📖 0/604 पृष्ठ पढ़े गए
📄 305
सूरा मरियम

सूरा मरियम

19:2
ذِكۡرُ رَحۡمَتِ رَبِّكَ عَبۡدَهُۥ زَكَرِيَّآ ٢
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी का ज़िक्र है जो (उसने) अपने ख़ास बन्दे ज़करिया के साथ की थी
19:3
إِذۡ نَادَىٰ رَبَّهُۥ نِدَآءً خَفِيًّا ٣
कि जब ज़करिया ने अपने परवरदिगार को धीमी आवाज़ से पुकारा
19:4
قَالَ رَبِّ إِنِّي وَهَنَ ٱلۡعَظۡمُ مِنِّي وَٱشۡتَعَلَ ٱلرَّأۡسُ شَيۡبًا وَلَمۡ أَكُنۢ بِدُعَآئِكَ رَبِّ شَقِيًّا ٤
(और) अर्ज़ की ऐ मेरे पालने वाले मेरी हड्डियां कमज़ोर हो गई और सर है कि बुढ़ापे की (आग से) भड़क उठा (सेफद हो गया) है और ऐ मेरे पालने वाले मैं तेरी बारगाह में दुआ कर के कभी महरूम नहीं रहा हूँ
19:5
وَإِنِّي خِفۡتُ ٱلۡمَوَٰلِيَ مِن وَرَآءِي وَكَانَتِ ٱمۡرَأَتِي عَاقِرًا فَهَبۡ لِي مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا ٥
और मैं अपने (मरने के) बाद अपने वारिसों से सहम जाता हूँ (कि मुबादा दीन को बरबाद करें) और मेरी बीबी उम्मे कुलसूम बिनते इमरान बांझ है पस तू मुझको अपनी बारगाह से एक जाँनशीन फरज़न्द अता फ़रमा
19:6
يَرِثُنِي وَيَرِثُ مِنۡ ءَالِ يَعۡقُوبَۖ وَٱجۡعَلۡهُ رَبِّ رَضِيًّا ٦
जो मेरी और याकूब की नस्ल की मीरास का मालिक हो ऐ मेरे परवरदिगार और उसको अपना पसन्दीदा बन्दा बना
19:7
يَٰزَكَرِيَّآ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَٰمٍ ٱسۡمُهُۥ يَحۡيَىٰ لَمۡ نَجۡعَل لَّهُۥ مِن قَبۡلُ سَمِيًّا ٧
खुदा ने फरमाया हम तुमको एक लड़के की खुशख़बरी देते हैं जिसका नाम यहया होगा और हमने उससे पहले किसी को उसका हमनाम नहीं पैदा किया
19:8
قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَٰمٌ وَكَانَتِ ٱمۡرَأَتِي عَاقِرًا وَقَدۡ بَلَغۡتُ مِنَ ٱلۡكِبَرِ عِتِيًّا ٨
ज़करिया ने अर्ज़ की या इलाही (भला) मुझे लड़का क्योंकर होगा और हालत ये है कि मेरी बीवी बाँझ है और मैं खुद हद से ज्यादा बुढ़ापे को पहुँच गया हूँ
19:9
قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدۡ خَلَقۡتُكَ مِن قَبۡلُ وَلَمۡ تَكُ شَيۡـًٔا ٩
(खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है कि ये बात हम पर (कुछ दुशवार नहीं) आसान है और (तुम अपने को तो ख्याल करो कि) इससे पहले तुमको पैदा किया हालाँकि तुम कुछ भी न थे
19:10
قَالَ رَبِّ ٱجۡعَل لِّيٓ ءَايَةًۖ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَٰثَ لَيَالٍ سَوِيًّا ١٠
ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे
19:11
فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوۡمِهِۦ مِنَ ٱلۡمِحۡرَابِ فَأَوۡحَىٰٓ إِلَيۡهِمۡ أَن سَبِّحُواْ بُكۡرَةً وَعَشِيًّا ١١
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
العربيةEnglishBahasa IndonesiaTürkçeРусскийفارسیFrançaisاردوবাংলাDeutschEspañol中文हिन्दीPortuguêsItalianoภาษาไทยPolskiNederlandsShqipKiswahiliO'zbekதமிழ்MelayuBosanskiSoomaaliAzərbaycanکوردی한국어日本語SvenskaDanskNorskپښتوമലയാളംසිංහලTamazightHausaአማርኛБългарскиТоҷикӣҚазақшаFilipinoسنڌيYorùbáFulfuldeТатарчаئۇيغۇرچەКыргызчаਪੰਜਾਬੀJawaతెలుగుမြန်မာગુજરાતીOromoमराठीTiếng ViệtMalagasyНохчийнWolofދިވެހިಕನ್ನಡУкраїнськаΕλληνικάქართულიខ្មែរدریQafar afMaranaoनेपाली
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 25, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए







