सूरा अल-वाकिया अरबी और हिंदी
सूरा अल-वाकिया को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (96 आयत — مكية). अल-वाकिया सुनें, अल-वाकिया अनुवाद, अल-वाकिया mp3, अल-वाकिया pdf.सूरा अल-वाकिया पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
M
Mishary Rashid Alafasy
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Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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A
Abdurrahman As-Sudais
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ali Al-Hudhaify
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A
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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A
Abu Bakr Ash-Shaatree
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Abdullah Al-Juhani
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M
Maher Al Muaiqly
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Maher Al Muaiqly
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x1
إِذَا وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ ١
📖 अनुवाद
आयत 1
जब क़यामत बरपा होगी और उसके वाक़िया होने में ज़रा झूट नहीं
فَأَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَيْمَنَةِ ٨
📖 अनुवाद
आयत 8
तो दाहिने हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (वाह) दाहिने हाथ वाले क्या (चैन में) हैं
وَأَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ مَا أَصْحَابُ الْمَشْأَمَةِ ٩
📖 अनुवाद
आयत 9
और बाएं हाथ (में आमाल नामा लेने) वाले (अफ़सोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
وَالسَّابِقُونَ السَّابِقُونَ ١٠
📖 अनुवाद
आयत 10
और जो आगे बढ़ जाने वाले हैं (वाह क्या कहना) वह आगे ही बढ़ने वाले थे
مُّتَّكِئِينَ عَلَيْهَا مُتَقَابِلِينَ ١٦
📖 अनुवाद
आयत 16
तख्ते पर एक दूसरे के सामने तकिए लगाए (बैठे) होंगे
يَطُوفُ عَلَيْهِمْ وِلْدَانٌ مُّخَلَّدُونَ ١٧
📖 अनुवाद
आयत 17
नौजवान लड़के जो (बेहिश्त में) हमेशा (लड़के ही बने) रहेंगे
بِأَكْوَابٍ وَأَبَارِيقَ وَكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍ ١٨
📖 अनुवाद
आयत 18
(शरबत वग़ैरह के) सागर और चमकदार टोंटीदार कंटर और शफ्फ़ाफ़ शराब के जाम लिए हुए उनके पास चक्कर लगाते होंगे
لَّا يُصَدَّعُونَ عَنْهَا وَلَا يُنزِفُونَ ١٩
📖 अनुवाद
आयत 19
जिसके (पीने) से न तो उनको (ख़ुमार से) दर्दसर होगा और न वह बदहवास मदहोश होंगे
وَلَحْمِ طَيْرٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ ٢١
📖 अनुवाद
आयत 21
और जिस क़िस्म के परिन्दे का गोश्त उनका जी चाहे (सब मौजूद है)
لَا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا تَأْثِيمًا ٢٥
📖 अनुवाद
आयत 25
वहाँ न तो बेहूदा बात सुनेंगे और न गुनाह की बात
