सूरा अल-वाकिया अरबी और हिंदी

सूरा अल-वाकिया को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (96 आयत — مكية). अल-वाकिया सुनें, अल-वाकिया अनुवाद, अल-वाकिया mp3, अल-वाकिया pdf.

सूरा अल-वाकिया पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
إِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
जब क़यामत बरपा होगी और उसके वाक़िया होने में ज़रा झूट नहीं
لَيْسَ لِوَقْعَتِهَا كَاذِبَةٌ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
(उस वक्त लोगों में फ़र्क ज़ाहिर होगा)
خَافِضَةٌ رَّافِعَةٌ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
कि किसी को पस्त करेगी किसी को बुलन्द
إِذَا رُجَّتِ الْأَرْضُ رَجًّا ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
जब ज़मीन बड़े ज़ोरों में हिलने लगेगी
وَبُسَّتِ الْجِبَالُ بَسًّا ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
और पहाड़ (टकरा कर) बिल्कुल चूर चूर हो जाएँगे
فَكَانَتْ هَبَاءً مُّنبَثًّا ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
फिर ज़र्रे बन कर उड़ने लगेंगे
وَكُنتُمْ أَزْوَاجًا ثَلَاثَةً ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
और तुम लोग तीन किस्म हो जाओगे
فَأَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
तो दाहिने हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (वाह) दाहिने हाथ वाले क्या (चैन में) हैं
وَأَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
और बाएं हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (अफ़सोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
وَالسَّابِقُونَ السَّابِقُونَ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं (वाह क्या कहना) वह आगे ही बढ़ने वाले थे
أُولَٰئِكَ الْمُقَرَّبُونَ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
यही लोग (ख़ुदा के) मुक़र्रिब हैं
فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
आराम व आसाइश के बाग़ों में बहुत से
ثُلَّةٌ مِّنَ الْأَوَّلِينَ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
तो अगले लोगों में से होंगे
وَقَلِيلٌ مِّنَ الْآخِرِينَ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और कुछ थोडे से पिछले लोगों में से मोती
عَلَىٰ سُرُرٍ مَّوْضُونَةٍ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
और याक़ूत से जड़े हुए सोने के तारों से बने हुए
مُّتَّكِئِينَ عَلَيْهَا مُتَقَابِلِينَ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
तख्ते पर एक दूसरे के सामने तकिए लगाए (बैठे) होंगे
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُّخَلَّدُونَ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
नौजवान लड़के जो (बेहिश्त में) हमेशा (लड़के ही बने) रहेंगे
بِأَكْوَابٍ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
जिसके (पीने) से न तो उनको (ख़ुमार से) दर्दसर होगा और न वह बदहवास मदहोश होंगे
وَفَاكِهَةٍ مِّمَّا يَتَخَيَّرُونَ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
और जिस क़िस्म के मेवे पसन्द करें
وَلَحْمِ طَيْرٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
और जिस क़िस्म के परिन्दे का गोश्त उनका जी चाहे (सब मौजूद है)
وَحُورٌ عِينٌ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
और बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरें
كَأَمْثَالِ اللُّؤْلُؤِ الْمَكْنُونِ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
जैसे एहतेयात से रखे हुए मोती
جَزَاءً بِمَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
ये बदला है उनके (नेक) आमाल का
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا تَأْثِيمًا ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
वहाँ न तो बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह की बात
إِلَّا قِيلًا سَلَامًا سَلَامًا ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
(फहश) बस उनका कलाम सलाम ही सलाम होगा
وَأَصْحَابُ الْيَمِينِ مَا أَصْحَابُ الْيَمِينِ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
और दाहिने हाथ वाले (वाह) दाहिने हाथ वालों का क्या कहना है
فِي سِدْرٍ مَّخْضُودٍ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
बे काँटे की बेरो और लदे गुथे हुए
وَطَلْحٍ مَّنضُودٍ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
केलों और लम्बी लम्बी छाँव
وَظِلٍّ مَّمْدُودٍ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
और झरनो के पानी
وَمَاءٍ مَّسْكُوبٍ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
और अनारों
وَفَاكِهَةٍ كَثِيرَةٍ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
