अश-शुआरा · 175/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ ۝١٧٥
Wa inna Rabbaka la Huwal `Azeezur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-अज़ीज़ (العزيز): वह शक्तिशाली जो सब पर ग़ालिब हो, जिसे कोई हरा न सके, और जो अपने दुश्मनों से बदला लेने की पूरी क़ुदरत रखता हो।
  • अर-रहीम (الرحيم): वह जो अपने बंदों पर बहुत दया करने वाला हो, ख़ासकर उन पर जो तौबा करके उसकी ओर लौट आएं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम यक़ीन रखो कि तुम्हारा रब ही सच्चा अज़ीज़ है—वह सबसे बड़ी ताक़त का मालिक है, उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता। वह उन लोगों को ज़रूर सज़ा देगा जो उसके रसूलों को झुठलाते हैं और उसकी आयतों का इनकार करते हैं। मगर साथ ही वह रहीम भी है—अपने ईमानवाले बंदों पर बेहद मेहरबान है, और उन लोगों को माफ़ करने वाला है जो अपनी ग़लतियों से तौबा करके उसकी राह पर लौट आते हैं।

यह आयत मोमिनों के दिलों को सुकून देती है कि चाहे दुनिया में ज़ुल्म करने वाले कितने भी ताक़तवर क्यों न दिखें, अल्लाह की ताक़त सबसे ऊपर है। वह अपने नेक बंदों की मदद करेगा और उन्हें कामयाबी देगा। साथ ही यह डर भी दिलाती है कि अल्लाह की पकड़ से बचना नामुमकिन है, इसलिए हमें उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए और उसकी रहमत की तरफ़ दौड़ना चाहिए।

याद रखो, अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसीअ है। जो भी सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है, वह उसे गले लगा लेता है। यही हमारे रब की शान है—वह जब चाहे सज़ा दे, और जब चाहे रहमत की बारिश कर दे। हमें चाहिए कि हम उसकी रहमत के भूखे रहें और उसके अज़ाब से डरते रहें, क्योंकि यही दोनों चीज़ें हमें सीधी राह पर चलाती हैं।



📜 आयत 173-177 — अश-शुआरा

173وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था
174إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
175وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
176كَذَّبَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ الْمُرْسَلِينَ
इसी तरह जंगल के रहने वालों ने (मेरे) पैग़म्बरों को झुठलाया
177إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब शुएब ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
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अनुवाद — अश-शुआरा 175

सूरा अश-शुआरा आयत 175 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन…

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Tuesday, August 18, 2026

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