अश-शुआरा · 182/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَقِيمِ ۝١٨٢
Wa zinoo bilqistaasil mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और तुम (जब तौलो तो) ठीक तराज़ू से डन्डी सीधी रखकर तौलो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْقِسْطَاسِ: सीधा तराज़ू, न्याय का पैमाना।
  • الْمُسْتَقِيمِ: सीधा, सही, जिसमें कोई टेढ़ापन या धोखा न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को नसीहत करते हुए फ़रमाया कि जब तुम लोगों को तौलकर दो, तो सीधे और न्यायपूर्ण तराज़ू से तौलो। यानी तौल में पूरा-पूरा दो, कमी न करो, और न ही तराज़ू में कोई हेर-फेर करो। यह आदेश सिर्फ़ तौल तक सीमित नहीं है, बल्कि हर उस मामले में लागू होता है जहाँ इंसान दूसरों के हक़ से जुड़ा हो — चाहे वह नाप हो, तौल हो, या कोई और लेन-देन। न्याय और ईमानदारी हर मामले में अल्लाह को पसंद है, और यही इंसानी समाज की बुनियाद है।

जब कोई व्यक्ति तौल या नाप में कमी करता है, तो वह दूसरे का हक़ मारता है, और यह एक बड़ा गुनाह है। इसलिए अल्लाह के नबी ने साफ़ कहा कि सीधे पैमाने से तौलो, क्योंकि यही अल्लाह की रज़ा का ज़रिया है। यह आदेश दरअसल हर मुसलमान के लिए एक आईना है — हमें अपने हर काम में इंसाफ़ को सामने रखना चाहिए, चाहे दूसरा कमज़ोर हो या ताक़तवर।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि मामलात (लेन-देन) में भी पूरी ईमानदारी और न्याय का तक़ाज़ा करता है। जो व्यक्ति तौल में सच्चाई अपनाता है, अल्लाह उसे बरकत देता है और उसके रिज़्क़ में खैरियत पैदा करता है। याद रखिए, दुनिया में कमाई की बरकत उसी में है जो हलाल और सच्चाई पर आधारित हो। अल्लाह तआला हम सबको न्याय और ईमानदारी पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 180-184 — सूरा अश-शुआरा

180وَمَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۖ إِنْ أَجْرِيَ إِلَّا عَلَىٰ رَبِّ الْعَالَمِينَ
मै तो तुमसे इस (तबलीग़े रिसालत) पर कुछ मज़दूरी भी नहीं माँगता मेरी मज़दूरी तो बस सारी ख़ुदाई के पालने वाले (ख़ुदा) के ज़िम्मे है
181۞ أَوْفُوا الْكَيْلَ وَلَا تَكُونُوا مِنَ الْمُخْسِرِينَ
तुम (जब कोई चीज़ नाप कर दो तो) पूरा पैमाना दिया करो और नुक़सान (कम देने वाले) न बनो
182وَزِنُوا بِالْقِسْطَاسِ الْمُسْتَقِيمِ
और तुम (जब तौलो तो) ठीक तराज़ू से डन्डी सीधी रखकर तौलो
183وَلَا تَبْخَسُوا النَّاسَ أَشْيَاءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا فِي الْأَرْضِ مُفْسِدِينَ
और लोगों को उनकी चीज़े (जो ख़रीदें) कम न ज्यादा करो और ज़मीन से फसाद न फैलाते फिरो
184وَاتَّقُوا الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالْجِبِلَّةَ الْأَوَّلِينَ
और उस (ख़ुदा) से डरो जिसने तुम्हे और अगली ख़िलकत को पैदा किया
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
182आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 182

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Monday, September 28, 2026

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