मेवो में होंगें
لَّا مَقْطُوعَةٍ وَلَا مَمْنُوعَةٍ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
जो न कभी खत्म होंगे और न उनकी कोई रोक टोक
وَفُرُشٍ مَّرْفُوعَةٍ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
और ऊँचे ऊँचे (नरम गद्दो के) फ़र्शों में (मज़े करते) होंगे
إِنَّا أَنشَأْنَاهُنَّ إِنشَاءً ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
(उनको) वह हूरें मिलेंगी जिसको हमने नित नया पैदा किया है
فَجَعَلْنَاهُنَّ أَبْكَارًا ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ प्यारी प्यारी हमजोलियाँ बनाया
عُرُبًا أَتْرَابًا ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
(ये सब सामान)
لِّأَصْحَابِ الْيَمِينِ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
दाहिने हाथ (में नामए आमाल लेने) वालों के वास्ते है
ثُلَّةٌ مِّنَ الْأَوَّلِينَ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
(इनमें) बहुत से तो अगले लोगों में से
وَثُلَّةٌ مِّنَ الْآخِرِينَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
और बहुत से पिछले लोगों में से
وَأَصْحَابُ الشِّمَالِ مَا أَصْحَابُ الشِّمَالِ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
और बाएं हाथ (में नामए आमाल लेने) वाले (अफसोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
فِي سَمُومٍ وَحَمِيمٍ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
(दोज़ख़ की) लौ और खौलते हुए पानी
وَظِلٍّ مِّن يَحْمُومٍ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
और काले सियाह धुएँ के साये में होंगे
لَّا بَارِدٍ وَلَا كَرِيمٍ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
जो न ठन्डा और न ख़ुश आइन्द
إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
ये लोग इससे पहले (दुनिया में) ख़ूब ऐश उड़ा चुके थे
وَكَانُوا يُصِرُّونَ عَلَى الْحِنثِ الْعَظِيمِ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
और बड़े गुनाह (शिर्क) पर अड़े रहते थे
وَكَانُوا يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
और कहा करते थे कि भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी और हडिडयाँ (ही हडिडयाँ) रह जाएँगे
أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
तो क्या हमें या हमारे अगले बाप दादाओं को फिर उठना है
قُلْ إِنَّ الْأَوَّلِينَ وَالْآخِرِينَ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगले और पिछले
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَاتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
सब के सब रोजे मुअय्यन की मियाद पर ज़रूर इकट्ठे किए जाएँगे
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا الضَّالُّونَ الْمُكَذِّبُونَ ۝٥١
📖 अनुवाद आयत 51
फिर तुमको बेशक ऐ गुमराहों झुठलाने वालों
لَآكِلُونَ مِن شَجَرٍ مِّن زَقُّومٍ ۝٥٢
📖 अनुवाद आयत 52
यक़ीनन (जहन्नुम में) थोहड़ के दरख्तों में से खाना होगा
فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ ۝٥٣
📖 अनुवाद आयत 53
तो तुम लोगों को उसी से (अपना) पेट भरना होगा
فَشَارِبُونَ عَلَيْهِ مِنَ الْحَمِيمِ ۝٥٤
📖 अनुवाद आयत 54
फिर उसके ऊपर खौलता हुआ पानी पीना होगा
فَشَارِبُونَ شُرْبَ الْهِيمِ ۝٥٥
📖 अनुवाद आयत 55
और पियोगे भी तो प्यासे ऊँट का सा (डग डगा के) पीना
هَٰذَا نُزُلُهُمْ يَوْمَ الدِّينِ ۝٥٦
📖 अनुवाद आयत 56
क़यामत के दिन यही उनकी मेहमानी होगी
نَحْنُ خَلَقْنَاكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ ۝٥٧
📖 अनुवाद आयत 57
तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है
أَفَرَأَيْتُم مَّا تُمْنُونَ ۝٥٨
📖 अनुवाद आयत 58
फिर तुम लोग (दोबार की) क्यों नहीं तस्दीक़ करते
أَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُ أَمْ نَحْنُ الْخَالِقُونَ ۝٥٩
📖 अनुवाद आयत 59
तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ الْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ ۝٦٠
📖 अनुवाद आयत 60
हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं
عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَالَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِي مَا لَا تَعْلَمُونَ ۝٦١
📖 अनुवाद आयत 61
कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ النَّشْأَةَ الْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ ۝٦٢
📖 अनुवाद आयत 62
और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते
أَفَرَأَيْتُم مَّا تَحْرُثُونَ ۝٦٣
📖 अनुवाद आयत 63
भला देखो तो कि जो कुछ तुम लोग बोते हो क्या
أَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُ أَمْ نَحْنُ الزَّارِعُونَ ۝٦٤
📖 अनुवाद आयत 64
तुम लोग उसे उगाते हो या हम उगाते हैं अगर हम चाहते
لَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَاهُ حُطَامًا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ ۝٦٥
📖 अनुवाद आयत 65
तो उसे चूर चूर कर देते तो तुम बातें ही बनाते रह जाते
إِنَّا لَمُغْرَمُونَ ۝٦٦
📖 अनुवाद आयत 66
कि (हाए) हम तो (मुफ्त) तावान में फॅसे (नहीं)
بَلْ نَحْنُ مَحْرُومُونَ ۝٦٧
📖 अनुवाद आयत 67
हम तो बदनसीब हैं
أَفَرَأَيْتُمُ الْمَاءَ الَّذِي تَشْرَبُونَ ۝٦٨
📖 अनुवाद आयत 68
तो क्या तुमने पानी पर भी नज़र डाली जो (दिन रात) पीते हो
أَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ الْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ الْمُنزِلُونَ ۝٦٩
📖 अनुवाद आयत 69
क्या उसको बादल से तुमने बरसाया है या हम बरसाते हैं
لَوْ نَشَاءُ جَعَلْنَاهُ أُجَاجًا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ ۝٧٠
📖 अनुवाद आयत 70
अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग यक्र क्यों नहीं करते
أَفَرَأَيْتُمُ النَّارَ الَّتِي تُورُونَ ۝٧١
📖 अनुवाद आयत 71
तो क्या तुमने आग पर भी ग़ौर किया जिसे तुम लोग लकड़ी से निकालते हो
أَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَا أَمْ نَحْنُ الْمُنشِئُونَ ۝٧٢
📖 अनुवाद आयत 72
क्या उसके दरख्त को तुमने पैदा किया या हम पैदा करते हैं
نَحْنُ جَعَلْنَاهَا تَذْكِرَةً وَمَتَاعًا لِّلْمُقْوِينَ ۝٧٣
📖 अनुवाद आयत 73
हमने आग को (जहन्नुम की) याद देहानी और मुसाफिरों के नफे के (वास्ते पैदा किया)
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ ۝٧٤
📖 अनुवाद आयत 74
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
۞ فَلَا أُقْسِمُ بِمَوَاقِعِ النُّجُومِ ۝٧٥
📖 अनुवाद आयत 75
तो मैं तारों के मनाज़िल की क़सम खाता हूँ
وَإِنَّهُ لَقَسَمٌ لَّوْ تَعْلَمُونَ عَظِيمٌ ۝٧٦
📖 अनुवाद आयत 76
और अगर तुम समझो तो ये बड़ी क़सम है
إِنَّهُ لَقُرْآنٌ كَرِيمٌ ۝٧٧
📖 अनुवाद आयत 77
कि बेशक ये बड़े रूतबे का क़ुरान है
فِي كِتَابٍ مَّكْنُونٍ ۝٧٨
📖 अनुवाद आयत 78
जो किताब (लौहे महफूज़) में (लिखा हुआ) है
لَّا يَمَسُّهُ إِلَّا الْمُطَهَّرُونَ ۝٧٩
📖 अनुवाद आयत 79
इसको बस वही लोग छूते हैं जो पाक हैं
تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ ۝٨٠
📖 अनुवाद आयत 80
सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है
أَفَبِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ ۝٨١
📖 अनुवाद आयत 81
तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ ۝٨٢
📖 अनुवाद आयत 82
और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो
فَلَوْلَا إِذَا بَلَغَتِ الْحُلْقُومَ ۝٨٣
📖 अनुवाद आयत 83
तो क्या जब जान गले तक पहुँचती है
وَأَنتُمْ حِينَئِذٍ تَنظُرُونَ ۝٨٤
📖 अनुवाद आयत 84
और तुम उस वक्त (क़ी हालत) पड़े देखा करते हो
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ ۝٨٥
📖 अनुवाद आयत 85
और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता
فَلَوْلَا إِن كُنتُمْ غَيْرَ مَدِينِينَ ۝٨٦
📖 अनुवाद आयत 86
तो अगर तुम किसी के दबाव में नहीं हो
تَرْجِعُونَهَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٨٧
📖 अनुवाद आयत 87
तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते
فَأَمَّا إِن كَانَ مِنَ الْمُقَرَّبِينَ ۝٨٨
📖 अनुवाद आयत 88
पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है
فَرَوْحٌ وَرَيْحَانٌ وَجَنَّتُ نَعِيمٍ ۝٨٩
📖 अनुवाद आयत 89
तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़
وَأَمَّا إِن كَانَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ ۝٩٠
📖 अनुवाद आयत 90
और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है
فَسَلَامٌ لَّكَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ ۝٩١
📖 अनुवाद आयत 91
तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो
وَأَمَّا إِن كَانَ مِنَ الْمُكَذِّبِينَ الضَّالِّينَ ۝٩٢
📖 अनुवाद आयत 92
और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है
فَنُزُلٌ مِّنْ حَمِيمٍ ۝٩٣
📖 अनुवाद आयत 93
तो (उसकी) मेहमानी खौलता हुआ पानी है
وَتَصْلِيَةُ جَحِيمٍ ۝٩٤
📖 अनुवाद आयत 94
और जहन्नुम में दाखिल कर देना
إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ حَقُّ الْيَقِينِ ۝٩٥
📖 अनुवाद आयत 95
बेशक ये (ख़बर) यक़ीनन सही है
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ ۝٩٦
📖 अनुवाद आयत 96
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
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56الواقعة Al-Waqi'ah 📚 96 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अल-वाकिया — 96 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए