Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अजूज़ (عَجُوزًا): अत्यंत वृद्ध महिला, यहाँ आशय नबी लूत अलैहिस्सलाम की पत्नी से है।
- ग़ाबिरीन (الْغَابِرِينَ): पीछे रह जाने वाले, अज़ाब में बाक़ी रहने वाले, हलाक होने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला नबी लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम पर आए अज़ाब का ज़िक्र कर रहे हैं। जब अल्लाह का फ़रमान आया कि उस ज़ालिम क़ौम पर सुबह के वक़्त अज़ाब नाज़िल होगा, तो अल्लाह ने अपने नबी लूत अलैहिस्सलाम को और उनके ईमानदार अहल-ए-ख़ाना को उस हलाकत से बचा लिया। मगर एक बूढ़ी औरत — जो उनकी बीवी थी — उन लोगों में शामिल नहीं थी जो बचाए गए। वह ईमान नहीं लाई थी, बल्कि अपनी क़ौम के कुफ़्र और बुराइयों पर क़ायम रही, इसलिए वह उन्हीं लोगों में से थी जो अज़ाब में पीछे रह गए और हलाक हुए। यह अल्लाह की सुन्नत है कि नबी की बीवी होना किसी को नजात नहीं दिला सकता जब तक वह ख़ुद ईमान न लाए। नूह अलैहिस्सलाम की बीवी और लूत अलैहिस्सलाम की बीवी दोनों काफ़िर थीं और दोनों हलाक हुईं, जैसा कि क़ुरआन में सूरह तहरीम में बयान किया गया है। यह एक बड़ा सबक़ है कि रिश्ते और नस्ब नजात का ज़रिया नहीं बनते, बल्कि ईमान और अमल-ए-सालिह ही नजात का ज़रिया हैं।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह का दीन बिल्कुल अदल और इंसाफ़ पर क़ायम है। वहाँ किसी की सिफ़ारिश या रिश्तेदारी काम नहीं आती। अल्लाह तआला ने अपने नबी की बीवी को भी उसके कुफ़्र की वजह से अज़ाब में छोड़ दिया, ताकि लोगों को मालूम हो जाए कि अल्लाह के यहाँ हक़ और बातिल का फ़ैसला सिर्फ़ ईमान और अमल पर होता है। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें, अपने अमल को दुरुस्त करें, और कभी यह न समझें कि किसी नेक इंसान से हमारा रिश्ता होने की वजह से हम बच जाएँगे। अल्लाह से डरें, उसकी इबादत करें, और अपनी ज़िंदगी को क़ुरआन और सुन्नत के मुताबिक़ ढालें। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम के अज़ाब से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह तआला हम सबको सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 169-173 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 171
सूरा अश-शुआरा आयत 171 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयीसूरा आयत 171/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 169–173. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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