Surah Al-Haqqah Ayat 33 Tafseer in Hindi
﴿إِنَّهُ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ﴾
[ الحاقة: 33]
(क्यों कि) ये न तो बुज़ुर्ग ख़ुदा ही पर ईमान लाता था और न मोहताज के खिलाने पर आमादा (लोगों को) करता था
Surah Al-Haqqah Hindi
Surah Al-Haqqah Verse 33 translate in arabic
Surah Al-Haqqah Ayat 33 meaning in Hindi
"वह न तो महिमावान अल्लाह पर ईमान रखता था
Quran Urdu translation
یہ نہ تو خدائے جل شانہ پر ایمان لاتا تھا
Tafseer Tafheem-ul-Quran by Syed Abu-al-A'la Maududi
(69:33) He would not believe in Allah, the Most Great;
Indeed, he did not used to believe in Allah, the Most Great, meaning
Ayats from Quran in Hindi
- और (साफ-साफ) उनवाने शाइस्ता से बात किया करो और अपने घरों में निचली बैठी रहो
- और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया तो चूंकि बदकारी करते थे (हमारा) अज़ाब
- अब बातें न बनाओं हक़ तो ये हैं कि तुम ईमान लाने के बाद काफ़िर
- (ये फ़क़त तुम्हारे हीले हैं) बात ये है कि तुम ये समझे बैठे थे कि
- क्या तुमने इस पर ग़ौर नहीं किया कि खुदा ही ने आसमान से पानी बरसाया
- और जितनी चीज़ें (चादँ सूरज वग़ैरह) आसमानों में हैं और जितने जानवर ज़मीन में हैं
- नहीं नहीं बात ये है कि ये लोग जो आमाल (बद) करते हैं उनका उनके
- (ये भी) कह दो कि मैं तुम्हारे हक़ में न बुराई ही का एख्तेयार रखता
- और उसी ने उन मुसलमानों के दिलों में बाहम ऐसी उलफ़त पैदा कर दी कि
- तो (राहे सवाब से) बेराह हो गए इसके बाद उनके परवरदिगार ने बर गुज़ीदा किया
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