Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاتَّقُوا: डरो, बचो
- يَوْمًا تُرْجَعُونَ فِيهِ إِلَى اللَّهِ: उस दिन से जिसमें तुम अल्लाह की ओर लौटाए जाओगे
- ثُمَّ تُوَفَّىٰ كُلُّ نَفْسٍ مَّا كَسَبَتْ: फिर हर प्राणी को उसकी कमाई का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा
- وَهُمْ لَا يُظْلَمُونَ: और उन पर कोई ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को एक बहुत ही अहम दिन से डरा रहा है — वह दिन जिसका आना तय है, जिस दिन हर इंसान को अल्लाह की तरफ लौटना है। यह क़यामत का दिन है, जब सारे लोग अपनी कब्रों से उठकर अल्लाह के सामने हाज़िर होंगे। वह दिन ऐसा होगा जब कोई भी अपने अमल से भाग नहीं सकेगा, न कोई सिफ़ारिश करने वाला होगा, न कोई रिश्तेदारी काम आएगी, बल्कि हर शख्स अपने किए गए अमल के साथ अकेला खड़ा होगा।
इसके बाद अल्लाह फरमाता है कि उस दिन हर नफ्स को उसकी कमाई का पूरा-पूरा बदला दिया जाएगा — अगर उसने नेकी की है तो उसे पूरा सवाब मिलेगा, और अगर उसने गुनाह किया है तो उसे उसकी सज़ा मिलेगी। और सबसे बड़ी बात यह कि वहाँ किसी पर कोई ज़ुल्म नहीं होगा। अल्लाह तआला किसी की नेकी को कम नहीं करेगा, न किसी के गुनाह पर अतिरिक्त अज़ाब देगा। हर इंसान को बिल्कुल उसके अमल के हिसाब से ही जज़ा दी जाएगी।
यह आयत सूरह अल-बक़रा की आख़िरी आयत है, और यह रिबा (सूद) के हुक्म के बाद आई है। इससे इशारा मिलता है कि जिस तरह रिबा से बचना ज़रूरी है, उसी तरह हर उस चीज़ से बचना ज़रूरी है जो अल्लाह ने हराम की है। यह आयत मोमिन को याद दिलाती है कि उसकी ज़िंदगी का हर पल, हर काम, हर कमाई — सब कुछ उस दिन सामने आएगा।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें एक ऐसे दिन की याद दिलाती है जो आना ही है। आज हम जो भी कर रहे हैं — चाहे वह नेकी हो या गुनाह — वह सब उस दिन हमारे सामने पेश किया जाएगा। अल्लाह तआला ने यहाँ यह बताकर हम पर बड़ा एहसान किया है कि उस दिन कोई ज़ुल्म नहीं होगा। यानी अल्लाह की रहमत और अद्ल का यह नमूना है कि वह नेकी का बदला कई गुना बढ़ाकर देता है, और गुनाह का बदला सिर्फ उतना ही देता है जितना उसका हक़ है।
तो आओ, हम इस आयत से सबक लें कि आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, हराम कमाई से बचें, नमाज़ क़ायम करें, ज़कात दें, और अच्छे काम करें। क्योंकि वह दिन बहुत करीब है — हर साँस के साथ हम उस दिन की तरफ बढ़ रहे हैं। अल्लाह हम सबको उस दिन की फिक्र करने वाला बनाए और हमारे अमल को नेक बनाए। आमीन।
📜 आयत 279-283 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 281
सूरा अल-बकरा आयत 281 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उस दिन से डरो जिस दिन तुम सब के…सूरा आयत 281/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 279–283. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


