अश-शुआरा · 172/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ ۝١٧٢
Summa dammarnal aa khareen
📖 हिंदी अर्थ
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • दम्मरना (دَمَّرْنَا): हमने विनष्ट कर दिया, तबाह कर दिया, सत्यानाश कर दिया।
  • आख़िरीन (الْآخَرِينَ): दूसरे लोग, यानी वे जो हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की क़ौम में से बचे हुए थे और ईमान नहीं लाए थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) और उनके ईमानवाले साथी उस बस्ती (सदूम) से निकल गए, तो अल्लाह तआला ने उन लोगों को, जो पीछे रह गए थे और अपनी शरारतों, बुराइयों और नाफ़रमानी पर अड़े हुए थे, सख्त से सख्त अज़ाब में गिरफ्तार किया। उन पर आसमान से पत्थरों की बारिश की गई, जिसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया। यह विनाश इतना भयानक था कि उनकी बस्ती उलट दी गई और उन पर मिट्टी के पक्के पत्थर बरसाए गए। यह अज़ाब उन लोगों के लिए था जिन्होंने अल्लाह के रसूल को झुठलाया, हद से गुज़र गए और अल्लाह की नाफ़रमानी में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह घटना हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला की पकड़ बहुत सख्त है। वह अपने नबियों की मदद ज़रूर करता है और ज़ालिमों को कभी नहीं बख्शता। जो लोग अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना करते हैं और अपनी बुराइयों पर अड़े रहते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। यह क़ुरआन की वह शिक्षा है जो हमें डराती भी है और सीख देती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की राह पर चलें, उसके रसूलों की पैरवी करें और बुराइयों से बचें। अल्लाह तआला रहम करने वाला है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। हमें चाहिए कि हम उसकी रहमत के भूखे रहें और उसके अज़ाब से डरते हुए नेक काम करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 170-174 — अश-शुआरा

170فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ أَجْمَعِينَ
तो हमने उनको और उनके सब लड़कों को नजात दी
171إِلَّا عَجُوزًا فِي الْغَابِرِينَ
मगर (लूत की) बूढ़ी औरत कि वह पीछे रह गयी
172ثُمَّ دَمَّرْنَا الْآخَرِينَ
(और हलाक हो गयी) फिर हमने उन लोगों को हलाक कर डाला
173وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِم مَّطَرًا ۖ فَسَاءَ مَطَرُ الْمُنذَرِينَ
और उन पर हमने (पत्थरों का) मेंह बरसाया तो जिन लोगों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराया गया था
174إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً ۖ وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ
उन पर क्या बड़ी बारिश हुई इस वाक़िये में भी एक बड़ी इबरत है और इनमें से बहुतेरे ईमान लाने वाले ही न थे
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अनुवाद — अश-शुआरा 172

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Tuesday, August 18, 2026

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