अश-शुआरा · 162/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ ۝١٦٢
Innee lakum rasoolun ameen
📖 हिंदी अर्थ
मै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से डरो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • रसूल: संदेशवाहक, जिसे अल्लाह ने अपने बंदों की ओर भेजा हो।
  • अमीन: विश्वसनीय, अमानतदार, जो सौंपी गई ज़िम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और सच्चाई से निभाए।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए फ़रमाया: "मैं तुम्हारे लिए अल्लाह का भेजा हुआ रसूल हूँ, और मैं अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) में पूर्ण रूप से अमानतदार हूँ।" यह वही सच्चाई है जो हर नबी अपनी क़ौम के सामने रखता है — कि वह अल्लाह की ओर से भेजा गया है, और उस पर यह अमानत है कि जो संदेश अल्लाह ने दिया है, उसे बिल्कुल वैसे ही पहुँचाए, न उसमें कुछ घटाए और न बढ़ाए।

हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की यह बात उनकी सच्चाई और विश्वसनीयता का प्रमाण थी। वे अपनी क़ौम से कह रहे थे कि मैंने तुमसे कभी कोई झूठ नहीं बोला, और अब भी मैं जो कह रहा हूँ, वह अल्लाह की ओर से है। मैं तुम्हें सिर्फ़ अल्लाह की इबादत और अच्छे कामों की ओर बुलाता हूँ, और तुम्हें उन बुराइयों से रोकता हूँ जो अल्लाह को नापसंद हैं। मेरी यह दावत निःस्वार्थ है — मैं इसका कोई बदला नहीं माँगता, मेरा इनाम तो अल्लाह के पास है।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चे दावत देने वाले की पहचान उसकी अमानतदारी और सच्चाई है। जो व्यक्ति अल्लाह के दीन की ओर बुलाता है, उसे चाहिए कि वह हर मामले में सच्चा और भरोसेमंद हो, ताकि लोग उसकी बात पर यक़ीन करें। और जो लोग अल्लाह के रसूलों की बात मानते हैं, वे सीधे रास्ते पर चलते हैं और दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होते हैं।

याद रखिए, अल्लाह के रसूल हमेशा अपनी क़ौम के सबसे सच्चे और अमानतदार लोग होते थे। इसलिए उनकी बात को कबूल करना और उनके बताए रास्ते पर चलना ही हमारी भलाई है। आज भी जो लोग अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाते हैं, उन्हें चाहिए कि वे इसी सच्चाई और अमानतदारी के साथ लोगों तक पैग़ाम पहुँचाएँ, और लोगों को चाहिए कि वे सच्चे दावत देने वालों की बात ध्यान से सुनें और समझें।



📜 आयत 160-164 — सूरा अश-शुआरा

160كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ الْمُرْسَلِينَ
इसी तरह लूत की क़ौम ने पैग़म्बरों को झुठलाया
161إِذْ قَالَ لَهُمْ أَخُوهُمْ لُوطٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उनके भाई लूत ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
162إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से डरो
163فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और मेरी इताअत करो
164وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
और मै तो तुमसे इस (तबलीगे रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदायी के पालने वाले (ख़ुदा) पर है
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
162आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 162

सूरा अश-शुआरा आयत 162 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मै तो यक़ीनन तुम्हारा अमानतदार पैग़म्बर हूँ तो ख़ुदा से…

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Saturday, October 3, 2026

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