मरियम · 10/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۚ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَ لَيَالٍ سَوِيًّا ۝١٠
Qaala Rabbij `al leee Aayah; qaala Aayatuka allaa tukalliman naasa salaasa layaalin sawiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً: निशानी, चिह्न, सबूत।
  • ثَلَاثَ لَيَالٍ: तीन रातें।
  • سَوِيًّا: स्वस्थ, बिल्कुल सही-सलामत, बिना किसी बीमारी या दोष के।

विस्तृत तफ़सीर:

हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने जब अल्लाह की ओर से अपनी बूढ़ी पत्नी के गर्भवती होने की खुशखबरी सुनी, तो उन्होंने अल्लाह से एक निशानी माँगी ताकि उनका दिल और अधिक मुत्मइन्न (संतुष्ट) हो जाए। यह उनकी ओर से अल्लाह पर भरोसे की कमी नहीं थी, बल्कि एक पैग़म्बर की स्वाभाविक इच्छा थी कि वे अल्लाह की कुदरत के इस अज़ीमुश्शान नज़ारे को और करीब से महसूस करें।

अल्लाह ने उनकी यह दुआ क़बूल की और फ़रमाया: "तेरी निशानी यह है कि तू तीन रातों तक लोगों से बात न कर सकेगा, हालाँकि तू बिल्कुल स्वस्थ और तंदुरुस्त रहेगा, न तुझे कोई बीमारी होगी और न ही तेरी ज़बान में कोई खराबी आएगी।" यह एक मोजिज़ा था कि उनकी ज़बान बोलने पर क़ादिर होगी, लेकिन अल्लाह की मर्ज़ी से वे लोगों से बात न कर पाएँगे। यह इस बात की सबसे बड़ी दलील थी कि यह खुशखबरी अल्लाह की तरफ़ से है, क्योंकि कोई इंसान अपनी मर्ज़ी से स्वस्थ रहते हुए तीन दिन तक बोलना नहीं छोड़ सकता।

इस आयत में हमारे लिए बड़ा सबक है कि अल्लाह से दुआ करते समय हमें पूरा यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने जो निशानी माँगी, वह इसलिए नहीं थी कि उन्हें अल्लाह के वादे पर शक था, बल्कि इसलिए कि उनका दिल और अधिक सुकून पा सके और वे अल्लाह की कुदरत के इस करिश्मे को देखकर अपनी उम्मत के लिए एक निशानी बन सकें।

यह हमें सिखाता है कि जब हम अल्लाह से कुछ माँगते हैं, तो हमें उसकी रहमत और कुदरत पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और जब चाहता है, उन्हें पूरा करता है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की यह दुआ और अल्लाह का यह जवाब हमें बताता है कि अल्लाह के वादे सच्चे हैं और उसकी मदद कभी देर नहीं करती। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में हर मुश्किल के वक़्त अल्लाह की तरफ़ रुजू करें और उससे मदद माँगें, क्योंकि वही है जो हर मुश्किल को आसान करने की ताक़त रखता है।



📜 आयत 8-12 — मरियम

8قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَكَانَتِ امْرَأَتِي عَاقِرًا وَقَدْ بَلَغْتُ مِنَ الْكِبَرِ عِتِيًّا
ज़करिया ने अर्ज़ की या इलाही (भला) मुझे लड़का क्योंकर होगा और हालत ये है कि मेरी बीवी बाँझ है और मैं खुद हद से ज्यादा बुढ़ापे को पहुँच गया हूँ
9قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِن قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْئًا
(खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है कि ये बात हम पर (कुछ दुशवार नहीं) आसान है और (तुम अपने को तो ख्याल करो कि) इससे पहले तुमको पैदा किया हालाँकि तुम कुछ भी न थे
10قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۚ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَ لَيَالٍ سَوِيًّا
ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे
11فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ مِنَ الْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
12يَا يَحْيَىٰ خُذِ الْكِتَابَ بِقُوَّةٍ ۖ وَآتَيْنَاهُ الْحُكْمَ صَبِيًّا
(ग़रज़ यहया पैदा हुए और हमने उनसे कहा) ऐ यहया किताब (तौरेत) मज़बूती के साथ लो
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अनुवाद — मरियम 10

सूरा मरियम आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर…

सूरा आयत 10/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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