अश-शुआरा · 173/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ ۝١٧٣
Wa amtarnaa `alaihim mataran fasaaa`a matarul munzareen
📖 हिंदी अर्थ
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا: हमने उन पर (आकाश से) पत्थरों की बारिश बरसाई।
  • فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ: तो वह बारिश उन लोगों के लिए कितनी बुरी थी जिन्हें (अल्लाह के अज़ाब से) डराया गया था।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के अंजाम से आगाह कर रहे हैं। जब उन्होंने अल्लाह के नबी की नसीहत को ठुकरा दिया और अपनी बुराइयों पर अड़े रहे, तो अल्लाह का अज़ाब आया। अल्लाह ने उन पर आसमान से पत्थरों की ऐसी बारिश बरसाई जिसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। यह कोई आम बारिश नहीं थी, बल्कि अज़ाब की बारिश थी जो उनके लिए हलाकत और तबाही लेकर आई।

यह बारिश सिर्फ उन लोगों पर नहीं आई जो उस वक़्त मौजूद थे, बल्कि उन लोगों पर भी आई जो शहर से बाहर गए हुए थे या सफर पर थे। अल्लाह का अज़ाब किसी को नहीं छोड़ता। यही वह लोग थे जिन्हें हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के अज़ाब से डराया था, लेकिन उन्होंने नबी की बात नहीं मानी और अपनी शरारतों में मशगूल रहे।

अल्लाह तआला फरमाते हैं कि "फ़साआ मतरुल मुन्ज़रीन" यानी कितनी बुरी थी वह बारिश उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से डराया जा चुका था। यानी उनके पास चेतावनी आ चुकी थी, उन्हें बता दिया गया था कि अगर तुम नहीं रुके तो अज़ाब आएगा, लेकिन उन्होंने सुनी अनसुनी कर दी। इसलिए जब अज़ाब आया तो वह और भी सख्त था।

इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि अल्लाह के नबियों और उनके पैग़ाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जब अल्लाह की तरफ से चेतावनी आ जाए, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए और अपनी गलतियों से तौबा कर लेनी चाहिए। अल्लाह रहीम और करीम है, वह तौबा करने वालों को माफ कर देता है, लेकिन जो लोग हठ और अकड़ पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त होता है।

याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो उसकी नाफरमानी पर अड़े रहते हैं। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें और उसके रसूलों के रास्ते पर चलें, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो पिछली क़ौमों पर आया।



📜 आयत 171-175 — अश-शुआरा

171إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयी
172ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला
173وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था
174إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
175وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
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अनुवाद — अश-शुआरा 173

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Tuesday, August 18, 2026

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