अश-शुआरा · 179/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ ۝١٧٩
Fattaqul laaha wa atee`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاتَّقُوا اللَّهَ – अल्लाह से डरो, उसकी नाराज़गी से बचो।
  • وَأَطِيعُونِ – और मेरी आज्ञा का पालन करो।

तफ़सीर:

अल्लाह के नबी शुऐब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को जब तौहीद और अच्छे आचरण की ओर बुलाया, तो उन्होंने झुठलाया और सच्चाई से मुँह मोड़ लिया। उनकी क़ौम ने न केवल शुऐब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया, बल्कि दरअसल उन्होंने अल्लाह के सभी रसूलों को झुठलाया, क्योंकि सभी नबी एक ही पैग़ाम लेकर आए थे।

इस आयत में शुऐब (अलैहिस्सलाम) अपनी क़ौम से कह रहे हैं कि "तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।" यानी अल्लाह के हुक्मों को मानो, उसकी मनाही से बचो, और जो रास्ता मैं तुम्हें दिखा रहा हूँ, उस पर चलो। यही उनकी नजात और भलाई का ज़रिया था।

अल्लाह से डरने का मतलब सिर्फ़ अज़ाब से डरना नहीं है, बल्कि उसकी मोहब्बत में उसकी नाराज़गी से बचना है। जब दिल में अल्लाह का खौफ़ होता है, तो इंसान गुनाहों से दूर रहता है और नेक कामों की तरफ़ रग़बत पैदा होती है।

और "मेरी आज्ञा का पालन करो" का मतलब है कि जो पैग़ाम मैं अल्लाह की तरफ़ से लाया हूँ, उसे क़बूल करो। क्योंकि नबी की इताअत दरअसल अल्लाह की इताअत है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हर ज़माने में नबियों का पैग़ाम यही रहा है — अल्लाह से डरो और उसके रसूल की पैरवी करो। यही दो चीज़ें इंसान की कामयाबी की कुंजी हैं। जो इन पर अमल करेगा, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में सुखी रहेगा।

आज भी हमारी भलाई इसी में है कि हम अल्लाह के हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में नफ़ाज़ करें और रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत को अपनाएँ। यही रास्ता हमें जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हमें तौफ़ीक़ दे कि हम उसकी इताअत करें और उसके नबी की पैरवी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। आमीन।



📜 आयत 177-181 — सूरा अश-शुआरा

177إِذْ قَالَ لَهُمْ شُعَيْبٌ أَلَا تَتَّقُونَ
जब शुएब ने उनसे कहा कि तुम (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
178إِنِّي لَكُمْ رَسُولٌ أَمِينٌ
मै तो बिला शुबाह तुम्हारा अमानदार हूँ
179فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
180وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मै तो तुमसे इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा) के ज़िम्मे है
181۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ
तुम (जब कोई चीज़ नाप कर दो तो) पूरा पैमाना दिया करो और नुक़सान (कम देने वाले) न बनो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
179आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 179

सूरा अश-शुआरा आयत 179 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो

सूरा आयत 179/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 177–181. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Saturday, October 3, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए