अश-शुआरा · 170/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ ۝١٧٠
Fanajjainaahu wa ahlahooo ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَنَجَّيْنَاهُ: हमने उसे (नूह अलैहिस्सलाम को) बचा लिया।
  • وَأَهْلَهُ: और उसके घर वालों को।
  • أَجْمَعِينَ: सबको एक साथ, बिना किसी को छोड़े।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की दुआ क़बूल हुई और उनकी क़ौम पर अल्लाह का अज़ाब आया, तो अल्लाह तआला ने अपने नबी को उस विनाशकारी तूफ़ान और अज़ाब से महफ़ूज़ रखा। यह अल्लाह की उस रहमत का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। अल्लाह ने हज़रत नूह को और उनके पूरे घराने को — यानी उनके परिवार के सभी सदस्यों को जो ईमान लाए थे — सुरक्षित बचा लिया। यहाँ "अहल" से मुराद वे लोग हैं जो उनके साथ ईमान लाए थे और कश्ती में सवार हुए थे। हालाँकि, उनकी पत्नी जो ईमान नहीं लाई थी, वह इस रहमत से महरूम रही और अज़ाब में रह गई। यह अल्लाह का न्याय है कि नेकी और बदी का फल हर व्यक्ति को उसके अपने कर्मों के अनुसार मिलता है — नाता-रिश्ता किसी को अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकता।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने मोमिन बंदों की हिफ़ाज़त करता है, चाहे हालात कितने भी भयानक क्यों न हों। जब इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है और उसकी राह पर चलता है, तो अल्लाह उसे हर मुसीबत से निकालने का रास्ता बनाता है। यही वजह है कि हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में ईमान और अच्छे कर्मों को अपनाएँ, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन्हीं के लिए है जो उसकी ओर रुजू करते हैं। यह क़िस्सा हमारे लिए एक सबक़ है कि दुनिया की कोई ताक़त, कोई रिश्ता या कोई सामाजिक हैसियत अल्लाह के फ़ैसले के आगे काम नहीं आती — सिर्फ़ ईमान और नेक अमल ही नजात का ज़रिया है। आइए, हम भी हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की तरह अल्लाह की रहमत के तलबगार बनें और उसकी पनाह में आएँ, ताकि हम भी उसके हिफ़ाज़त के दामन में जगह पा सकें।



📜 आयत 168-172 — सूरा अश-शुआरा

168قَالَ إِنِّي لِعَمَلِكُم مِّنَ الْقَالِينَ
लूत ने कहा मै यक़ीनन तुम्हारी (नाशाइसता) हरकत से बेज़ार हूँ
169رَبِّ نَجِّنِي وَأَهْلِي مِمَّا يَعْمَلُونَ
(और दुआ की) परवरदिगार जो कुछ ये लोग करते है उससे मुझे और मेरे लड़कों को नजात दे
170فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ
तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी
171إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयी
172ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
170आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 170

सूरा अश-शुआरा आयत 170 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी

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Saturday, October 3, 2026

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