2026-09-28

📜 तफ़्सीर

शब्दों के अर्थ:

  • وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ: हम अवश्य तुम्हें परीक्षा में डालेंगे
  • الْخَوْفِ: भय (शत्रु का भय)
  • الْجُوعِ: भूख (अकाल)
  • نَقْصٍ: कमी
  • الْأَمْوَالِ: धन-संपत्ति
  • الْأَنفُسِ: जानें (प्राण)
  • الثَّمَرَاتِ: फल (फसलें)
  • الصَّابِرِينَ: धैर्य रखने वाले

विस्तृत तफसीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपने ईमानवाले बंदों को बता रहे हैं कि यह दुनिया आराम और चैन की जगह नहीं है, बल्कि यह इम्तिहान (परीक्षा) की जगह है। अल्लाह तआला ने अपनी बेहतरीन हिकमत से यह नियम बनाया है कि वह अपने बंदों को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों और मुसीबतों से परखता है।

यह परीक्षा कई रूपों में आती है:

  1. भय (खौफ): दुश्मनों का डर, युद्ध की स्थिति, या किसी खतरे का भय
  2. भूख (जू'): अकाल, भोजन की कमी, या कठिनाई से रोज़ी हासिल होना
  3. धन की कमी: संपत्ति का नुकसान, व्यापार में घाटा, या कमाई में कठिनाई
  4. जान का नुकसान: मृत्यु, बीमारी, या अल्लाह की राह में शहादत
  5. फलों की कमी: फसलों का नष्ट होना, बागों को नुकसान, या पैदावार में कमी

यह सारी परीक्षाएँ अल्लाह की ओर से हैं, और इनका उद्देश्य यह नहीं है कि अल्लाह को पता चले कि कौन सच्चा है और कौन झूठा — अल्लाह तो सब कुछ जानता है — बल्कि उद्देश्य यह है कि बंदे का ईमान प्रकट हो, उसका सब्र और शुक्र जाहिर हो, और उसका दर्जा बुलंद हो।

इसके बाद अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को आदेश देते हैं कि वे उन लोगों को खुशखबरी सुनाएँ जो इन मुसीबतों पर धैर्य रखते हैं। यह खुशखबरी क्या है? यह कि धैर्यवानों के लिए दुनिया में भी अच्छा अंजाम है और आख़िरत में भी बेहतरीन इनाम है। अल्लाह तआला उन्हें बिना हिसाब के अज्र देंगे, उनके गुनाह माफ करेंगे, और उन्हें जन्नत में दाखिल करेंगे।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबतें और परेशानियाँ इस दुनिया में आम बात हैं। जब भी कोई कठिनाई आए, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सब्र करना चाहिए। याद रखिए, सब्र का मतलब यह नहीं है कि हम हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएँ, बल्कि सब्र का मतलब है — अल्लाह पर भरोसा रखते हुए, जो कुछ हो रहा है उसे अल्लाह की तरफ से समझें, अपनी ज़ुबान से बुराई न करें, दिल में शिकायत न रखें, और अल्लाह से अच्छे अंजाम की उम्मीद रखें।

जो व्यक्ति सब्र करता है, अल्लाह उसके साथ होता है। अल्लाह कुरआन में फरमाता है: "बेशक अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।" (अल-बकरा: 153)

तो आइए, हम सब सब्र करने वालों में शामिल हों, और अल्लाह से उस बेहतरीन इनाम की उम्मीद रखें जो उसने धैर्यवानों के लिए तैयार किया है। यह दुनिया की परीक्षा कुछ दिनों की है, लेकिन उसका इनाम हमेशा हमेशा के लिए है। अल्लाह हम सबको सब्र और शुक्र की तौफीक दे। आमीन।

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📚 सूरा पवित्र क़ुरआन

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पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

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