मरियम · 9/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِن قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْئًا ۝٩
Qaala kazaalika qaala Rabbuka huwa `alaiya haiyinunw wa qad khalaqtuka min qablu wa lam taku shai`aa
📖 हिंदी अर्थ
(खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है कि ये बात हम पर (कुछ दुशवार नहीं) आसान है और (तुम अपने को तो ख्याल करो कि) इससे पहले तुमको पैदा किया हालाँकि तुम कुछ भी न थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ – ऐसे ही, इसी प्रकार
  • هَيِّنٌ – आसान, सरल
  • وَلَمْ تَكُ شَيْئًا – और तुम कुछ भी नहीं थे (अर्थात तुम्हारा अस्तित्व नहीं था)

तफ़सीर (व्याख्या):

जब ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि मेरे बुढ़ापे और मेरी पत्नी के बांझपन के बावजूद मुझे संतान कैसे मिल सकती है, तो फ़रिश्ते ने उन्हें उत्तर दिया: "ऐ ज़करिय्या! यह बात तुम्हारे लिए अजीब नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह तुम्हारे रब का फ़रमान है।" अल्लाह तआला ने जब किसी चीज़ का फ़ैसला कर लेता है, तो वह उसके लिए बिल्कुल आसान होती है। यही वह सिद्धांत है जो हमें सिखाता है कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे हर कठिनाई बेमानी है।

फिर अल्लाह ने ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) को उससे भी बड़ी निशानी की याद दिलाई: "मैंने तुम्हें इससे पहले पैदा किया, जब तुम कुछ भी नहीं थे।" यानी जिस अल्लाह ने तुम्हें शून्य से अस्तित्व दिया, उसके लिए एक बूढ़े पिता और बांझ माँ से संतान पैदा करना क्या मुश्किल है? यह एक ऐसा सबक है जो हमें बताता है कि अल्लाह की रहमत और क़ुदरत की कोई सीमा नहीं।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है: जब हम किसी मुश्किल में होते हैं और हमें लगता है कि अब कोई रास्ता नहीं, तो हमें याद रखना चाहिए कि अल्लाह ने हमें कुछ नहीं से पैदा किया। जिसने हमें यह जीवन दिया, वह हमारी हर ज़रूरत को पूरा कर सकता है। हमें अपनी दुआओं में यक़ीन रखना चाहिए और अल्लाह की रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। यही ईमान की असली ताक़त है – यह जानना कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है।

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह से माँगते रहना चाहिए, चाहे हालात कितने भी विपरीत हों, क्योंकि अल्लाह की दया और शक्ति हर हद से बाहर है। ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) की दुआ ने उन्हें वह नेमत दिलाई जो उम्र और वजह के हिसाब से नामुमकिन लगती थी। हमें भी चाहिए कि अपनी हर ज़रूरत में अल्लाह से जुड़ें और उस पर पूरा भरोसा रखें।



📜 आयत 7-11 — सूरा मरियम

7يَا زَكَرِيَّا إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَامٍ اسْمُهُ يَحْيَىٰ لَمْ نَجْعَل لَّهُ مِن قَبْلُ سَمِيًّا
खुदा ने फरमाया हम तुमको एक लड़के की खुशख़बरी देते हैं जिसका नाम यहया होगा और हमने उससे पहले किसी को उसका हमनाम नहीं पैदा किया
8قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَامٌ وَكَانَتِ امْرَأَتِي عَاقِرًا وَقَدْ بَلَغْتُ مِنَ الْكِبَرِ عِتِيًّا
ज़करिया ने अर्ज़ की या इलाही (भला) मुझे लड़का क्योंकर होगा और हालत ये है कि मेरी बीवी बाँझ है और मैं खुद हद से ज्यादा बुढ़ापे को पहुँच गया हूँ
9قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِن قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْئًا
(खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है कि ये बात हम पर (कुछ दुशवार नहीं) आसान है और (तुम अपने को तो ख्याल करो कि) इससे पहले तुमको पैदा किया हालाँकि तुम कुछ भी न थे
10قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۚ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَ لَيَالٍ سَوِيًّا
ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे
11فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ مِنَ الْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
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अनुवाद — मरियम 9

सूरा मरियम आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है…

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Tuesday, September 8, 2026

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