وَأَصْحَابُ الْيَمِينِ مَا أَصْحَابُ الْيَمِينِ ٢٧
📖 अनुवाद
आयत 27
और दाहिने हाथ वाले (वाह) दाहिने हाथ वालों का क्या कहना है
إِنَّا أَنشَأْنَاهُنَّ إِنشَاءً ٣٥
📖 अनुवाद
आयत 35
(उनको) वह हूरें मिलेंगी जिसको हमने नित नया पैदा किया है
فَجَعَلْنَاهُنَّ أَبْكَارًا ٣٦
📖 अनुवाद
आयत 36
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ प्यारी प्यारी हमजोलियाँ बनाया
وَأَصْحَابُ الشِّمَالِ مَا أَصْحَابُ الشِّمَالِ ٤١
📖 अनुवाद
आयत 41
और बाएं हाथ (में नामए आमाल लेने) वाले (अफसोस) बाएं हाथ वाले क्या (मुसीबत में) हैं
إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُتْرَفِينَ ٤٥
📖 अनुवाद
आयत 45
ये लोग इससे पहले (दुनिया में) ख़ूब ऐश उड़ा चुके थे
وَكَانُوا يُصِرُّونَ عَلَى الْحِنثِ الْعَظِيمِ ٤٦
📖 अनुवाद
आयत 46
और बड़े गुनाह (शिर्क) पर अड़े रहते थे
وَكَانُوا يَقُولُونَ أَئِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ٤٧
📖 अनुवाद
आयत 47
और कहा करते थे कि भला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी और हडिडयाँ (ही हडिडयाँ) रह जाएँगे
أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ ٤٨
📖 अनुवाद
आयत 48
तो क्या हमें या हमारे अगले बाप दादाओं को फिर उठना है
لَمَجْمُوعُونَ إِلَىٰ مِيقَاتِ يَوْمٍ مَّعْلُومٍ ٥٠
📖 अनुवाद
आयत 50
सब के सब रोजे मुअय्यन की मियाद पर ज़रूर इकट्ठे किए जाएँगे
ثُمَّ إِنَّكُمْ أَيُّهَا الضَّالُّونَ الْمُكَذِّبُونَ ٥١
📖 अनुवाद
आयत 51
फिर तुमको बेशक ऐ गुमराहों झुठलाने वालों
لَآكِلُونَ مِن شَجَرٍ مِّن زَقُّومٍ ٥٢
📖 अनुवाद
आयत 52
यक़ीनन (जहन्नुम में) थोहड़ के दरख्तों में से खाना होगा
نَحْنُ خَلَقْنَاكُمْ فَلَوْلَا تُصَدِّقُونَ ٥٧
📖 अनुवाद
आयत 57
तुम लोगों को (पहली बार भी) हम ही ने पैदा किया है
أَأَنتُمْ تَخْلُقُونَهُ أَمْ نَحْنُ الْخَالِقُونَ ٥٩
📖 अनुवाद
आयत 59
तो जिस नुत्फे क़ो तुम (औरतों के रहम में डालते हो) क्या तुमने देख भाल लिया है क्या तुम उससे आदमी बनाते हो या हम बनाते हैं
نَحْنُ قَدَّرْنَا بَيْنَكُمُ الْمَوْتَ وَمَا نَحْنُ بِمَسْبُوقِينَ ٦٠
📖 अनुवाद
आयत 60
हमने तुम लोगों में मौत को मुक़र्रर कर दिया है और हम उससे आजिज़ नहीं हैं
عَلَىٰ أَن نُّبَدِّلَ أَمْثَالَكُمْ وَنُنشِئَكُمْ فِي مَا لَا تَعْلَمُونَ ٦١
📖 अनुवाद
आयत 61
कि तुम्हारे ऐसे और लोग बदल डालें और तुम लोगों को इस (सूरत) में पैदा करें जिसे तुम मुत्तलक़ नहीं जानते
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ النَّشْأَةَ الْأُولَىٰ فَلَوْلَا تَذَكَّرُونَ ٦٢
📖 अनुवाद
आयत 62
और तुमने पैहली पैदाइश तो समझ ही ली है (कि हमने की) फिर तुम ग़ौर क्यों नहीं करते
أَأَنتُمْ تَزْرَعُونَهُ أَمْ نَحْنُ الزَّارِعُونَ ٦٤
📖 अनुवाद
आयत 64
तुम लोग उसे उगाते हो या हम उगाते हैं अगर हम चाहते
لَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَاهُ حُطَامًا فَظَلْتُمْ تَفَكَّهُونَ ٦٥
📖 अनुवाद
आयत 65
तो उसे चूर चूर कर देते तो तुम बातें ही बनाते रह जाते
أَفَرَأَيْتُمُ الْمَاءَ الَّذِي تَشْرَبُونَ ٦٨
📖 अनुवाद
आयत 68
तो क्या तुमने पानी पर भी नज़र डाली जो (दिन रात) पीते हो
أَأَنتُمْ أَنزَلْتُمُوهُ مِنَ الْمُزْنِ أَمْ نَحْنُ الْمُنزِلُونَ ٦٩
📖 अनुवाद
आयत 69
क्या उसको बादल से तुमने बरसाया है या हम बरसाते हैं
لَوْ نَشَاءُ جَعَلْنَاهُ أُجَاجًا فَلَوْلَا تَشْكُرُونَ ٧٠
📖 अनुवाद
आयत 70
अगर हम चाहें तो उसे खारी बना दें तो तुम लोग यक्र क्यों नहीं करते
أَفَرَأَيْتُمُ النَّارَ الَّتِي تُورُونَ ٧١
📖 अनुवाद
आयत 71
तो क्या तुमने आग पर भी ग़ौर किया जिसे तुम लोग लकड़ी से निकालते हो
أَأَنتُمْ أَنشَأْتُمْ شَجَرَتَهَا أَمْ نَحْنُ الْمُنشِئُونَ ٧٢
📖 अनुवाद
आयत 72
क्या उसके दरख्त को तुमने पैदा किया या हम पैदा करते हैं
نَحْنُ جَعَلْنَاهَا تَذْكِرَةً وَمَتَاعًا لِّلْمُقْوِينَ ٧٣
📖 अनुवाद
आयत 73
हमने आग को (जहन्नुम की) याद देहानी और मुसाफिरों के नफे के (वास्ते पैदा किया)
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ ٧٤
📖 अनुवाद
आयत 74
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ ٨٠
📖 अनुवाद
आयत 80
सारे जहाँ के परवरदिगार की तरफ से (मोहम्मद पर) नाज़िल हुआ है
أَفَبِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَنتُم مُّدْهِنُونَ ٨١
📖 अनुवाद
आयत 81
तो क्या तुम लोग इस कलाम से इन्कार रखते हो
وَتَجْعَلُونَ رِزْقَكُمْ أَنَّكُمْ تُكَذِّبُونَ ٨٢
📖 अनुवाद
आयत 82
और तुमने अपनी रोज़ी ये करार दे ली है कि (उसको) झुठलाते हो
وَنَحْنُ أَقْرَبُ إِلَيْهِ مِنكُمْ وَلَٰكِن لَّا تُبْصِرُونَ ٨٥
📖 अनुवाद
आयत 85
और हम इस (मरने वाले) से तुमसे भी ज्यादा नज़दीक होते हैं लेकिन तुमको दिखाई नहीं देता
تَرْجِعُونَهَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ٨٧
📖 अनुवाद
आयत 87
तो अगर (अपने दावे में) तुम सच्चे हो तो रूह को फेर क्यों नहीं देते
فَأَمَّا إِن كَانَ مِنَ الْمُقَرَّبِينَ ٨٨
📖 अनुवाद
आयत 88
पस अगर वह (मरने वाला ख़ुदा के) मुक़र्रेबीन से है
فَرَوْحٌ وَرَيْحَانٌ وَجَنَّتُ نَعِيمٍ ٨٩
📖 अनुवाद
आयत 89
तो (उस के लिए) आराम व आसाइश है और ख़ुशबूदार फूल और नेअमत के बाग़
وَأَمَّا إِن كَانَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ ٩٠
📖 अनुवाद
आयत 90
और अगर वह दाहिने हाथ वालों में से है
فَسَلَامٌ لَّكَ مِنْ أَصْحَابِ الْيَمِينِ ٩١
📖 अनुवाद
आयत 91
तो (उससे कहा जाएगा कि) तुम पर दाहिने हाथ वालों की तरफ़ से सलाम हो
وَأَمَّا إِن كَانَ مِنَ الْمُكَذِّبِينَ الضَّالِّينَ ٩٢
📖 अनुवाद
आयत 92
और अगर झुठलाने वाले गुमराहों में से है
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ ٩٦
📖 अनुवाद
आयत 96
तो (ऐ रसूल) तुम अपने बुज़ुर्ग परवरदिगार की तस्बीह करो
पढ़ें सूरा अल-वाकिया हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

