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📖 लंबी सूरह — छोटे भागों में बांटी गई (83 आयत)
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يسٓ ١
Yaa-Seeen
यासीन
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وَٱلۡقُرۡءَانِ ٱلۡحَكِيمِ ٢
Wal-Qur-aanil-Hakeem
इस पुरअज़ हिकमत कुरान की क़सम
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إِنَّكَ لَمِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ ٣
Innaka laminal mursaleen
(ऐ रसूल) तुम बिलाशक यक़ीनी पैग़म्बरों में से हो
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عَلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسۡتَقِيمٍ ٤
Alaa Siraatim Mustaqeem
(और दीन के बिल्कुल) सीधे रास्ते पर (साबित क़दम) हो
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تَنزِيلَ ٱلۡعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ ٥
Tanzeelal `Azeezir Raheem
जो बड़े मेहरबान (और) ग़ालिब (खुदा) का नाज़िल किया हुआ (है)
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لِتُنذِرَ قَوۡمًا مَّآ أُنذِرَ ءَابَآؤُهُمۡ فَهُمۡ غَٰفِلُونَ ٦
Litunzira qawmam maaa unzira aabaaa`uhum fahum ghaafiloon
ताकि तुम उन लोगों को (अज़ाबे खुदा से) डराओ जिनके बाप दादा (तुमसे पहले किसी पैग़म्बर से) डराए नहीं गए
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لَقَدۡ حَقَّ ٱلۡقَوۡلُ عَلَىٰٓ أَكۡثَرِهِمۡ فَهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ٧
Laqad haqqal qawlu `alaaa aksarihim fahum laa yu`minoon
तो वह दीन से बिल्कुल बेख़बर हैं उन में अक्सर तो (अज़ाब की) बातें यक़ीनन बिल्कुल ठीक पूरी उतरे ये लोग तो ईमान लाएँगे नहीं
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36:8
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إِنَّا جَعَلۡنَا فِيٓ أَعۡنَٰقِهِمۡ أَغۡلَٰلًا فَهِيَ إِلَى ٱلۡأَذۡقَانِ فَهُم مُّقۡمَحُونَ ٨
Innaa ja`alnaa feee a`naaqihim aghlaalan fahiya ilal azqaani fahum muqmahoon
हमने उनकी गर्दनों में (भारी-भारी लोहे के) तौक़ डाल दिए हैं और ठुड्डियों तक पहुँचे हुए हैं कि वह गर्दनें उठाए हुए हैं (सर झुका नहीं सकते)
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36:9
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وَجَعَلۡنَا مِنۢ بَيۡنِ أَيۡدِيهِمۡ سَدًّا وَمِنۡ خَلۡفِهِمۡ سَدًّا فَأَغۡشَيۡنَٰهُمۡ فَهُمۡ لَا يُبۡصِرُونَ ٩
Wa ja`alnaa mim baini aydeehim saddanw-wa min khalfihim saddan fa aghshai naahum fahum laa yubsiroon
हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे फिर ऊपर से उनको ढाँक दिया है तो वह कुछ देख नहीं सकते
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36:10
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وَسَوَآءٌ عَلَيۡهِمۡ ءَأَنذَرۡتَهُمۡ أَمۡ لَمۡ تُنذِرۡهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ ١٠
Wa sawaaa`un `alaihim `a-anzartahum am lam tunzirhum laa yu`minoon
और (ऐ रसूल) उनके लिए बराबर है ख्वाह तुम उन्हें डराओ या न डराओ ये (कभी) ईमान लाने वाले नहीं हैं
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36:11
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إِنَّمَا تُنذِرُ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلذِّكۡرَ وَخَشِيَ ٱلرَّحۡمَٰنَ بِٱلۡغَيۡبِۖ فَبَشِّرۡهُ بِمَغۡفِرَةٍ وَأَجۡرٍ كَرِيمٍ ١١
Innamaa tunziru manit taba `az-Zikra wa khashiyar Rahmaana bilghaib, fabashshirhu bimaghfiratinw-wa ajrin kareem
तुम तो बस उसी शख्स को डरा सकते हो जो नसीहत माने और बेदेखे भाले खुदा का ख़ौफ़ रखे तो तुम उसको (गुनाहों की) माफी और एक बाइज्ज़त (व आबरू) अज्र की खुशख़बरी दे दो
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36:12
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إِنَّا نَحۡنُ نُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰ وَنَكۡتُبُ مَا قَدَّمُواْ وَءَاثَٰرَهُمۡۚ وَكُلَّ شَيۡءٍ أَحۡصَيۡنَٰهُ فِيٓ إِمَامٍ مُّبِينٍ ١٢
Innaa Nahnu nuhyil mawtaa wa naktubu maa qaddamoo wa aasaarahum; wa kulla shai`in ahsainaahu feee Imaamim Mubeen
हम ही यक़ीनन मुर्दों को ज़िन्दा करते हैं और जो कुछ लोग पहले कर चुके हैं (उनको) और उनकी (अच्छी या बुरी बाक़ी माँदा) निशानियों को लिखते जाते हैं और हमने हर चीज़ का एक सरीह व रौशन पेशवा में घेर दिया है
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36:13
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وَٱضۡرِبۡ لَهُم مَّثَلًا أَصۡحَٰبَ ٱلۡقَرۡيَةِ إِذۡ جَآءَهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ ١٣
Wadrib lahum masalan Ashaabal Qaryatih; iz jaaa`ahal mursaloon
और (ऐ रसूल) तुम (इनसे) मिसाल के तौर पर एक गाँव (अता किया) वालों का क़िस्सा बयान करो जब वहाँ (हमारे) पैग़म्बर आए
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إِذۡ أَرۡسَلۡنَآ إِلَيۡهِمُ ٱثۡنَيۡنِ فَكَذَّبُوهُمَا فَعَزَّزۡنَا بِثَالِثٍ فَقَالُوٓاْ إِنَّآ إِلَيۡكُم مُّرۡسَلُونَ ١٤
Iz arsalnaaa ilaihimusnaini fakazzaboohumaa fa`azzaznaa bisaalisin faqaalooo innaaa ilaikum mursaloon
इस तरह कि जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर योहना और यूनुस) भेजे तो उन लोगों ने दोनों को झुठलाया जब हमने एक तीसरे (पैग़म्बर शमऊन) से (उन दोनों को) मद्द दी तो इन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारे पास खुदा के भेजे हुए (आए) हैं
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36:15
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قَالُواْ مَآ أَنتُمۡ إِلَّا بَشَرٌ مِّثۡلُنَا وَمَآ أَنزَلَ ٱلرَّحۡمَٰنُ مِن شَيۡءٍ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا تَكۡذِبُونَ ١٥
Qaaloo maaa antum illaa basharum mislunaa wa maaa anzalar Rahmaanu min shai`in in antum illaa takziboon
वह लोग कहने लगे कि तुम लोग भी तो बस हमारे ही जैसे आदमी हो और खुदा ने कुछ नाज़िल (वाज़िल) नहीं किया है तुम सब के सब बस बिल्कुल झूठे हो
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قَالُواْ رَبُّنَا يَعۡلَمُ إِنَّآ إِلَيۡكُمۡ لَمُرۡسَلُونَ ١٦
Qaaloo Rabbunaa ya`lamu innaaa ilaikum lamursaloon
तब उन पैग़म्बरों ने कहा हमारा परवरदिगार जानता है कि हम यक़ीनन उसी के भेजे हुए (आए) हैं और (तुम मानो या न मानो)
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وَمَا عَلَيۡنَآ إِلَّا ٱلۡبَلَٰغُ ٱلۡمُبِينُ ١٧
Wa maa `alainaaa illal balaaghul mubeen
हम पर तो बस खुल्लम खुल्ला एहकामे खुदा का पहुँचा देना फर्ज़ है
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قَالُوٓاْ إِنَّا تَطَيَّرۡنَا بِكُمۡۖ لَئِن لَّمۡ تَنتَهُواْ لَنَرۡجُمَنَّكُمۡ وَلَيَمَسَّنَّكُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ ١٨
Qaaloo innaa tataiyarnaa bikum la`il-lam tantahoo lanar jumannakum wa la-yamassan nakum minnaa `azaabun aleem
वह बोले हमने तुम लोगों को बहुत नहस क़दम पाया कि (तुम्हारे आते ही क़हत में मुबतेला हुए) तो अगर तुम (अपनी बातों से) बाज़ न आओगे तो हम लोग तुम्हें ज़रूर संगसार कर देगें और तुमको यक़ीनी हमारा दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा
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36:19
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قَالُواْ طَٰٓئِرُكُم مَّعَكُمۡ أَئِن ذُكِّرۡتُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ مُّسۡرِفُونَ ١٩
Qaaloo taaa`irukum ma`akum; a`in zukkirtum; bal antum qawmum musrifoon
पैग़म्बरों ने कहा कि तुम्हारी बद शुगूनी (तुम्हारी करनी से) तुम्हारे साथ है क्या जब नसीहत की जाती है (तो तुम उसे बदफ़ाली कहते हो नहीं) बल्कि तुम खुद (अपनी) हद से बढ़ गए हो
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وَجَآءَ مِنۡ أَقۡصَا ٱلۡمَدِينَةِ رَجُلٌ يَسۡعَىٰ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱتَّبِعُواْ ٱلۡمُرۡسَلِينَ ٢٠
Wa jaaa`a min aqsal madeenati rajuluny yas`aa qaala yaa qawmit tabi`ul mursaleen
और (इतने में) शहर के उस सिरे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा कि ऐ मेरी क़ौम (इन) पैग़म्बरों का कहना मानो
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ٱتَّبِعُواْ مَن لَّا يَسۡـَٔلُكُمۡ أَجۡرًا وَهُم مُّهۡتَدُونَ ٢١
Ittabi`oo mal-laa yas`alukum ajranw-wa hum muhtadoon
ऐसे लोगों का (ज़रूर) कहना मानो जो तुमसे (तबलीख़े रिसालत की) कुछ मज़दूरी नहीं माँगते और वह लोग हिदायत याफ्ता भी हैं
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وَمَالِيَ لَآ أَعۡبُدُ ٱلَّذِي فَطَرَنِي وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ ٢٢
Wa maa liya laaa a`budul lazee fataranee wa ilaihi turja`oon
और मुझे क्या (ख़ब्त) हुआ है कि जिसने मुझे पैदा किया है उसकी इबादत न करूँ हालाँकि तुम सब के बस (आख़िर) उसी की तरफ लौटकर जाओगे
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36:23
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ءَأَتَّخِذُ مِن دُونِهِۦٓ ءَالِهَةً إِن يُرِدۡنِ ٱلرَّحۡمَٰنُ بِضُرٍّ لَّا تُغۡنِ عَنِّي شَفَٰعَتُهُمۡ شَيۡـًٔا وَلَا يُنقِذُونِ ٢٣
A-attakhizu min dooniheee aalihatan iny-yuridnir Rahmaanu bidurril-laa tughni `annee shafaa `atuhum shai `anw-wa laa yunqizoon
क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ अगर खुदा मुझे कोई तकलीफ पहुँचाना चाहे तो न उनकी सिफारिश ही मेरे कुछ काम आएगी और न ये लोग मुझे (इस मुसीबत से) छुड़ा ही सकेंगें
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36:24
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إِنِّيٓ إِذًا لَّفِي ضَلَٰلٍ مُّبِينٍ ٢٤
Inneee izal-lafee dalaa-lim-mubeen
(अगर ऐसा करूँ) तो उस वक्त मैं यक़ीनी सरीही गुमराही में हूँ
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36:25
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إِنِّيٓ ءَامَنتُ بِرَبِّكُمۡ فَٱسۡمَعُونِ ٢٥
Inneee aamantu bi Rabbikum fasma`oon
मैं तो तुम्हारे परवरदिगार पर ईमान ला चुका हूँ मेरी बात सुनो और मानो; मगर उन लोगों ने उसे संगसार कर डाला
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36:26
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قِيلَ ٱدۡخُلِ ٱلۡجَنَّةَۖ قَالَ يَٰلَيۡتَ قَوۡمِي يَعۡلَمُونَ ٢٦
Qeelad khulil Jannnah; qaala yaa laita qawmee ya`lamoon
तब उसे खुदा का हुक्म हुआ कि बेहिश्त में जा (उस वक्त भी उसको क़ौम का ख्याल आया तो कहा)
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بِمَا غَفَرَ لِي رَبِّي وَجَعَلَنِي مِنَ ٱلۡمُكۡرَمِينَ ٢٧
Bimaa ghafara lee Rabbee wa ja`alanee minal mukrameen
मेरे परवरदिगार ने जो मुझे बख्श दिया और मुझे बुर्ज़ुग लोगों में शामिल कर दिया काश इसको मेरी क़ौम के लोग जान लेते और ईमान लाते
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36:28
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۞ وَمَآ أَنزَلۡنَا عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنۢ بَعۡدِهِۦ مِن جُندٍ مِّنَ ٱلسَّمَآءِ وَمَا كُنَّا مُنزِلِينَ ٢٨
Wa maaa anzalnaa `alaa qawmihee mim ba`dihee min jundim minas-samaaa`i wa maa kunnaa munzileen
और हमने उसके मरने के बाद उसकी क़ौम पर उनकी तबाही के लिए न तो आसमान से कोई लशकर उतारा और न हम कभी इतनी सी बात के वास्ते लशकर उतारने वाले थे
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36:29
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إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةً وَٰحِدَةً فَإِذَا هُمۡ خَٰمِدُونَ ٢٩
In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum khaamidoon
वह तो सिर्फ एक चिंघाड थी (जो कर दी गयी बस) फिर तो वह फौरन चिराग़े सहरी की तरह बुझ के रह गए
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36:30
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يَٰحَسۡرَةً عَلَى ٱلۡعِبَادِۚ مَا يَأۡتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ ٣٠
Yaa hasratan `alal `ibaad; maa yaateehim mir Rasoolin illaa kaanoo bihee yastahzi `oon
हाए अफसोस बन्दों के हाल पर कि कभी उनके पास कोई रसूल नहीं आया मगर उन लोगों ने उसके साथ मसख़रापन ज़रूर किया
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36:31
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أَلَمۡ يَرَوۡاْ كَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّنَ ٱلۡقُرُونِ أَنَّهُمۡ إِلَيۡهِمۡ لَا يَرۡجِعُونَ ٣١
Alam yaraw kam ahlak naa qablahum minal qurooni annahum ilaihim laa yarji`oon
क्या उन लोगों ने इतना भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनसे पहले कितनी उम्मतों को हलाक कर डाला और वह लोग उनके पास हरगिज़ पलट कर नहीं आ सकते
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وَإِن كُلٌّ لَّمَّا جَمِيعٌ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ ٣٢
Wa in kullul lammaa jamee`ul-ladainaa muhdaroon
(हाँ) अलबत्ता सब के सब इकट्ठा हो कर हमारी बारगाह में हाज़िर किए जाएँगे
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36:33
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وَءَايَةٌ لَّهُمُ ٱلۡأَرۡضُ ٱلۡمَيۡتَةُ أَحۡيَيۡنَٰهَا وَأَخۡرَجۡنَا مِنۡهَا حَبًّا فَمِنۡهُ يَأۡكُلُونَ ٣٣
Wa Aayatul lahumul ardul maitatu ahyainaahaa wa akhrajnaa minhaa habban faminhu yaakuloon
और उनके (समझने) के लिए मेरी कुदरत की एक निशानी मुर्दा (परती) ज़मीन है कि हमने उसको (पानी से) ज़िन्दा कर दिया और हम ही ने उससे दाना निकाला तो उसे ये लोग खाया करते हैं
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36:34
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وَجَعَلۡنَا فِيهَا جَنَّٰتٍ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعۡنَٰبٍ وَفَجَّرۡنَا فِيهَا مِنَ ٱلۡعُيُونِ ٣٤
Wa ja`alnaa feehaa jannaatim min nakheelinw wa a`naabinw wa fajjarnaa feeha minal `uyoon
और हम ही ने ज़मीन में छुहारों और अंगूरों के बाग़ लगाए और हमही ने उसमें पानी के चशमें जारी किए
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لِيَأۡكُلُواْ مِن ثَمَرِهِۦ وَمَا عَمِلَتۡهُ أَيۡدِيهِمۡۚ أَفَلَا يَشۡكُرُونَ ٣٥
Liyaakuloo min samarihee wa maa `amilat-hu aideehim; afalaa yashkuroon
ताकि लोग उनके फल खाएँ और कुछ उनके हाथों ने उसे नहीं बनाया (बल्कि खुदा ने) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते
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36:36
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سُبۡحَٰنَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلۡأَزۡوَٰجَ كُلَّهَا مِمَّا تُنۢبِتُ ٱلۡأَرۡضُ وَمِنۡ أَنفُسِهِمۡ وَمِمَّا لَا يَعۡلَمُونَ ٣٦
Subhaanal lazee khalaqal azwaaja kullahaa mimmaa tumbitul ardu wa min anfusihim wa mimmaa laa ya`lamoon
वह (हर ऐब से) पाक साफ है जिसने ज़मीन से उगने वाली चीज़ों और खुद उन लोगों के और उन चीज़ों के जिनकी उन्हें ख़बर नहीं सबके जोड़े पैदा किए
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وَءَايَةٌ لَّهُمُ ٱلَّيۡلُ نَسۡلَخُ مِنۡهُ ٱلنَّهَارَ فَإِذَا هُم مُّظۡلِمُونَ ٣٧
Wa Aayatul lahumul lailu naslakhu minhun nahaara fa-izaa hum muzlimoon
और मेरी क़ुदरत की एक निशानी रात है जिससे हम दिन को खींच कर निकाल लेते (जाएल कर देते) हैं तो उस वक्त ये लोग अंधेरे में रह जाते हैं
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وَٱلشَّمۡسُ تَجۡرِي لِمُسۡتَقَرٍّ لَّهَاۚ ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ ٣٨
Wash-shamsu tajree limustaqarril lahaa; zaalika taqdeerul `Azeezil Aleem
और (एक निशानी) आफताब है जो अपने एक ठिकाने पर चल रहा है ये (सबसे) ग़ालिब वाक़िफ (खुदा) का (बाँद्दा हुआ) अन्दाज़ा है
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وَٱلۡقَمَرَ قَدَّرۡنَٰهُ مَنَازِلَ حَتَّىٰ عَادَ كَٱلۡعُرۡجُونِ ٱلۡقَدِيمِ ٣٩
Walqamara qaddarnaahu manaazila hattaa `aada kal`ur joonil qadeem
और हमने चाँद के लिए मंज़िलें मुक़र्रर कर दीं हैं यहाँ तक कि हिर फिर के (आख़िर माह में) खजूर की पुरानी टहनी का सा (पतला टेढ़ा) हो जाता है
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لَا ٱلشَّمۡسُ يَنۢبَغِي لَهَآ أَن تُدۡرِكَ ٱلۡقَمَرَ وَلَا ٱلَّيۡلُ سَابِقُ ٱلنَّهَارِۚ وَكُلٌّ فِي فَلَكٍ يَسۡبَحُونَ ٤٠
Lash shamsu yambaghee lahaaa an tudrikal qamara wa lal lailu saabiqun nahaar; wa kullun fee falaki yasbahoon
न तो आफताब ही से ये बन पड़ता है कि वह माहताब को जा ले और न रात ही दिन से आगे बढ़ सकती है (चाँद, सूरज, सितारे) हर एक अपने-अपने आसमान (मदार) में चक्कर लगा रहें हैं
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وَءَايَةٌ لَّهُمۡ أَنَّا حَمَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُمۡ فِي ٱلۡفُلۡكِ ٱلۡمَشۡحُونِ ٤١
Wa Aayatul lahum annaa hamalnaa zurriyatahum fil fulkil mashhoon
और उनके लिए (मेरी कुदरत) की एक निशानी ये है कि उनके बुर्ज़ुगों को (नूह की) भरी हुई कश्ती में सवार किया
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وَخَلَقۡنَا لَهُم مِّن مِّثۡلِهِۦ مَا يَرۡكَبُونَ ٤٢
Wa khalaqnaa lahum mim-mislihee maa yarkaboon
और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी वह चीज़े (कशतियाँ) जहाज़ पैदा कर दी
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وَإِن نَّشَأۡ نُغۡرِقۡهُمۡ فَلَا صَرِيخَ لَهُمۡ وَلَا هُمۡ يُنقَذُونَ ٤٣
Wa in nashaa nughriqhum falaa sareekha lahum wa laa hum yunqazoon
जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर हम चाहें तो उन सब लोगों को डुबा मारें फिर न कोई उन का फरियाद रस होगा और न वह लोग छुटकारा ही पा सकते हैं
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إِلَّا رَحۡمَةً مِّنَّا وَمَتَٰعًا إِلَىٰ حِينٍ ٤٤
Illaa rahmatam minnaa wa mataa`an ilaa heen
मगर हमारी मेहरबानी से और चूँकि एक (ख़ास) वक्त तक (उनको) चैन करने देना (मंज़ूर) है
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وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ٱتَّقُواْ مَا بَيۡنَ أَيۡدِيكُمۡ وَمَا خَلۡفَكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تُرۡحَمُونَ ٤٥
Wa izaa qeela lahumuttaqoo maa baina aideekum wa maa khalfakum la`allakum turhamoon
और जब उन कुफ्फ़ार से कहा जाता है कि इस (अज़ाब से) बचो (हर वक्त तुम्हारे साथ-साथ) तुम्हारे सामने और तुम्हारे पीछे (मौजूद) है ताकि तुम पर रहम किया जाए
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وَمَا تَأۡتِيهِم مِّنۡ ءَايَةٍ مِّنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِمۡ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ ٤٦
Wa maa taateehim min aayatim min ayataati Rabbihim illaa kaanoo `anhaa mu`rideen
(तो परवाह नहीं करते) और उनकी हालत ये है कि जब उनके परवरदिगार की निशानियों में से कोई निशानी उनके पास आयी तो ये लोग मुँह मोड़े बग़ैर कभी नहीं रहे
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وَإِذَا قِيلَ لَهُمۡ أَنفِقُواْ مِمَّا رَزَقَكُمُ ٱللَّهُ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنُطۡعِمُ مَن لَّوۡ يَشَآءُ ٱللَّهُ أَطۡعَمَهُۥٓ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا فِي ضَلَٰلٍ مُّبِينٍ ٤٧
Wa izaa qeela lahum anfiqoo mimmaa razaqakumul laahu qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanooo anut`imu mal-law yashaaa`ul laahu at`amahooo in antum illaa fee dalaalim mubeen
और जब उन (कुफ्फ़ार) से कहा जाता है कि (माले दुनिया से) जो खुदा ने तुम्हें दिया है उसमें से कुछ (खुदा की राह में भी) ख़र्च करो तो (ये) कुफ्फ़ार ईमानवालों से कहते हैं कि भला हम उस शख्स को खिलाएँ जिसे (तुम्हारे ख्याल के मुवाफ़िक़) खुदा चाहता तो उसको खुद खिलाता कि तुम लोग बस सरीही गुमराही में (पड़े हुए) हो
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36:48
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وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا ٱلۡوَعۡدُ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ ٤٨
Wa yaqooloona mataa haazal wa`du in kuntum saadiqeen
और कहते हैं कि (भला) अगर तुम लोग (अपने दावे में सच्चे हो) तो आख़िर ये (क़यामत का) वायदा कब पूरा होगा
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36:49
🔁 0/5
مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيۡحَةً وَٰحِدَةً تَأۡخُذُهُمۡ وَهُمۡ يَخِصِّمُونَ ٤٩
Maa yanzuroona illaa saihatanw waahidatan taa khuzuhum wa hum yakhissimoon
(ऐ रसूल) ये लोग एक सख्त चिंघाड़ (सूर) के मुनतज़िर हैं जो उन्हें (उस वक्त) ले डालेगी
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36:50
🔁 0/5
فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ تَوۡصِيَةً وَلَآ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِمۡ يَرۡجِعُونَ ٥٠
Falaa yastatee`oona taw siyatanw-wa laaa ilaaa ahlihim yarji`oon
जब ये लोग बाहम झगड़ रहे होगें फिर न तो ये लोग वसीयत ही करने पायेंगे और न अपने लड़के बालों ही की तरफ लौट कर जा सकेगें
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36:51
🔁 0/5
وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَإِذَا هُم مِّنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ يَنسِلُونَ ٥١
