📖 0/604 पृष्ठ पढ़े गए
📄 374
كَذَّبَتۡ قَوۡمُ لُوطٍ ٱلۡمُرۡسَلِينَ  ۝١٦٠ إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ  ۝١٦١ إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٌ  ۝١٦٢ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ  ۝١٦٣ وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٦٤ أَتَأۡتُونَ ٱلذُّكۡرَانَ مِنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٦٥ وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمۡ رَبُّكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ عَادُونَ  ۝١٦٦ قَالُواْ لَئِن لَّمۡ تَنتَهِ يَٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُخۡرَجِينَ  ۝١٦٧ قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلۡقَالِينَ  ۝١٦٨ رَبِّ نَجِّنِي وَأَهۡلِي مِمَّا يَعۡمَلُونَ  ۝١٦٩ فَنَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ  ۝١٧٠ إِلَّا عَجُوزًا فِي ٱلۡغَٰبِرِينَ  ۝١٧١ ثُمَّ دَمَّرۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ  ۝١٧٢ وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرًاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ  ۝١٧٣ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةًۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ  ۝١٧٤ وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ  ۝١٧٥ كَذَّبَ أَصۡحَٰبُ لۡـَٔيۡكَةِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ  ۝١٧٦ إِذۡ قَالَ لَهُمۡ شُعَيۡبٌ أَلَا تَتَّقُونَ  ۝١٧٧ إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٌ  ۝١٧٨ فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ  ۝١٧٩ وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٨٠ ۞ أَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَلَا تَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُخۡسِرِينَ  ۝١٨١ وَزِنُواْ بِٱلۡقِسۡطَاسِ ٱلۡمُسۡتَقِيمِ  ۝١٨٢ وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ  ۝١٨٣
26:160
كَذَّبَتۡ قَوۡمُ لُوطٍ ٱلۡمُرۡسَلِينَ  ۝١٦٠
इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलाया
26:161
إِذۡ قَالَ لَهُمۡ أَخُوهُمۡ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ  ۝١٦١
जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
26:162
إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٌ  ۝١٦٢
मै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से डरो
26:163
فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ  ۝١٦٣
और मेरी इताअत करो
26:164
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٦٤
और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) पर है
26:165
أَتَأۡتُونَ ٱلذُّكۡرَانَ مِنَ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٦٥
क्या तुम लोग (शहवत परस्ती के लिए) सारे जहाँ के लोगों में मर्दों ही के पास जाते हो
26:166
وَتَذَرُونَ مَا خَلَقَ لَكُمۡ رَبُّكُم مِّنۡ أَزۡوَٰجِكُمۚ بَلۡ أَنتُمۡ قَوۡمٌ عَادُونَ  ۝١٦٦
और तुम्हारे वास्ते जो बीवियाँ तुम्हारे परवरदिगार ने पैदा की है उन्हें छोड़ देते हो (ये कुछ नहीं) बल्कि तुम लोग हद से गुज़र जाने वाले आदमी हो
26:167
قَالُواْ لَئِن لَّمۡ تَنتَهِ يَٰلُوطُ لَتَكُونَنَّ مِنَ ٱلۡمُخۡرَجِينَ  ۝١٦٧
उन लोगों ने कहा ऐ लूत अगर तुम बाज़ न आओगे तो तुम ज़रुर निकल बाहर कर दिए जाओगे
26:168
قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُم مِّنَ ٱلۡقَالِينَ  ۝١٦٨
लूत ने कहा मै यक़ीनन तुम्हारी (नाशाइसता) हरकत से बेज़ार हूँ
26:169
رَبِّ نَجِّنِي وَأَهۡلِي مِمَّا يَعۡمَلُونَ  ۝١٦٩
(और दुआ की) परवरदिगार जो कुछ ये लोग करते है उससे मुझे और मेरे लड़कों को नजात दे
26:170
فَنَجَّيۡنَٰهُ وَأَهۡلَهُۥٓ أَجۡمَعِينَ  ۝١٧٠
तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी
26:171
إِلَّا عَجُوزًا فِي ٱلۡغَٰبِرِينَ  ۝١٧١
मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयी
26:172
ثُمَّ دَمَّرۡنَا ٱلۡأٓخَرِينَ  ۝١٧٢
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला
26:173
وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهِم مَّطَرًاۖ فَسَآءَ مَطَرُ ٱلۡمُنذَرِينَ  ۝١٧٣
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था
26:174
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَأٓيَةًۖ وَمَا كَانَ أَكۡثَرُهُم مُّؤۡمِنِينَ  ۝١٧٤
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
26:175
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ  ۝١٧٥
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
26:176
كَذَّبَ أَصۡحَٰبُ لۡـَٔيۡكَةِ ٱلۡمُرۡسَلِينَ  ۝١٧٦
इसी तरह जंगल के रहने वालों ने (मेरे) पैग़म्बरों को झुठलाया
26:177
إِذۡ قَالَ لَهُمۡ شُعَيۡبٌ أَلَا تَتَّقُونَ  ۝١٧٧
जब शुएब ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
26:178
إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينٌ  ۝١٧٨
मै तो बिला शुबाह तुम्हारा अमानदार हूँ
26:179
فَٱتَّقُواْ ٱللَّهَ وَأَطِيعُونِ  ۝١٧٩
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
26:180
وَمَآ أَسۡـَٔلُكُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۖ إِنۡ أَجۡرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝١٨٠
मै तो तुमसे इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा) के ज़िम्मे है
26:181
۞ أَوۡفُواْ ٱلۡكَيۡلَ وَلَا تَكُونُواْ مِنَ ٱلۡمُخۡسِرِينَ  ۝١٨١
तुम (जब कोई चीज़ नाप कर दो तो) पूरा पैमाना दिया करो और नुक़सान (कम देने वाले) न बनो
26:182
وَزِنُواْ بِٱلۡقِسۡطَاسِ ٱلۡمُسۡتَقِيمِ  ۝١٨٢
और तुम (जब तौलो तो) ठीक तराज़ू से डन्डी सीधी रखकर तौलो
26:183
وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ  ۝١٨٣
और लोगों को उनकी चीज़े (जो ख़रीदें) कम न ज्यादा करो और ज़मीन से फसाद न फैलाते फिरो


📚Juz 19 📄374 / 604



Mishary Rashid Alafasy
Mahmoud Khalil Al-Husary
Abdurrahman As-Sudais
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
Abdul Basit Abdul Samad
Ali Al-Hudhaify
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
Abu Bakr Ash-Shaatree
Muhammad Ayyoub
Abdullah Basfar
Abdullah Al-Juhani
Maher Al Muaiqly
0:00
0:00
-

पवित्र क़ुरआन


Wednesday, August 26, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए