अनुवाद — Tafsir
طه (ता-हा) — ये भी उन हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग हरूफ़) में से है, जिनका ज़िक्र कुरआन-ए-करीम की कई सूरतों के आरंभ में आया है। इन हरूफ़ का असली इल्म सिर्फ़ अल्लाह तआला को है, और ये कुरआन की ए'जाज़ (अद्भुतता) और अज़मत की निशानी हैं।
ये हरूफ़ इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि ये कुरआन उन्हीं हरूफ़ से बना है जो अरब के लोग आपस में बोलते और लिखते हैं, फिर भी वे इस जैसी कोई सूरा पेश करने से आजिज़ हैं। ये अल्लाह की तरफ़ से एक चुनौती है कि अगर तुम्हें शक है तो इसके मुक़ाबले में कुछ ले आओ, लेकिन ये किसी के बस की बात नहीं।
इन हरूफ़ में एक रहस्य और हिकमत है जो सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल ﷺ को मालूम है। हमारा ईमान है कि ये अल्लाह की किताब का हिस्सा है, और इन पर ईमान लाना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है। ये हरूफ़ कुरआन की अज़मत और उसके ए'जाज़ की दलील हैं, और हमें यक़ीन है कि इनमें अल्लाह की कोई न कोई हिकमत ज़रूर है, चाहे हम उसे समझें या न समझें।
ये बात हमारे दिलों को सुकून देती है कि हम उस किताब पर ईमान रखते हैं जो अल्लाह ने अपने प्यारे नबी ﷺ पर उतारी, और हम उसके हर हरफ़ को सच मानते हैं। ये हमारे लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है। हमें चाहिए कि कुरआन को सिर्फ़ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उस पर अमल करें और उसकी तालीमात को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल हो।
📜 आयत 1-3 — ताहा
अनुवाद — ताहा 1
सूरा ताहा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ता हा (रसूलअल्लाह)सूरा आयत 1/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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