अश-शुआरा · 174/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ ۝١٧٤
Inna fee zaalika la Aayah; wa maa kaana aksaruhum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे

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अनुवाद — Tafsir

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है:

"इसमें बड़ी निशानी है, और उनमें अधिकतर लोग ईमान लाने वाले नहीं थे।"

शब्दों के अर्थ:

  • آيَةً (निशानी): यानी सबक़ और इबरत लेने की बड़ी दलील और निशानी।
  • أَكْثَرُهُم (उनमें अधिकतर): यानी क़ौम-ए-लूत के अधिकांश लोग।
  • مُؤْمِنِينَ (ईमान लाने वाले): यानी अल्लाह और उसके रसूल पर ईमान रखने वाले।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला हमें क़ौम-ए-लूत के उस भयानक अंजाम की याद दिलाता है जो उन पर उनके बुरे कर्मों की वजह से आया। यह एक बहुत बड़ी निशानी और सबक़ है उन लोगों के लिए जो सोच-समझकर देखते हैं। जब अल्लाह का अज़ाब आया, तो उस क़ौम में से जो लोग ईमान ला चुके थे, वे बचा लिए गए, लेकिन उनमें से अधिकतर लोग ईमान नहीं लाए थे। यह बात बताती है कि हिदायत पाना अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर है, और जो लोग सच्चाई को देखकर भी उसे नहीं मानते, वे अपना अंजाम ख़ुद बिगाड़ लेते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर निशानी, हर ताक़त और हर अज़ाब जो पहले की क़ौमों पर आया, वह हमारे लिए सबक़ है। हमें उन लोगों की तरह नहीं बनना चाहिए जो नबियों की दावत को झुठलाते रहे और अपनी ज़िद पर अड़े रहे। अल्लाह रहम करने वाला है, लेकिन वह इंसाफ़ करने वाला भी है। जो लोग उसकी नाफ़रमानी में हद से गुज़र जाते हैं, उन पर अज़ाब आकर रहता है।

इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि ईमान की दौलत सबसे बड़ी दौलत है। क़ौम-ए-लूत में से जो लोग ईमान लाए, वे अज़ाब से बच गए, भले ही वे संख्या में कम थे। यह हमें बताता है कि सच्चाई पर क़ायम रहना और अल्लाह का फ़रमाँबरदार बनना ही कामयाबी की कुंजी है, चाहे दुनिया में हमारी तादाद कितनी ही कम क्यों न हो।

अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं। आमीन।



📜 आयत 172-176 — अश-शुआरा

172ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला
173وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था
174إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
175وَإِنَّ رَبَّكَ لَهُوَ الْعَزِيزُ الرَّحِيمُ
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनन सब पर ग़ालिब (और) बड़ा मेहरबान है
176كَذَّبَ أَصْحَابُ الْأَيْكَةِ الْمُرْسَلِينَ
इसी तरह जंगल के रहने वालों ने (मेरे) पैग़म्बरों को झुठलाया
अश-शुआराकुरान सूची
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174आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 174

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Tuesday, August 18, 2026

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