अश-शुआरा · 181/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ ۝١٨١
Awful kaila wa laa takoonoo minal mukhsireen
📖 हिंदी अर्थ
तुम (जब कोई चीज़ नाप कर दो तो) पूरा पैमाना दिया करो और नुक़सान (कम देने वाले) न बनो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَوْفُوا الْكَيْلَ: नाप-तौल को पूरा करो, अर्थात जब किसी को नापकर दो तो पूरा-पूरा दो।
  • الْمُخْسِرِينَ: वे लोग जो दूसरों का हक़ कम करके उन्हें घाटे में डालते हैं, अर्थात नाप-तौल में कमी करने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत शुएब अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम "अस्हाबुल-ऐकह" (घने जंगलों वाली बस्ती) के लोगों को नसीहत करते हुए फ़रमाया कि जब तुम लोगों को नापकर चीज़ें दो तो नाप को पूरा-पूरा करो, उसमें कमी न करो। वे लोग नाप-तौल में धोखा देते थे, दूसरों का हक़ मारते थे, इसलिए अल्लाह के नबी ने उन्हें साफ़-साफ़ समझाया कि तुम उन लोगों में से मत बनो जो दूसरों को नुक़सान पहुँचाते हैं और उनके हक़ों में कमी करते हैं। यह सिर्फ़ नाप-तौल का मामला नहीं है, बल्कि हर उस काम से बचने की तालीम है जिसमें किसी का हक़ मारा जाए, चाहे वह नाप में हो, तौल में हो, या किसी और मामले में।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि मुसलमान की पहचान यह है कि वह दूसरों को पूरा हक़ दे, किसी के साथ धोखा न करे, और किसी को घाटे में न डाले। यह आदेश सिर्फ़ उस ज़माने के लिए नहीं था, बल्कि आज के हर दौर और हर मुआमले (लेन-देन) पर लागू होता है। चाहे हम कारोबार करें, नौकरी करें, या किसी और तरह का व्यवहार करें, हमें हमेशा इंसाफ़ और ईमानदारी का रास्ता अपनाना चाहिए।

याद रखिए, अल्लाह तआला की नज़र में वही लोग कामयाब हैं जो दूसरों के हक़ों का ख़याल रखते हैं। नाप-तौल में कमी करना, चाहे वह कितनी भी मामूली हो, अल्लाह की नाराज़गी का सबब बनता है। इसलिए हमें चाहिए कि अपने हर काम में ईमानदारी और पूरा हक़ अदा करने का ख़याल रखें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत के करीब लाता है और हमारे दिलों को सुकून देता है।



📜 आयत 179-183 — सूरा अश-शुआरा

179فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
180وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मै तो तुमसे इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा) के ज़िम्मे है
181۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ
तुम (जब कोई चीज़ नाप कर दो तो) पूरा पैमाना दिया करो और नुक़सान (कम देने वाले) न बनो
182وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَقِيمِ
और तुम (जब तौलो तो) ठीक तराज़ू से डन्डी सीधी रखकर तौलो
183وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और लोगों को उनकी चीज़े (जो ख़रीदें) कम न ज्यादा करो और ज़मीन से फसाद न फैलाते फिरो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
181आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 181

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Saturday, October 3, 2026

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