाँ अलहदा अलहदा करेंगे
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27:84 🔁 0/5
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءُو قَالَ أَكَذَّبۡتُم بِـَٔايَٰتِي وَلَمۡ تُحِيطُواْ بِهَا عِلۡمًا أَمَّاذَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ  ۝٨٤
Hattaaa izaa jaaa`oo qaala akazzabtum bi Aayaatee wa lam tuheetoo bihaa `ilman ammaazaa kuntum ta`maloon
यहाँ तक कि जब वह सब (ख़ुदा के सामने) आएँगें और ख़ुदा उनसे कहेगा क्या तुम ने हमारी आयतों को बगैर अच्छी तरह समझे बूझे झुठलाया-भला तुम क्या क्या करते थे और चूँकि ये लोग ज़ुल्म किया करते थे
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27:85 🔁 0/5
وَوَقَعَ ٱلۡقَوۡلُ عَلَيۡهِم بِمَا ظَلَمُواْ فَهُمۡ لَا يَنطِقُونَ  ۝٨٥
Wa waqa`al qawlu `alaihim bimaa zalamoo fahum laa yantiqoon
इन पर (अज़ाब का) वायदा पूरा हो गया फिर ये लोग कुछ बोल भी तो न सकेंगें
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27:86 🔁 0/5
أَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا جَعَلۡنَا ٱلَّيۡلَ لِيَسۡكُنُواْ فِيهِ وَٱلنَّهَارَ مُبۡصِرًاۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَٰتٍ لِّقَوۡمٍ يُؤۡمِنُونَ  ۝٨٦
Alam yaraw annaa ja`alnal laila li yaskunoo feehi wannahaara mubsiraa; inna fee zaalika la Aayaatil liqaw miny-yu`minoon
क्या इन लोगों ने ये भी न देखा कि हमने रात को इसलिए बनाया कि ये लोग इसमे चैन करें और दिन को रौशन (ताकि देखभाल करे) बेशक इसमें ईमान लाने वालों के लिए (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
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27:87 🔁 0/5
وَيَوۡمَ يُنفَخُ فِي ٱلصُّورِ فَفَزِعَ مَن فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَن فِي ٱلۡأَرۡضِ إِلَّا مَن شَآءَ ٱللَّهُۚ وَكُلٌّ أَتَوۡهُ دَٰخِرِينَ  ۝٨٧
Wa Yawma yunfakhu fis Soori fafazi`a man fis samaawaati wa man fil ardi illaa man shaaa`al laah; wa kullun atawhu daakhireen
और (उस दिन याद करो) जिस दिन सूर फूँका जाएगा तो जितने लोग आसमानों मे हैं और जितने लोग ज़मीन में हैं (ग़रज़ सब के सब) दहल जाएंगें मगर जिस शख्स को ख़ुदा चाहे (वो अलबत्ता मुतमइन रहेगा) और सब लोग उसकी बारगाह में ज़िल्लत व आजिज़ी की हालत में हाज़िर होगें
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27:88 🔁 0/5
وَتَرَى ٱلۡجِبَالَ تَحۡسَبُهَا جَامِدَةً وَهِيَ تَمُرُّ مَرَّ ٱلسَّحَابِۚ صُنۡعَ ٱللَّهِ ٱلَّذِيٓ أَتۡقَنَ كُلَّ شَيۡءٍۚ إِنَّهُۥ خَبِيرُۢ بِمَا تَفۡعَلُونَ  ۝٨٨
Wa taral jibaala tahsabuhaa jaamidatanw wa hiya tamurru marras sahaab; sun`al laahil lazeee atqana kulla shai`; innahoo khabeerum bimaa taf`aloon
और तुम पहाड़ों को देखकर उन्हें मज़बूर जमे हुए समझतें हो हालाकि ये (क़यामत के दिन) बादल की तरह उड़े उडे फ़िरेगें (ये भी) ख़ुदा की कारीगरी है कि जिसने हर चीज़ को ख़ूब मज़बूत बनाया है बेशक जो कुछ तुम लोग करते हो उससे वह ख़ूब वाक़िफ़ है
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27:89 🔁 0/5
مَن جَآءَ بِٱلۡحَسَنَةِ فَلَهُۥ خَيۡرٌ مِّنۡهَا وَهُم مِّن فَزَعٍ يَوۡمَئِذٍ ءَامِنُونَ  ۝٨٩
