Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَهَنَ الْعَظْمُ – हड्डियाँ कमज़ोर हो गईं।
- وَاشْتَعَلَ الرَّأْسُ شَيْبًا – सिर में बुढ़ापे के सफ़ेद बाल फैल गए (जैसे आग की लपटें फैलती हैं)।
- شَقِيًّا – अभागा, निराश, दुआ से महरूम।
तफ़सीर (व्याख्या):
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपनी दुआ में अल्लाह के सामने अपनी कमज़ोरी और बुढ़ापे का हाल बयान किया। उन्होंने कहा: "ऐ मेरे रब! मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गई हैं, मेरा शरीर बूढ़ा हो गया है, और मेरे सिर के बाल सफ़ेदी से चमकने लगे हैं — यानी बुढ़ापे का असर मेरे पूरे वजूद पर दिखाई दे रहा है।" ये अल्फ़ाज़ उनकी इब्तिहाल (गिड़गिड़ाहट) और अल्लाह के सामने अपनी हाजत बयान करने की निहायत खूबसूरत सूरत है।
फिर उन्होंने ये बात कही जो उनकी उम्मीद और यक़ीन की गहराई को दिखाती है: "ऐ मेरे रब! मैं अपनी दुआओं में तुझसे कभी निराश नहीं लौटा। तूने हमेशा मेरी दुआ सुनी और मुझे कभी महरूम नहीं किया।" ये जुमला दरअसल उनके अल्लाह पर भरोसे और उसकी रहमत से जुड़े पुराने तजुर्बे का इज़हार है। वो ये कहना चाहते थे कि ऐ अल्लाह! तूने मुझे आज तक कभी नाउम्मीद नहीं किया, इसलिए मुझे पूरा यक़ीन है कि इस बार भी तू मेरी दुआ क़बूल करेगा और मुझे एक नेक औलाद अता करेगा।
इस आयत में हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:
- दुआ में अपनी कमज़ोरी और हाजत का इज़हार करना – अल्लाह के सामने अपनी मजबूरी बयान करना अच्छा है, क्योंकि ये अल्लाह के सामने इब्तिहाल और इन्किसार की निशानी है।
- अल्लाह पर भरोसा और उसकी रहमत से उम्मीद – हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपनी पुरानी दुआओं की क़बूलियत का ज़िक्र करके अल्लाह से उम्मीदवारी का सबक़ सिखाया। हमें भी चाहिए कि अल्लाह की पिछली नेअमतों को याद करके उससे और ज़्यादा उम्मीद रखें।
- बुढ़ापे में भी दुआ की ताक़त – ये आयत हमें बताती है कि इंसान चाहे कितना ही बूढ़ा और कमज़ोर हो जाए, उसे अल्लाह से दुआ माँगना नहीं छोड़ना चाहिए। अल्लाह की रहमत और क़ुदरत किसी भी हाल में बड़ी है।
ये दुआ हमें सिखाती है कि अल्लाह से माँगते वक़्त हमें अपनी कमज़ोरी का इज़हार करना चाहिए और साथ ही उसकी रहमत पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए। अल्लाह अपने बंदे की दुआ कभी बेकार नहीं करता, बल्कि उसे सबसे अच्छे तरीक़े से क़बूल करता है। हमें भी चाहिए कि अपनी हर हाजत में अल्लाह से दुआ करें और उसकी रहमत से कभी मायूस न हों।
📜 आयत 2-6 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 4
सूरा मरियम आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) अर्ज़ की ऐ मेरे पालने वाले मेरी हड्डियां कमज़ोर…सूरा आयत 4/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


