Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا: हमने उन पर (आकाश से) पत्थरों की बारिश बरसाई।
- فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ: तो वह बारिश उन लोगों के लिए कितनी बुरी थी जिन्हें (अल्लाह के अज़ाब से) डराया गया था।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के अंजाम से आगाह कर रहे हैं। जब उन्होंने अल्लाह के नबी की नसीहत को ठुकरा दिया और अपनी बुराइयों पर अड़े रहे, तो अल्लाह का अज़ाब आया। अल्लाह ने उन पर आसमान से पत्थरों की ऐसी बारिश बरसाई जिसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। यह कोई आम बारिश नहीं थी, बल्कि अज़ाब की बारिश थी जो उनके लिए हलाकत और तबाही लेकर आई।
यह बारिश सिर्फ उन लोगों पर नहीं आई जो उस वक़्त मौजूद थे, बल्कि उन लोगों पर भी आई जो शहर से बाहर गए हुए थे या सफर पर थे। अल्लाह का अज़ाब किसी को नहीं छोड़ता। यही वह लोग थे जिन्हें हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह के अज़ाब से डराया था, लेकिन उन्होंने नबी की बात नहीं मानी और अपनी शरारतों में मशगूल रहे।
अल्लाह तआला फरमाते हैं कि "फ़साआ मतरुल मुन्ज़रीन" यानी कितनी बुरी थी वह बारिश उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से डराया जा चुका था। यानी उनके पास चेतावनी आ चुकी थी, उन्हें बता दिया गया था कि अगर तुम नहीं रुके तो अज़ाब आएगा, लेकिन उन्होंने सुनी अनसुनी कर दी। इसलिए जब अज़ाब आया तो वह और भी सख्त था।
इस आयत से हमें सबक लेना चाहिए कि अल्लाह के नबियों और उनके पैग़ाम को हल्के में नहीं लेना चाहिए। जब अल्लाह की तरफ से चेतावनी आ जाए, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए और अपनी गलतियों से तौबा कर लेनी चाहिए। अल्लाह रहीम और करीम है, वह तौबा करने वालों को माफ कर देता है, लेकिन जो लोग हठ और अकड़ पर अड़े रहते हैं, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब बहुत सख्त होता है।
याद रखिए, अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो उसकी तरफ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उन लोगों के लिए है जो उसकी नाफरमानी पर अड़े रहते हैं। हमें चाहिए कि हम हमेशा अल्लाह के हुक्मों की पैरवी करें और उसके रसूलों के रास्ते पर चलें, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो पिछली क़ौमों पर आया।
📜 आयत 171-175 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 173
सूरा अश-शुआरा आयत 173 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन…सूरा आयत 173/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 171–175. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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