Man jaaa`a bilhasanati falahoo khairum minhaa wa hum min faza`iny Yawma`izin aaminoon
जो शख्स नेक काम करेगा उसके लिए उसकी जज़ा उससे कहीं बेहतर है ओर ये लोग उस दिन ख़ौफ व ख़तरे से महफूज़ रहेंगे
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27:90 🔁 0/5
وَمَن جَآءَ بِٱلسَّيِّئَةِ فَكُبَّتۡ وُجُوهُهُمۡ فِي ٱلنَّارِ هَلۡ تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ  ۝٩٠
Wa man jaaa`a bissai yi`ati fakubbat wujoohuhum fin Naari hal tujzawna illaa maa kuntum ta`maloon
और जो लोग बुरा काम करेंगे वह मुँह के बल जहन्नुम में झोक दिए जाएँगे (और उनसे कहा जाएगा कि) जो कुछ तुम (दुनिया में) करते थे बस उसी का जज़ा तुम्हें दी जाएगी
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27:91 🔁 0/5
إِنَّمَآ أُمِرۡتُ أَنۡ أَعۡبُدَ رَبَّ هَٰذِهِ ٱلۡبَلۡدَةِ ٱلَّذِي حَرَّمَهَا وَلَهُۥ كُلُّ شَيۡءٍۖ وَأُمِرۡتُ أَنۡ أَكُونَ مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ  ۝٩١
Innamaaa umirtu an a`buda Rabba haazihil baldatil lazee harramahaa wa lahoo kullu shai`inw wa umirtu an akoona minal muslimeen
(ऐ रसूल उनसे कह दो कि) मुझे तो बस यही हुक्म दिया गया है कि मै इस शहर (मक्का) के मालिक की इबादत करुँ जिसने उसे इज्ज़त व हुरमत दी है और हर चीज़ उसकी है और मुझे ये हुक्म दिया गया कि मै (उसके) फरमाबरदार बन्दों में से हूँ
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27:92 🔁 0/5
وَأَنۡ أَتۡلُوَاْ ٱلۡقُرۡءَانَۖ فَمَنِ ٱهۡتَدَىٰ فَإِنَّمَا يَهۡتَدِي لِنَفۡسِهِۦۖ وَمَن ضَلَّ فَقُلۡ إِنَّمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُنذِرِينَ  ۝٩٢
Wa an atluwal Qur-aana famanih tadaa fa innnamaa yahtadee linafsihee wa man dalla faqul innamaaa ana minal munzireen
और ये कि मै क़ुरान पढ़ा करुँ फिर जो शख्स राह पर आया तो अपनी ज़ात के नफे क़े वास्ते राह पर आया और जो गुमराह हुआ तो तुम कह दो कि मै भी एक एक डराने वाला हूँ
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27:93 🔁 0/5
وَقُلِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ سَيُرِيكُمۡ ءَايَٰتِهِۦ فَتَعۡرِفُونَهَاۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَٰفِلٍ عَمَّا تَعۡمَلُونَ  ۝٩٣
Wa qulil hamdu lillaahi sa yureekum Aayaatihee fata`ri foonahaa; wa maa Rabbuka bighaaflin `ammaa ta`maloon
और तुम कह दो कि अल्हमदोलिल्लाह वह अनक़रीब तुम्हें (अपनी क़ुदरत की) निशानियाँ दिखा देगा तो तुम उन्हें पहचान लोगे और जो कुछ तुम करते हो तुम्हारा परवरदिगार उससे ग़ाफिल नहीं है
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🎊 शाबाश! याद पूरी हुई
Mishary Rashid Alafasy
Mahmoud Khalil Al-Husary
Abdurrahman As-Sudais
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
Abdul Basit Abdul Samad
Ali Al-Hudhaify
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
Abu Bakr Ash-Shaatree
Muhammad Ayyoub
Abdullah Basfar
Abdullah Al-Juhani
Maher Al Muaiqly
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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए