सूरा अन-नबा अरबी और हिंदी

सूरा अन-नबा को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (40 आयत — مكية). अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf.

सूरा अन-नबा पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
ये लोग आपस में किस चीज़ का हाल पूछते हैं
عَنِ النَّبَإِ الْعَظِيمِ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
एक बड़ी ख़बर का हाल
الَّذِي هُمْ فِيهِ مُخْتَلِفُونَ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
जिसमें लोग एख्तेलाफ कर रहे हैं
كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
देखो उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा
ثُمَّ كَلَّا سَيَعْلَمُونَ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
फिर इन्हें अनक़रीब ही ज़रूर मालूम हो जाएगा
أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ مِهَادًا ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
क्या हमने ज़मीन को बिछौना
وَالْجِبَالَ أَوْتَادًا ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया
وَخَلَقْنَاكُمْ أَزْوَاجًا ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
और हमने तुम लोगों को जोड़ा जोड़ा पैदा किया
وَجَعَلْنَا نَوْمَكُمْ سُبَاتًا ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
और तुम्हारी नींद को आराम (का बाइस) क़रार दिया
وَجَعَلْنَا اللَّيْلَ لِبَاسًا ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
और रात को परदा बनाया
وَجَعَلْنَا النَّهَارَ مَعَاشًا ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
और हम ही ने दिन को (कसब) मआश (का वक्त) बनाया
وَبَنَيْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعًا شِدَادًا ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
और तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आसमान) बनाए
وَجَعَلْنَا سِرَاجًا وَهَّاجًا ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
और हम ही ने (सूरज) को रौशन चिराग़ बनाया
وَأَنزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और हम ही ने बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया
لِّنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
ताकि उसके ज़रिए से दाने और सबज़ी
وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
और घने घने बाग़ पैदा करें
إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
बेशक फैसले का दिन मुक़र्रर है
يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
وَفُتِحَتِ السَّمَاءُ فَكَانَتْ أَبْوَابًا ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
और आसमान खोल दिए जाएँगे
وَسُيِّرَتِ الْجِبَالُ فَكَانَتْ سَرَابًا ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे
إِنَّ جَهَنَّمَ كَانَتْ مِرْصَادًا ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
बेशक जहन्नुम घात में है
لِّلطَّاغِينَ مَآبًا ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
सरकशों का (वही) ठिकाना है
لَّابِثِينَ فِيهَا أَحْقَابًا ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
उसमें मुद्दतों पड़े झींकते रहेंगें
لَّا يَذُوقُونَ فِيهَا بَرْدًا وَلَا شَرَابًا ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
न वहाँ ठन्डक का मज़ा चखेंगे और न खौलते हुए पानी
إِلَّا حَمِيمًا وَغَسَّاقًا ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
और बहती हुई पीप के सिवा कुछ पीने को मिलेगा
جَزَاءً وِفَاقًا ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
(ये उनकी कारस्तानियों का) पूरा पूरा बदला है
إِنَّهُمْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ حِسَابًا ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
बेशक ये लोग आख़ेरत के हिसाब की उम्मीद ही न रखते थे
وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا كِذَّابًا ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
और इन लोगो हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया
وَكُلَّ شَيْءٍ أَحْصَيْنَاهُ كِتَابًا ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
और हमने हर चीज़ को लिख कर मनज़बत कर रखा है
فَذُوقُوا فَلَن نَّزِيدَكُمْ إِلَّا عَذَابًا ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
तो अब तुम मज़ा चखो हमतो तुम पर अज़ाब ही बढ़ाते जाएँगे
إِنَّ لِلْمُتَّقِينَ مَفَازًا ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
बेशक परहेज़गारों के लिए बड़ी कामयाबी है
حَدَائِقَ وَأَعْنَابًا ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
(यानि बेहश्त के) बाग़ और अंगूर
وَكَوَاعِبَ أَتْرَابًا ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
और वह औरतें जिनकी उठती हुई जवानियाँ
وَكَأْسًا دِهَاقًا ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
और बाहम हमजोलियाँ हैं और शराब के लबरेज़ साग़र
لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا وَلَا كِذَّابًا ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
और शराब के लबरेज़ साग़र वहाँ न बेहूदा बात सुनेंगे और न झूठ
جَزَاءً مِّن رَّبِّكَ عَطَاءً حِسَابًا ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
(ये) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से काफ़ी इनाम और सिला है
رَّبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا الرَّحْمَٰنِ ۖ لَا يَمْلِكُونَ مِنْهُ خِطَابًا ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
जो सारे आसमान और ज़मीन और जो इन दोनों के बीच में है सबका मालिक है बड़ा मेहरबान लोगों को उससे बात का पूरा न होगा
يَوْمَ يَقُومُ الرُّوحُ وَالْمَلَائِكَةُ صَفًّا ۖ لَّا يَتَكَلَّمُونَ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ الرَّحْمَٰنُ وَقَالَ صَوَابًا ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
जिस दिन जिबरील और फरिश्ते (उसके सामने) पर बाँध कर खड़े होंगे (उस दिन) उससे कोई बात न कर सकेगा मगर जिसे ख़ुदा इजाज़त दे और वह ठिकाने की बात कहे
ذَٰلِكَ الْيَوْمُ الْحَقُّ ۖ فَمَن شَاءَ اتَّخَذَ إِلَىٰ رَبِّهِ مَآبًا ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
वह दिन बरहक़ है तो जो शख़्श चाहे अपने परवरदिगार की बारगाह में (अपना) ठिकाना बनाए
إِنَّا أَنذَرْنَاكُمْ عَذَابًا قَرِيبًا يَوْمَ يَنظُرُ الْمَرْءُ مَا قَدَّمَتْ يَدَاهُ وَيَقُولُ الْكَافِرُ يَا لَيْتَنِي كُنتُ تُرَابًا ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
हमने तुम लोगों को अनक़रीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया जिस दिन आदमी अपने हाथों पहले से भेजे हुए (आमाल) को देखेगा और काफ़िर कहेगा काश मैं ख़ाक हो जाता
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78النبأ An-Naba 📚 40 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अन-नबा — 40 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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