Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذُو عُسْرَةٍ (ज़ू उसरतिन): जो कर्ज़दार तंगी और मुश्किल में हो, उसके पास कर्ज़ अदा करने की कूव्वत न हो।
- فَنَظِرَةٌ (फ़नज़िरतुन): मोहलत देना, ढील देना, इंतज़ार करना।
- مَيْسَرَةٍ (मैसरतिन): आसानी, खुशहाली, वह वक़्त जब कर्ज़दार के पास पैसा आ जाए।
- تَصَدَّقُوا (तसद्दक़ू): ख़ैरात करना, यानी कर्ज़ माफ़ कर देना या उसमें से कुछ छोड़ देना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में कर्ज़ के मामले में बड़ी ही प्यारी और रहमदिली भरी हिदायत दे रहा है। जब कोई कर्ज़दार तंगी और मुश्किल में हो, उसके पास अदा करने की ताक़त न हो, तो उस पर ज़ुल्म न करो, उसे सख़्ती से न दबाओ, बल्कि उसे मोहलत दो। उस वक़्त तक इंतज़ार करो जब तक अल्लाह उसे आसानी न दे और वह कर्ज़ अदा करने के क़ाबिल न हो जाए। यह एक इंसानियत और रहम का तक़ाज़ा है।
फिर अल्लाह तआला इससे भी बेहतर बात बताता है—अगर तुम कर्ज़दार की मुश्किल देखकर उसका पूरा कर्ज़ माफ़ कर दो या उसमें से कुछ हिस्सा छोड़ दो, तो यह तुम्हारे लिए दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर है। यह सिर्फ़ कर्ज़दार पर एहसान नहीं, बल्कि तुम्हारे अपने लिए अल्लाह के यहाँ बड़ा अज्र और सवाब है। अल्लाह फ़रमाता है: "अगर तुम जानते हो" यानी अगर तुम्हें इसकी हक़ीक़त का इल्म हो कि इस काम में तुम्हारी भलाई है, तो तुम ज़रूर ऐसा करो। जिसे यह बात समझ आ गई और उसने अमल नहीं किया, वह उस शख्स की तरह है जो जानता ही नहीं।
दावती पहलू (इंसानियत और ईमान की तरबियत):
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि इंसानियत, हमदर्दी और रहम का दीन है। कर्ज़दार जब मुश्किल में हो तो उसे वक़्त देना और उस पर आसानी करना अल्लाह को बहुत पसंद है। याद रखो! जो बंदा दुनिया में किसी मुसीबतज़दा पर रहम करता है, अल्लाह उस पर क़यामत के दिन रहम फ़रमाता है। अगर तुम कर्ज़ माफ़ कर दो तो अल्लाह तुम्हारे गुनाह माफ़ करेगा और तुम्हें ऐसा इनाम देगा जिसका अंदाज़ा नहीं। यही असली कामयाबी है—दुनिया में दिल की सफ़ाई और आख़िरत में जन्नत की दौलत। अल्लाह हम सबको इस हुस्ने-अख़लाक़ पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 278-282 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 280
सूरा अल-बकरा आयत 280 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर कोई तंगदस्त तुम्हारा (क़र्ज़दार हो) तो उसे ख़ुशहाली…सूरा आयत 280/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 278–282. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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