Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ताबूत: वह संदूक जिसमें तौरात रखी जाती थी।
- सकीनah: मन की शांति, तसल्ली और इत्मिनान।
- बक़ियyah: बचा हुआ हिस्सा, कुछ अवशेष।
- आल-ए-मूसा व आल-ए-हारून: मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के परिवार या उनसे संबंधित चीज़ें।
तफ़सीर:
नबी (शमूएल अलैहिस्सलाम) ने बनी इसराईल से कहा: तालूत के बादशाह बनने की निशानी यह है कि तुम्हारे पास वह ताबूत (संदूक) वापस आएगा, जिसे तुम्हारे दुश्मनों ने तुमसे छीन लिया था। यह वही संदूक है जिसमें तौरात रखी जाती थी और जिसे बनी इसराईल बड़ी अज़ीमत (सम्मान) की नज़र से देखते थे। उस ताबूत में तुम्हारे रब की तरफ से सकीनah (दिल का इत्मिनान और शांति) होगी, जो तुम्हारे दिलों को मज़बूती देगी और तुम्हें सुकून बख़्शेगी। साथ ही उसमें मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के परिवार से बची हुई चीज़ें होंगी, जैसे मूसा की लाठी और तौरात की कुछ तख्तियाँ। यह ताबूत फ़रिश्ते उठाकर लाएँगे और तुम्हारे सामने रख देंगे।
यह एक बहुत बड़ी निशानी थी, क्योंकि यह ताबूत दुश्मनों के कब्ज़े में था और उसका वापस आना सिर्फ अल्लाह ही की क़ुदरत से मुमकिन था। जब बनी इसराईल ने यह मोजिज़ा देखा, तो उन्हें यक़ीन हो गया कि तालूत वाकई अल्लाह की तरफ से चुना हुआ बादशाह है। यह निशानी उनके ईमान की परीक्षा थी — जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखते थे, उनके लिए यह एक स्पष्ट सबूत था।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों की मदद करता है और उनके लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका अंदाज़ा नहीं होता। जब अल्लाह किसी काम का फैसला करता है, तो उसकी निशानियाँ साफ़ सामने आ जाती हैं। हमें भी अपने जीवन में अल्लाह के फैसलों पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी निशानियों को पहचानना चाहिए। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, अल्लाह उनके दिलों में सकीनah (सुकून) डालता है और उन्हें ऐसी मदद देता है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के वादे सच्चे हैं और उसकी मदद ज़रूर आती है, बशर्ते हम सच्चे मोमिन हों।
📜 आयत 246-250 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 248
सूरा अल-बकरा आयत 248 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस…सूरा आयत 248/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 246–250. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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