अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- मिहराब: इबादत की जगह, नमाज़ पढ़ने का स्थान।
- औहा: इशारा किया, संकेत किया (बिना बोले)।
- बुकरतन: सुबह का समय।
- अशिय्यन: शाम का समय।
तफसीर:
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) जब अपनी इबादतगाह (मिहराब) में थे, तो अल्लाह ने उन्हें बेटे (हज़रत यहया) की खुशखबरी दी। यह खुशखबरी उनके लिए एक अज़ीम नेमत और मोजिज़ा थी, क्योंकि वे बूढ़े थे और उनकी पत्नी भी बांझ थी। जब यह खुशखबरी मिली, तो उनका दिल शुक्र और खुशी से भर गया। अगले दिन सुबह वे अपनी इबादतगाह से निकलकर अपनी क़ौम के लोगों के पास आए। लोग उन्हें देखकर हैरान थे, क्योंकि उनका चेहरा नूरानी और बदला हुआ था। उन्होंने बिना बोले, इशारे से लोगों को समझाया कि तुम सुबह और शाम अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करो, यानी नमाज़ पढ़ो और अल्लाह की याद में लगे रहो।
यह इशारा इसलिए था, क्योंकि अल्लाह की नेमतों का शुक्रिया अदा करने का सबसे अच्छा तरीका उसकी इबादत और तस्बीह है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को यह पैगाम दिया कि जब अल्लाह किसी बंदे पर मेहरबानी करता है, तो बंदे को चाहिए कि वह सुबह-शाम उसका शुक्रिया अदा करे। यह सिर्फ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल और अमल से भी होना चाहिए।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की नेमतें जब मिलें, तो हमें खुशी का इज़हार करना चाहिए और अल्लाह की इबादत में वक़्त गुज़ारना चाहिए। सुबह और शाम की तस्बीह और नमाज़ हमारे दिल को सुकून देती है और हमें अल्लाह के करीब लाती है। यह एक ऐसा अमल है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) का यह अमल हमारे लिए एक नमूना है कि हम भी हर हाल में अल्लाह का शुक्रिया अदा करें और उसकी याद में दिन की शुरुआत और अंत करें।
📜 आयत 9-13 — मरियम
अनुवाद — मरियम 11
सूरा मरियम आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के…सूरा आयत 11/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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