सूरा अद-दुखान अरबी और हिंदी

सूरा अद-दुखान को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (59 आयत — مكية). अद-दुखान सुनें, अद-दुखान अनुवाद, अद-दुखान mp3, अद-दुखान pdf.

सूरा अद-दुखान पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
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حم ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
हा मीम
وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
वाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम
إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
رَبِّ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا ۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक
لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحْيِي وَيُمِيتُ ۖ رَبُّكُمْ وَرَبُّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
अगर तुममें यक़ीन करने की सलाहियत है (तो करो) उसके सिवा कोई माबूद नहीं - वही जिलाता है वही मारता है तुम्हारा मालिक और तुम्हारे (अगले) बाप दादाओं का भी मालिक है
بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ يَلْعَبُونَ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
लेकिन ये लोग तो शक़ में पड़े खेल रहे हैं
فَارْتَقِبْ يَوْمَ تَأْتِي السَّمَاءُ بِدُخَانٍ مُّبِينٍ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
तो तुम उस दिन का इन्तेज़ार करो कि आसमान से ज़ाहिर ब ज़ाहिर धुऑं निकलेगा
يَغْشَى النَّاسَ ۖ هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
(और) लोगों को ढाँक लेगा ये दर्दनाक अज़ाब है
رَّبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
कुफ्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं
أَنَّىٰ لَهُمُ الذِّكْرَىٰ وَقَدْ جَاءَهُمْ رَسُولٌ مُّبِينٌ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
(उस वक्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे
ثُمَّ تَوَلَّوْا عَنْهُ وَقَالُوا مُعَلَّمٌ مَّجْنُونٌ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
इस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
إِنَّا كَاشِفُو الْعَذَابِ قَلِيلًا ۚ إِنَّكُمْ عَائِدُونَ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
يَوْمَ نَبْطِشُ الْبَطْشَةَ الْكُبْرَىٰ إِنَّا مُنتَقِمُونَ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
हम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
۞ وَلَقَدْ فَتَنَّا قَبْلَهُمْ قَوْمَ فِرْعَوْنَ وَجَاءَهُمْ رَسُولٌ كَرِيمٌ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
और उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए
أَنْ أَدُّوا إِلَيَّ عِبَادَ اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
(और कहा) कि ख़ुदा के बन्दों (बनी इसराईल) को मेरे हवाले कर दो मैं (ख़ुदा की तरफ से) तुम्हारा एक अमानतदार पैग़म्बर हूँ
وَأَن لَّا تَعْلُوا عَلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي آتِيكُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
और ख़ुदा के सामने सरकशी न करो मैं तुम्हारे पास वाज़ेए व रौशन दलीलें ले कर आया हूँ
وَإِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمْ أَن تَرْجُمُونِ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
और इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं अपने और तुम्हारे परवरदिगार (ख़ुदा) की पनाह मांगता हूँ
وَإِن لَّمْ تُؤْمِنُوا لِي فَاعْتَزِلُونِ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
और अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम मुझसे अलग हो जाओ
فَدَعَا رَبَّهُ أَنَّ هَٰؤُلَاءِ قَوْمٌ مُّجْرِمُونَ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
فَأَسْرِ بِعِبَادِي لَيْلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
तो ख़ुदा ने हुक्म दिया कि तुम मेरे बन्दों (बनी इसराईल) को रातों रात लेकर चले जाओ और तुम्हारा पीछा भी ज़रूर किया जाएगा
وَاتْرُكِ الْبَحْرَ رَهْوًا ۖ إِنَّهُمْ جُندٌ مُّغْرَقُونَ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
और दरिया को अपनी हालत पर ठहरा हुआ छोड़ कर (पार हो) जाओ (तुम्हारे बाद) उनका सारा लशकर डुबो दिया जाएगा
كَمْ تَرَكُوا مِن جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
वह लोग (ख़ुदा जाने) कितने बाग़ और चश्में और खेतियाँ
وَزُرُوعٍ وَمَقَامٍ كَرِيمٍ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
और नफीस मकानात और आराम की चीज़ें
وَنَعْمَةٍ كَانُوا فِيهَا فَاكِهِينَ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
जिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ
كَذَٰلِكَ ۖ وَأَوْرَثْنَاهَا قَوْمًا آخَرِينَ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
और उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
فَمَا بَكَتْ عَلَيْهِمُ السَّمَاءُ وَالْأَرْضُ وَمَا كَانُوا مُنظَرِينَ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
तो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
وَلَقَدْ نَجَّيْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مِنَ الْعَذَابِ الْمُهِينِ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
और हमने बनी इसराईल को ज़िल्लत के अज़ाब से फिरऔन (के पन्जे) से नजात दी
مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِّنَ الْمُسْرِفِينَ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
