मरियम · 3/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ نِدَاءً خَفِيًّا ۝٣
Iz naadaa Rabbahoo nidaaa`an khafiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
कि जब ज़करिया ने अपने परवरदिगार को धीमी आवाज़ से पुकारा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَادَىٰ (नादा) – पुकारा, दुआ की।
  • نِدَاءً خَفِيًّا (निदाअन ख़फ़िय्यन) – छिपी हुई, धीमी और गुप्त पुकार।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की दुआ का ज़िक्र करती है, जब उन्होंने अपने रब को गुप्त और धीमी आवाज़ में पुकारा। यह पुकार उन्होंने अपने इबादत-ख़ाने (मेहराब) में रात के सन्नाटे में की, क्योंकि रात का वक़्त दुआ की क़बूलियत के लिए बहुत अफ़ज़ल होता है।

उन्होंने जान-बूझकर अपनी दुआ को छिपाया, ताकि यह दुआ ख़ालिस अल्लाह के लिए हो और उसमें किसी तरह का दिखावा (रिया) न मिले। गुप्त दुआ इंसान के ईमान की गहराई को दर्शाती है, क्योंकि जब बंदा अकेले में अपने रब से बात करता है, तो उसका भरोसा और इख़्लास ज़्यादा मज़बूत होता है।

यहाँ एक बड़ी सीख है कि दुआ में इख़्लास (शुद्ध नियत) सबसे ज़रूरी है। अल्लाह तआला उस बंदे की दुआ को बहुत पसंद करता है जो उसे पूरे यक़ीन और विनम्रता के साथ पुकारता है, चाहे वह पुकार कितनी ही धीमी क्यों न हो।

हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने इस तरह दुआ की कि उनकी उम्र ढल चुकी थी और उनके पास कोई औलाद नहीं थी, लेकिन उन्होंने अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं हुए। यह हमें सिखाता है कि हमें हर हाल में अल्लाह से उम्मीद रखनी चाहिए और अपनी ज़रूरतों को उसी के सामने पेश करना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है।

यह दुआ का आदाब भी सिखाती है कि इंसान चाहे तो अपनी दुआ को छिपाकर रखे, क्योंकि इससे दुआ में सच्चाई और गहराई आती है, और अल्लाह के करीब होने का एहसास बढ़ता है। अल्लाह तआला अपने बंदे की हर पुकार सुनता है, चाहे वह कितनी ही धीमी क्यों न हो, और वह अपने बंदे की दुआ को कभी रद्द नहीं करता।

इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि जब हम किसी मुश्किल में हों, तो अल्लाह से गुहार लगाएं, उस पर भरोसा रखें, और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की दुआएं ज़रूर क़बूल करता है और उन्हें उनकी मेहनत और सब्र का अच्छा बदला देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — मरियम

1كهيعص
काफ़ हा या ऐन साद
2ذِكْرُ رَحْمَتِ رَبِّكَ عَبْدَهُ زَكَرِيَّا
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी का ज़िक्र है जो (उसने) अपने ख़ास बन्दे ज़करिया के साथ की थी
3إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُ نِدَاءً خَفِيًّا
कि जब ज़करिया ने अपने परवरदिगार को धीमी आवाज़ से पुकारा
4قَالَ رَبِّ إِنِّي وَهَنَ الْعَظْمُ مِنِّي وَاشْتَعَلَ الرَّأْسُ شَيْبًا وَلَمْ أَكُن بِدُعَائِكَ رَبِّ شَقِيًّا
(और) अर्ज़ की ऐ मेरे पालने वाले मेरी हड्डियां कमज़ोर हो गई और सर है कि बुढ़ापे की (आग से) भड़क उठा (सेफद हो गया) है और ऐ मेरे पालने वाले मैं तेरी बारगाह में दुआ कर के कभी महरूम नहीं रहा हूँ
5وَإِنِّي خِفْتُ الْمَوَالِيَ مِن وَرَائِي وَكَانَتِ امْرَأَتِي عَاقِرًا فَهَبْ لِي مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا
और मैं अपने (मरने के) बाद अपने वारिसों से सहम जाता हूँ (कि मुबादा दीन को बरबाद करें) और मेरी बीबी उम्मे कुलसूम बिनते इमरान बांझ है पस तू मुझको अपनी बारगाह से एक जाँनशीन फरज़न्द अता फ़रमा
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अनुवाद — मरियम 3

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Tuesday, August 18, 2026

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