Wa nufikha fis-soori faizaa hum minal ajdaasi ilaa Rabbihim yansiloon
और फिर (जब दोबारा) सूर फूँका जाएगा तो उसी दम ये सब लोग (अपनी-अपनी) क़ब्रों से (निकल-निकल के) अपने परवरदिगार की बारगाह की तरफ चल खड़े होगे
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36:52
🔁 0/5
قَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا مَنۢ بَعَثَنَا مِن مَّرۡقَدِنَاۜۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ ٱلرَّحۡمَٰنُ وَصَدَقَ ٱلۡمُرۡسَلُونَ ٥٢
Qaaloo yaa wailanaa mam ba`asanaa mim marqadinaa; haaza maa wa`adar Rahmanu wa sadaqal mursaloon
और (हैरान होकर) कहेगें हाए अफसोस हम तो पहले सो रहे थे हमें ख्वाबगाह से किसने उठाया (जवाब आएगा) कि ये वही (क़यामत का) दिन है जिसका खुदा ने (भी) वायदा किया था
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36:53
🔁 0/5
إِن كَانَتۡ إِلَّا صَيۡحَةً وَٰحِدَةً فَإِذَا هُمۡ جَمِيعٌ لَّدَيۡنَا مُحۡضَرُونَ ٥٣
In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum jamee`ul ladainaa muhdaroon
और पैग़म्बरों ने भी सच कहा था (क़यामत तो) बस एक सख्त चिंघाड़ होगी फिर एका एकी ये लोग सब के सब हमारे हुजूर में हाज़िर किए जाएँगे
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36:54
🔁 0/5
فَٱلۡيَوۡمَ لَا تُظۡلَمُ نَفۡسٌ شَيۡـًٔا وَلَا تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ ٥٤
Fal-Yawma laa tuzlamu nafsun shai`anw-wa laa tujzawna illaa maa kuntum ta`maloon
फिर आज (क़यामत के दिन) किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न होगा और तुम लोगों को तो उसी का बदला दिया जाएगा जो तुम लोग (दुनिया में) किया करते थे
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36:55
🔁 0/5
إِنَّ أَصۡحَٰبَ ٱلۡجَنَّةِ ٱلۡيَوۡمَ فِي شُغُلٍ فَٰكِهُونَ ٥٥
Inna Ashaabal jannatil Yawma fee shughulin faakihoon
बेहश्त के रहने वाले आज (रोजे क़यामत) एक न एक मशग़ले में जी बहला रहे हैं
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36:56
🔁 0/5
هُمۡ وَأَزۡوَٰجُهُمۡ فِي ظِلَٰلٍ عَلَى ٱلۡأَرَآئِكِ مُتَّكِـُٔونَ ٥٦
Hum wa azwaajuhum fee zilaalin `alal araaa`iki muttaki`oon
वह अपनी बीवियों के साथ (ठन्डी) छाँव में तकिया लगाए तख्तों पर (चैन से) बैठे हुए हैं
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36:57
🔁 0/5
لَهُمۡ فِيهَا فَٰكِهَةٌ وَلَهُم مَّا يَدَّعُونَ ٥٧
Lahum feehaa faakiha tunw-wa lahum maa yadda`oon
बेिहश्त में उनके लिए (ताज़ा) मेवे (तैयार) हैं और जो वह चाहें उनके लिए (हाज़िर) है
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36:58
🔁 0/5
سَلَٰمٌ قَوۡلًا مِّن رَّبٍّ رَّحِيمٍ ٥٨
Salaamun qawlam mir Rabbir Raheem
मेहरबान परवरदिगार की तरफ से सलाम का पैग़ाम आएगा
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36:59
🔁 0/5
وَٱمۡتَٰزُواْ ٱلۡيَوۡمَ أَيُّهَا ٱلۡمُجۡرِمُونَ ٥٩
Wamtaazul Yawma ayyuhal mujrimoon
और (एक आवाज़ आएगी कि) ऐ गुनाहगारों तुम लोग (इनसे) अलग हो जाओ
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36:60
🔁 0/5
۞ أَلَمۡ أَعۡهَدۡ إِلَيۡكُمۡ يَٰبَنِيٓ ءَادَمَ أَن لَّا تَعۡبُدُواْ ٱلشَّيۡطَٰنَۖ إِنَّهُۥ لَكُمۡ عَدُوٌّ مُّبِينٌ ٦٠
Alam a`had ilaikum yaa Baneee Aadama al-laa ta`budush Shaitaana innahoo lakum `aduwwum mubeen
ऐ आदम की औलाद क्या मैंने तुम्हारे पास ये हुक्म नहीं भेजा था कि (ख़बरदार) शैतान की परसतिश न करना वह यक़ीनी तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
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36:61
🔁 0/5
وَأَنِ ٱعۡبُدُونِيۚ هَٰذَا صِرَٰطٌ مُّسۡتَقِيمٌ ٦١
Wa ani`budoonee; haazaa Siraatum Mustaqeem
और ये कि (देखो) सिर्फ मेरी इबादत करना यही (नजात की) सीधी राह है
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36:62
🔁 0/5
وَلَقَدۡ أَضَلَّ مِنكُمۡ جِبِلًّا كَثِيرًاۖ أَفَلَمۡ تَكُونُواْ تَعۡقِلُونَ ٦٢
Wa laqad adalla minkum jibillan kaseeraa; afalam takoonoo ta`qiloon
और (बावजूद इसके) उसने तुममें से बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते थे
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36:63
🔁 0/5
هَٰذِهِۦ جَهَنَّمُ ٱلَّتِي كُنتُمۡ تُوعَدُونَ ٦٣
Haazihee Jahannamul latee kuntum too`adoon
ये वही जहन्नुम है जिसका तुमसे वायदा किया गया था
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36:64
🔁 0/5
ٱصۡلَوۡهَا ٱلۡيَوۡمَ بِمَا كُنتُمۡ تَكۡفُرُونَ ٦٤
Islawhal Yawma bimaa kuntum takfuroon
तो अब चूँकि तुम कुफ्र करते थे इस वजह से आज इसमें (चुपके से) चले जाओ
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36:65
🔁 0/5
ٱلۡيَوۡمَ نَخۡتِمُ عَلَىٰٓ أَفۡوَٰهِهِمۡ وَتُكَلِّمُنَآ أَيۡدِيهِمۡ وَتَشۡهَدُ أَرۡجُلُهُم بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ ٦٥
Al-Yawma nakhtimu `alaaa afwaahihim wa tukallimunaaa aideehim wa tashhadu arjuluhum bimaa kaanoo yaksiboon
आज हम उनके मुँह पर मुहर लगा देगें और (जो) कारसतानियाँ ये लोग दुनिया में कर रहे थे खुद उनके हाथ हमको बता देगें और उनके पाँव गवाही देगें
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36:66
🔁 0/5
وَلَوۡ نَشَآءُ لَطَمَسۡنَا عَلَىٰٓ أَعۡيُنِهِمۡ فَٱسۡتَبَقُواْ ٱلصِّرَٰطَ فَأَنَّىٰ يُبۡصِرُونَ ٦٦
Wa law nashaaa`u lata masna `alaaa aiyunihim fasta baqus-siraata fa-annaa yubsiroon
और अगर हम चाहें तो उनकी ऑंखों पर झाडू फेर दें तो ये लोग राह को पड़े चक्कर लगाते ढूँढते फिरें मगर कहाँ देख पाँएगे
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36:67
🔁 0/5
وَلَوۡ نَشَآءُ لَمَسَخۡنَٰهُمۡ عَلَىٰ مَكَانَتِهِمۡ فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مُضِيًّا وَلَا يَرۡجِعُونَ ٦٧
Wa law nashaaa`u lamasakhnaahum `alaa makaanatihim famas-tataa`oo mudiyyanw-wa laa yarji`oon
और अगर हम चाहे तो जहाँ ये हैं (वहीं) उनकी सूरतें बदल (करके) (पत्थर मिट्टी बना) दें फिर न तो उनमें आगे जाने का क़ाबू रहे और न (घर) लौट सकें
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36:68
🔁 0/5
وَمَن نُّعَمِّرۡهُ نُنَكِّسۡهُ فِي ٱلۡخَلۡقِۚ أَفَلَا يَعۡقِلُونَ ٦٨
Wa man nu `ammirhu nunakkishu fil-khalq; afalaa ya`qiloon
और हम जिस शख्स को (बहुत) ज्यादा उम्र देते हैं तो उसे ख़िलक़त में उलट (कर बच्चों की तरह मजबूर कर) देते हैं तो क्या वह लोग समझते नहीं
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36:69
🔁 0/5
وَمَا عَلَّمۡنَٰهُ ٱلشِّعۡرَ وَمَا يَنۢبَغِي لَهُۥٓۚ إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرٌ وَقُرۡءَانٌ مُّبِينٌ ٦٩
Wa maa `allamnaahush shi`ra wa maa yambaghee lah; in huwa illaa zikrunw-wa Qur-aanum mubeen
और हमने न उस (पैग़म्बर) को शेर की तालीम दी है और न शायरी उसकी शान के लायक़ है ये (किताब) तो बस (निरी) नसीहत और साफ-साफ कुरान है
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36:70
🔁 0/5
لِّيُنذِرَ مَن كَانَ حَيًّا وَيَحِقَّ ٱلۡقَوۡلُ عَلَى ٱلۡكَٰفِرِينَ ٧٠
Liyunzira man kaana haiyanw-wa yahiqqal qawlu `alal-kaafireen
ताकि जो ज़िन्दा (दिल आक़िल) हों उसे (अज़ाब से) डराए और काफ़िरों पर (अज़ाब का) क़ौल साबित हो जाए (और हुज्जत बाक़ी न रहे)
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36:71
🔁 0/5
أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّا خَلَقۡنَا لَهُم مِّمَّا عَمِلَتۡ أَيۡدِينَآ أَنۡعَٰمًا فَهُمۡ لَهَا مَٰلِكُونَ ٧١
Awalam yaraw annaa khalaqnaa lahum mimmaa `amilat aideenaaa an`aaman fahum lahaa maalikoon
क्या उन लोगों ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हमने उनके फायदे के लिए चारपाए उस चीज़ से पैदा किए जिसे हमारी ही क़ुदरत ने बनाया तो ये लोग (ख्वाहमाख्वाह) उनके मालिक बन गए
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36:72
🔁 0/5
وَذَلَّلۡنَٰهَا لَهُمۡ فَمِنۡهَا رَكُوبُهُمۡ وَمِنۡهَا يَأۡكُلُونَ ٧٢
Wa zallalnaahaa lahum faminhaa rakoobuhum wa minhaa yaakuloon
और हम ही ने चार पायों को उनका मुतीय बना दिया तो बाज़ उनकी सवारियां हैं और बाज़ को खाते हैं
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36:73
🔁 0/5
وَلَهُمۡ فِيهَا مَنَٰفِعُ وَمَشَارِبُۚ أَفَلَا يَشۡكُرُونَ ٧٣
Wa lahum feehaa manaa fi`u wa mashaarib; afalaa yashkuroon
और चार पायों में उनके (और) बहुत से फायदे हैं और पीने की चीज़ (दूध) तो क्या ये लोग (इस पर भी) शुक्र नहीं करते
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36:74
🔁 0/5
وَٱتَّخَذُواْ مِن دُونِ ٱللَّهِ ءَالِهَةً لَّعَلَّهُمۡ يُنصَرُونَ ٧٤
Wattakhazoo min doonil laahi aalihatal la`allahum yunsaroon
और लोगों ने ख़ुदा को छोड़कर (फर्ज़ी माबूद बनाए हैं ताकि उन्हें उनसे कुछ मद्द मिले हालाँकि वह लोग उनकी किसी तरह मद्द कर ही नहीं सकते
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36:75
🔁 0/5
لَا يَسۡتَطِيعُونَ نَصۡرَهُمۡ وَهُمۡ لَهُمۡ جُندٌ مُّحۡضَرُونَ ٧٥
Laa yastatee`oona nasrahum wa hum lahum jundum muhdaroon
और ये कुफ्फ़ार उन माबूदों के लशकर हैं (और क़यामत में) उन सबकी हाज़िरी ली जाएगी
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36:76
🔁 0/5
فَلَا يَحۡزُنكَ قَوۡلُهُمۡۘ إِنَّا نَعۡلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعۡلِنُونَ ٧٦
Falaa yahzunka qawluhum; innaa na`lamu maa yusirroona wa maa yu`linoon
तो (ऐ रसूल) तुम इनकी बातों से आज़ुरदा ख़ातिर (पेरशान) न हो जो कुछ ये लोग छिपा कर करते हैं और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हैं-हम सबको यक़ीनी जानते हैं
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36:77
🔁 0/5
أَوَلَمۡ يَرَ ٱلۡإِنسَٰنُ أَنَّا خَلَقۡنَٰهُ مِن نُّطۡفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ ٧٧
Awalam yaral insaanu annaa khalaqnaahu min nutfatin fa-izaa huwa khaseemum mubeen
क्या आदमी ने इस पर भी ग़ौर नहीं किया कि हम ही ने इसको एक ज़लील नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हमारा ही) खुल्लम खुल्ला मुक़ाबिल (बना) है
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36:78
🔁 0/5
وَضَرَبَ لَنَا مَثَلًا وَنَسِيَ خَلۡقَهُۥۖ قَالَ مَن يُحۡيِ ٱلۡعِظَٰمَ وَهِيَ رَمِيمٌ ٧٨
Wa daraba lanaa maslanw-wa nasiya khalqahoo qaala mai-yuhyil`izaama wa hiya rameem
और हमारी निसबत बातें बनाने लगा और अपनी ख़िलक़त (की हालत) भूल गया और कहने लगा कि भला जब ये हड्डियां (सड़गल कर) ख़ाक हो जाएँगी तो (फिर) कौन (दोबारा) ज़िन्दा कर सकता है
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36:79
🔁 0/5
قُلۡ يُحۡيِيهَا ٱلَّذِيٓ أَنشَأَهَآ أَوَّلَ مَرَّةٍۖ وَهُوَ بِكُلِّ خَلۡقٍ عَلِيمٌ ٧٩
Qul yuh yeehal lazeee ansha ahaaa awwala marrah; wa Huwa bikulli khalqin `Aleem
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि उसको वही ज़िन्दा करेगा जिसने उनको (जब ये कुछ न थे) पहली बार ज़िन्दा कर (रखा)
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36:80
🔁 0/5
ٱلَّذِي جَعَلَ لَكُم مِّنَ ٱلشَّجَرِ ٱلۡأَخۡضَرِ نَارًا فَإِذَآ أَنتُم مِّنۡهُ تُوقِدُونَ ٨٠
Allazee ja`ala lakum minash shajaril akhdari naaran fa-izaaa antum minhu tooqidoon
और वह हर तरह की पैदाइश से वाक़िफ है जिसने तुम्हारे वास्ते (मिर्ख़ और अफ़ार के) हरे दरख्त से आग पैदा कर दी फिर तुम उससे (और) आग सुलगा लेते हो
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36:81
🔁 0/5
أَوَلَيۡسَ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يَخۡلُقَ مِثۡلَهُمۚ بَلَىٰ وَهُوَ ٱلۡخَلَّٰقُ ٱلۡعَلِيمُ ٨١
Awa laisal lazee khalaqas samaawaati wal arda biqaadirin `alaaa ai-yakhluqa mislahum; balaa wa Huwal Khallaaqul `Aleem
(भला) जिस (खुदा) ने सारे आसमान और ज़मीन पैदा किए क्या वह इस पर क़ाबू नहीं रखता कि उनके मिस्ल (दोबारा) पैदा कर दे हाँ (ज़रूर क़ाबू रखता है) और वह तो पैदा करने वाला वाक़िफ़कार है
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36:82
🔁 0/5
إِنَّمَآ أَمۡرُهُۥٓ إِذَآ أَرَادَ شَيۡـًٔا أَن يَقُولَ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ ٨٢
Innamaa amruhooo izaaa araada shai`an ai-yaqoola lahoo kun fa-yakoon
उसकी शान तो ये है कि जब किसी चीज़ को (पैदा करना) चाहता है तो वह कह देता है कि ''हो जा'' तो (फौरन) हो जाती है
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36:83
🔁 0/5
فَسُبۡحَٰنَ ٱلَّذِي بِيَدِهِۦ مَلَكُوتُ كُلِّ شَيۡءٍ وَإِلَيۡهِ تُرۡجَعُونَ ٨٣
Fa Subhaanal lazee biyadihee malakootu kulli shai-inw-wa ilaihi turja`oon
तो वह ख़ुद (हर नफ्स से) पाक साफ़ है जिसके क़ब्ज़े कुदरत में हर चीज़ की हिकमत है और तुम लोग उसी की तरफ लौट कर जाओगे
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पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए







