Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آيَةً: निशानी, चिह्न, सबूत।
- ثَلَاثَ لَيَالٍ: तीन रातें।
- سَوِيًّا: स्वस्थ, बिल्कुल सही-सलामत, बिना किसी बीमारी या दोष के।
विस्तृत तफ़सीर:
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने जब अल्लाह की ओर से अपनी बूढ़ी पत्नी के गर्भवती होने की खुशखबरी सुनी, तो उन्होंने अल्लाह से एक निशानी माँगी ताकि उनका दिल और अधिक मुत्मइन्न (संतुष्ट) हो जाए। यह उनकी ओर से अल्लाह पर भरोसे की कमी नहीं थी, बल्कि एक पैग़म्बर की स्वाभाविक इच्छा थी कि वे अल्लाह की कुदरत के इस अज़ीमुश्शान नज़ारे को और करीब से महसूस करें।
अल्लाह ने उनकी यह दुआ क़बूल की और फ़रमाया: "तेरी निशानी यह है कि तू तीन रातों तक लोगों से बात न कर सकेगा, हालाँकि तू बिल्कुल स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा, न तुझे कोई बीमारी होगी और न ही तेरी ज़बान में कोई खराबी आएगी।" यह एक मोजिज़ा था कि उनकी ज़बान बोलने पर क़ादिर होगी, लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी से वे लोगों से बात न कर पाएँगे। यह इस बात की सबसे बड़ी दलील थी कि यह खुशखबरी अल्लाह की तरफ़ से है, क्योंकि कोई इंसान अपनी मर्ज़ी से स्वस्थ रहते हुए तीन दिन तक बोलना नहीं छोड़ सकता।
इस आयत में हमारे लिए बड़ा सबक है कि अल्लाह से दुआ करते समय हमें पूरा यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने जो निशानी माँगी, वह इसलिए नहीं थी कि उन्हें अल्लाह के वादे पर शक था, बल्कि इसलिए कि उनका दिल और अधिक सुकून पा सके और वे अल्लाह की कुदरत के इस करिश्मे को देखकर अपनी उम्मत के लिए एक निशानी बन सकें।
यह हमें सिखाता है कि जब हम अल्लाह से कुछ माँगते हैं, तो हमें उसकी रहमत और कुदरत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और जब चाहता है, उन्हें पूरा करता है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ और अल्लाह का यह जवाब हमें बताता है कि अल्लाह के वादे सच्चे हैं और उसकी मदद कभी देर नहीं करती। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में हर मुश्किल के वक़्त अल्लाह की तरफ़ रुजू करें और उससे मदद माँगें, क्योंकि वही है जो हर मुश्किल को आसान करने की ताक़त रखता है।
📜 आयत 8-12 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 10
सूरा मरियम आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर…सूरा आयत 10/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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