मरियम · 11/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ مِنَ الْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا ۝١١
Fakharaja `alaa qawmihee minal mihraabi fa-awhaaa ilaihim an sabbihoo bukratanw wa `ashiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • मिहराब: इबादत की जगह, नमाज़ पढ़ने का स्थान।
  • औहा: इशारा किया, संकेत किया (बिना बोले)।
  • बुकरतन: सुबह का समय।
  • अशिय्यन: शाम का समय।

तफसीर:

हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) जब अपनी इबादतगाह (मिहराब) में थे, तो अल्लाह ने उन्हें बेटे (हज़रत यहया) की खुशखबरी दी। यह खुशखबरी उनके लिए एक अज़ीम नेमत और मोजिज़ा थी, क्योंकि वे बूढ़े थे और उनकी पत्नी भी बांझ थी। जब यह खुशखबरी मिली, तो उनका दिल शुक्र और खुशी से भर गया। अगले दिन सुबह वे अपनी इबादतगाह से निकलकर अपनी क़ौम के लोगों के पास आए। लोग उन्हें देखकर हैरान थे, क्योंकि उनका चेहरा नूरानी और बदला हुआ था। उन्होंने बिना बोले, इशारे से लोगों को समझाया कि तुम सुबह और शाम अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करो, यानी नमाज़ पढ़ो और अल्लाह की याद में लगे रहो।

यह इशारा इसलिए था, क्योंकि अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करने का सबसे अच्छा तरीका उसकी इबादत और तस्बीह है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह पैगाम दिया कि जब अल्लाह किसी बंदे पर मेहरबानी करता है, तो बंदे को चाहिए कि वह सुबह-शाम उसका शुक्रिया अदा करे। यह सिर्फ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल और अमल से भी होना चाहिए।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की नेमतें जब मिलें, तो हमें खुशी का इज़हार करना चाहिए और अल्लाह की इबादत में वक़्त गुज़ारना चाहिए। सुबह और शाम की तस्बीह और नमाज़ हमारे दिल को सुकून देती है और हमें अल्लाह के करीब लाती है। यह एक ऐसा अमल है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) का यह अमल हमारे लिए एक नमूना है कि हम भी हर हाल में अल्लाह का शुक्रिया अदा करें और उसकी याद में दिन की शुरुआत और अंत करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — मरियम

9قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَيَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِن قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْئًا
(खुदा ने) फ़रमाया ऐसा ही होगा तुम्हारा परवरदिगार फ़रमाता है कि ये बात हम पर (कुछ दुशवार नहीं) आसान है और (तुम अपने को तो ख्याल करो कि) इससे पहले तुमको पैदा किया हालाँकि तुम कुछ भी न थे
10قَالَ رَبِّ اجْعَل لِّي آيَةً ۚ قَالَ آيَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ النَّاسَ ثَلَاثَ لَيَالٍ سَوِيًّا
ज़करिया ने अर्ज़ की इलाही मेरे लिए कोई अलामत मुक़र्रर कर दें हुक्म हुआ तुम्हारी पहचान ये है कि तुम तीन रात (दिन) बराबर लोगों से बात नहीं कर सकोगे
11فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ مِنَ الْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
12يَا يَحْيَىٰ خُذِ الْكِتَابَ بِقُوَّةٍ ۖ وَآتَيْنَاهُ الْحُكْمَ صَبِيًّا
(ग़रज़ यहया पैदा हुए और हमने उनसे कहा) ऐ यहया किताब (तौरेत) मज़बूती के साथ लो
13وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَاةً ۖ وَكَانَ تَقِيًّا
और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत और रहमदिली और पाक़ीज़गी अता फरमाई
मरियमकुरान सूची
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मक्कीRevelation
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अनुवाद — मरियम 11

सूरा मरियम आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के…

सूरा आयत 11/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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