वह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था
وَلَقَدِ اخْتَرْنَاهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى الْعَالَمِينَ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
और हमने बनी इसराईल को समझ बूझ कर सारे जहॉन से बरगुज़ीदा किया था
وَآتَيْنَاهُم مِّنَ الْآيَاتِ مَا فِيهِ بَلَاءٌ مُّبِينٌ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
और हमने उनको ऐसी निशानियाँ दी थीं जिनमें (उनकी) सरीही आज़माइश थी
إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَيَقُولُونَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
ये (कुफ्फ़ारे मक्का) (मुसलमानों से) कहते हैं
إِنْ هِيَ إِلَّا مَوْتَتُنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
कि हमें तो सिर्फ एक बार मरना है और फिर हम दोबारा (ज़िन्दा करके) उठाए न जाएँगे
فَأْتُوا بِآبَائِنَا إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
तो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (ज़िन्दा करके) ले आओ
أَهُمْ خَيْرٌ أَمْ قَوْمُ تُبَّعٍ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ أَهْلَكْنَاهُمْ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
भला ये लोग (क़ूवत में) अच्छे हैं या तुब्बा की क़ौम और वह लोग जो उनसे पहले हो चुके हमने उन सबको हलाक कर दिया (क्योंकि) वह ज़रूर गुनाहगार थे
وَمَا خَلَقْنَا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا لَاعِبِينَ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
और हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया
مَا خَلَقْنَاهُمَا إِلَّا بِالْحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
इन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया मगर उनमें के बहुतेरे लोग नहीं जानते
إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ مِيقَاتُهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
बेशक फ़ैसला (क़यामत) का दिन उन सब (के दोबार ज़िन्दा होने) का मुक़र्रर वक्त है
يَوْمَ لَا يُغْنِي مَوْلًى عَن مَّوْلًى شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
जिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न उन की मदद की जाएगी
إِلَّا مَن رَّحِمَ اللَّهُ ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
मगर जिन पर ख़ुदा रहम फरमाए बेशक वह (ख़ुदा) सब पर ग़ालिब बड़ा रहम करने वाला है
إِنَّ شَجَرَتَ الزَّقُّومِ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
(आख़ेरत में) थोहड़ का दरख्त
طَعَامُ الْأَثِيمِ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
ज़रूर गुनेहगार का खाना होगा
كَالْمُهْلِ يَغْلِي فِي الْبُطُونِ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
जैसे पिघला हुआ तांबा वह पेटों में इस तरह उबाल खाएगा
كَغَلْيِ الْحَمِيمِ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
जैसे खौलता हुआ पानी उबाल खाता है
خُذُوهُ فَاعْتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَاءِ الْجَحِيمِ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
(फरिश्तों को हुक्म होगा) इसको पकड़ो और घसीटते हुए दोज़ख़ के बीचों बीच में ले जाओ
ثُمَّ صُبُّوا فَوْقَ رَأْسِهِ مِنْ عَذَابِ الْحَمِيمِ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
फिर उसके सर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब डालो फिर उससे ताआनन कहा जाएगा अब मज़ा चखो
ذُقْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْكَرِيمُ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
बेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِ تَمْتَرُونَ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
ये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينٍ ۝٥١
📖 अनुवाद आयत 51
बेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ ۝٥٢
📖 अनुवाद आयत 52
(यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगे
يَلْبَسُونَ مِن سُندُسٍ وَإِسْتَبْرَقٍ مُّتَقَابِلِينَ ۝٥٣
📖 अनुवाद आयत 53
रेशम की कभी बारीक़ और कभी दबीज़ पोशाकें पहने हुए एक दूसरे के आमने सामने बैठे होंगे
كَذَٰلِكَ وَزَوَّجْنَاهُم بِحُورٍ عِينٍ ۝٥٤
📖 अनुवाद आयत 54
ऐसा ही होगा और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरों से उनके जोड़े लगा देंगे
يَدْعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَاكِهَةٍ آمِنِينَ ۝٥٥
📖 अनुवाद आयत 55
वहाँ इत्मेनान से हर किस्म के मेवे मंगवा कर खायेंगे
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا الْمَوْتَ إِلَّا الْمَوْتَةَ الْأُولَىٰ ۖ وَوَقَاهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ ۝٥٦
📖 अनुवाद आयत 56
वहाँ पहली दफ़ा की मौत के सिवा उनको मौत की तलख़ी चख़नी ही न पड़ेगी और ख़ुदा उनको दोज़ख़ के अज़ाब से महफूज़ रखेगा
فَضْلًا مِّن رَّبِّكَ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝٥٧
📖 अनुवाद आयत 57
(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है
فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ ۝٥٨
📖 अनुवाद आयत 58
तो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो
فَارْتَقِبْ إِنَّهُم مُّرْتَقِبُونَ ۝٥٩
📖 अनुवाद आयत 59
(नतीजे के) तुम भी मुन्तज़िर रहो ये लोग भी मुन्तज़िर हैं
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44الدخان Ad-Dukhan 📚 59 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अद-दुखान — 59 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए