Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِتَشْقَىٰ: ताकि तुम कष्ट उठाओ, तकलीफ़ में पड़ो, या अपने आप को सख्त मेहनत में डालो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! हमने आप पर यह क़ुरआन इसलिए नाज़िल नहीं किया कि आप इसकी वजह से मुश्किल में पड़ जाएँ, या अपनी जान को सख्त मशक्कत में डाल दें। यह वह ग़लतफ़हमी थी जो शुरुआती दौर में कुछ लोगों को हुई, जब उन्होंने देखा कि रसूलुल्लाह ﷺ इबादत में इतना वक़्त गुज़ारते हैं कि कभी-कभी एक पैर पर खड़े होकर नमाज़ पढ़ते रहते हैं, यहाँ तक कि उनके पैर सूज जाते थे। उन्होंने समझा कि शायद क़ुरआन का नाज़िल होना ही आपके लिए बोझ और तकलीफ़ का सबब बना है।
अल्लाह तआला ने इस आयत में साफ़ फ़रमा दिया कि यह क़ुरआन आपको तकलीफ़ देने के लिए नहीं उतारा गया। हमने इसे आप पर इसलिए नाज़िल किया कि यह आपके लिए रहमत, हिदायत और नूर बने — न कि आपके लिए बोझ। हाँ, अगर किसी ने इसे अपने ऊपर बोझ बना लिया, तो यह उसकी अपनी समझ की कमी है। क़ुरआन तो उस चीज़ का ज़रिया है जो दिल को सुकून दे, रूह को तरोताज़ा करे और इंसान को अल्लाह से जोड़े।
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी शिक्षा देती है कि दीन में ज़्यादती और इफ़रात (अति) नहीं चाहिए। अल्लाह ने अपने नबी को भी हल्का करने का हुक्म दिया, ताकि उम्मत के लिए आसानी का रास्ता साफ़ हो जाए। इसलिए हमें चाहिए कि इबादत में भी नबी ﷺ के तरीक़े को अपनाएँ — जो संतुलित, आसान और प्यार भरा है — और क़ुरआन को अपने लिए रहमत बनाएँ, न कि मुसीबत। क़ुरआन तो वह किताब है जो हर उस दिल के लिए शिफ़ा है जो सच्चे दिल से इसे पढ़ता और समझता है।
📜 आयत 1-4 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 2
सूरा ताहा आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने तुम पर कुरान इसलिए नाज़िल नहीं किया कि तुम…सूरा आयत 2/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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