अल-बकरा · 248/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ آيَةَ مُلْكِهِ أَن يَأْتِيَكُمُ التَّابُوتُ فِيهِ سَكِينَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَبَقِيَّةٌ مِّمَّا تَرَكَ آلُ مُوسَىٰ وَآلُ هَارُونَ تَحْمِلُهُ الْمَلَائِكَةُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۝٢٤٨
Wa qaala lahum Nabiyyuhum inna Aayata mulkiheee ai yaatiyakumut Taabootu feei sakeenatummir Rabbikum wa baqiyyatummimmaa taraka Aalu Moosa wa Aalu Haaroona tahmiluhul malaaa`ikah; inna fee zaalika la Aayatal lakum in kuntum mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मुनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फरिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ताबूत: वह संदूक जिसमें तौरात रखी जाती थी।
  • सकीनah: मन की शांति, तसल्ली और इत्मिनान।
  • बक़ियyah: बचा हुआ हिस्सा, कुछ अवशेष।
  • आल-ए-मूसा व आल-ए-हारून: मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के परिवार या उनसे संबंधित चीज़ें।

तफ़सीर:

नबी (शमूएल अलैहिस्सलाम) ने बनी इसराईल से कहा: तालूत के बादशाह बनने की निशानी यह है कि तुम्हारे पास वह ताबूत (संदूक) वापस आएगा, जिसे तुम्हारे दुश्मनों ने तुमसे छीन लिया था। यह वही संदूक है जिसमें तौरात रखी जाती थी और जिसे बनी इसराईल बड़ी अज़ीमत (सम्मान) की नज़र से देखते थे। उस ताबूत में तुम्हारे रब की तरफ से सकीनah (दिल का इत्मिनान और शांति) होगी, जो तुम्हारे दिलों को मज़बूती देगी और तुम्हें सुकून बख़्शेगी। साथ ही उसमें मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) के परिवार से बची हुई चीज़ें होंगी, जैसे मूसा की लाठी और तौरात की कुछ तख्तियाँ। यह ताबूत फ़रिश्ते उठाकर लाएँगे और तुम्हारे सामने रख देंगे।

यह एक बहुत बड़ी निशानी थी, क्योंकि यह ताबूत दुश्मनों के कब्ज़े में था और उसका वापस आना सिर्फ अल्लाह ही की क़ुदरत से मुमकिन था। जब बनी इसराईल ने यह मोजिज़ा देखा, तो उन्हें यक़ीन हो गया कि तालूत वाकई अल्लाह की तरफ से चुना हुआ बादशाह है। यह निशानी उनके ईमान की परीक्षा थी — जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान रखते थे, उनके लिए यह एक स्पष्ट सबूत था।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों की मदद करता है और उनके लिए ऐसे रास्ते खोलता है जिनका अंदाज़ा नहीं होता। जब अल्लाह किसी काम का फैसला करता है, तो उसकी निशानियाँ साफ़ सामने आ जाती हैं। हमें भी अपने जीवन में अल्लाह के फैसलों पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी निशानियों को पहचानना चाहिए। जो लोग सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, अल्लाह उनके दिलों में सकीनah (सुकून) डालता है और उन्हें ऐसी मदद देता है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के वादे सच्चे हैं और उसकी मदद ज़रूर आती है, बशर्ते हम सच्चे मोमिन हों।



📜 आयत 246-250 — सूरा अल-बकरा

246أَلَمْ تَرَ إِلَى الْمَلَإِ مِن بَنِي إِسْرَائِيلَ مِن بَعْدِ مُوسَىٰ إِذْ قَالُوا لِنَبِيٍّ لَّهُمُ ابْعَثْ لَنَا مَلِكًا نُّقَاتِلْ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ۖ قَالَ هَلْ عَسَيْتُمْ إِن كُتِبَ عَلَيْكُمُ الْقِتَالُ أَلَّا تُقَاتِلُوا ۖ قَالُوا وَمَا لَنَا أَلَّا نُقَاتِلَ فِي سَبِيلِ اللَّهِ وَقَدْ أُخْرِجْنَا مِن دِيَارِنَا وَأَبْنَائِنَا ۖ فَلَمَّا كُتِبَ عَلَيْهِمُ الْقِتَالُ تَوَلَّوْا إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِالظَّالِمِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुमने मूसा के बाद बनी इसराइल के सरदारों की हालत पर नज़र नही की जब उन्होंने अपने नबी (शमूयेल) से कहा कि हमारे वास्ते एक बादशाह मुक़र्रर कीजिए ताकि हम राहे ख़ुदा में जिहाद करें (पैग़म्बर ने) फ़रमाया कहीं ऐसा तो न हो कि जब तुम पर जिहाद वाजिब किया जाए तो तुम न लड़ो कहने लगे जब हम अपने घरों और अपने बाल बच्चों से निकाले जा चुके तो फिर हमे कौन सा उज़्र बाक़ी है कि हम ख़ुदा की राह में जिहाद न करें फिर जब उन पर जिहाद वाजिब किया गया तो उनमें से चन्द आदमियों के सिवा सब के सब ने लड़ने से मुँह फेरा और ख़ुदा तो ज़ालिमों को खूब जानता है
247وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ اللَّهَ قَدْ بَعَثَ لَكُمْ طَالُوتَ مَلِكًا ۚ قَالُوا أَنَّىٰ يَكُونُ لَهُ الْمُلْكُ عَلَيْنَا وَنَحْنُ أَحَقُّ بِالْمُلْكِ مِنْهُ وَلَمْ يُؤْتَ سَعَةً مِّنَ الْمَالِ ۚ قَالَ إِنَّ اللَّهَ اصْطَفَاهُ عَلَيْكُمْ وَزَادَهُ بَسْطَةً فِي الْعِلْمِ وَالْجِسْمِ ۖ وَاللَّهُ يُؤْتِي مُلْكَهُ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ
और उनके नबी ने उनसे कहा कि बेशक ख़ुदा ने तुम्हारी दरख्वास्त के (मुताबिक़ तालूत को तुम्हारा बादशाह मुक़र्रर किया (तब) कहने लगे उस की हुकूमत हम पर क्यों कर हो सकती है हालाकि सल्तनत के हक़दार उससे ज्यादा तो हम हैं क्योंकि उसे तो माल के एतबार से भी फ़ारगुल बाली (ख़ुशहाली) तक नसीब नहीं (नबी ने) कहा ख़ुदा ने उसे तुम पर फज़ीलत दी है और माल में न सही मगर इल्म और जिस्म का फैलाव तो उस का ख़ुदा ने ज्यादा फरमाया हे और ख़ुदा अपना मुल्क जिसे चाहें दे और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और वाक़िफ़कार है
248وَقَالَ لَهُمْ نَبِيُّهُمْ إِنَّ آيَةَ مُلْكِهِ أَن يَأْتِيَكُمُ التَّابُوتُ فِيهِ سَكِينَةٌ مِّن رَّبِّكُمْ وَبَقِيَّةٌ مِّمَّا تَرَكَ آلُ مُوسَىٰ وَآلُ هَارُونَ تَحْمِلُهُ الْمَلَائِكَةُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَةً لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
और उन के नबी ने उनसे ये भी कहा इस के (मुनाजानिब अल्लाह) बादशाह होने की ये पहचान है कि तुम्हारे पास वह सन्दूक़ आ जाएगा जिसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से तसकीन दे चीजें और उन तब्बुरक़ात से बचा खुचा होगा जो मूसा और हारुन की औलाद यादगार छोड़ गयी है और उस सन्दूक को फरिश्ते उठाए होगें अगर तुम ईमान रखते हो तो बेशक उसमें तुम्हारे वास्ते पूरी निशानी है
249فَلَمَّا فَصَلَ طَالُوتُ بِالْجُنُودِ قَالَ إِنَّ اللَّهَ مُبْتَلِيكُم بِنَهَرٍ فَمَن شَرِبَ مِنْهُ فَلَيْسَ مِنِّي وَمَن لَّمْ يَطْعَمْهُ فَإِنَّهُ مِنِّي إِلَّا مَنِ اغْتَرَفَ غُرْفَةً بِيَدِهِ ۚ فَشَرِبُوا مِنْهُ إِلَّا قَلِيلًا مِّنْهُمْ ۚ فَلَمَّا جَاوَزَهُ هُوَ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ قَالُوا لَا طَاقَةَ لَنَا الْيَوْمَ بِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ ۚ قَالَ الَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَاقُو اللَّهِ كَم مِّن فِئَةٍ قَلِيلَةٍ غَلَبَتْ فِئَةً كَثِيرَةً بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ مَعَ الصَّابِرِينَ
फिर जब तालूत लशकर समैत (शहर ऐलिया से) रवाना हुआ तो अपने साथियों से कहा देखो आगे एक नहर मिलेगी इस से यक़ीनन ख़ुदा तुम्हारे सब्र की आज़माइश करेगा पस जो शख्स उस का पानी पीयेगा मुझे (कुछ वास्ता) नही रखता और जो उस को नही चखेगा वह बेशक मुझ से होगा मगर हाँ जो अपने हाथ से एक (आधा चुल्लू भर के पी) ले तो कुछ हर्ज नही पस उन लोगों ने न माना और चन्द आदमियों के सिवा सब ने उस का पानी पिया ख़ैर जब तालूत और जो मोमिनीन उन के साथ थे नहर से पास हो गए तो (ख़ास मोमिनों के सिवा) सब के सब कहने लगे कि हम में तो आज भी जालूत और उसकी फौज से लड़ने की सकत नहीं मगर वह लोग जिनको यक़ीन है कि एक दिन ख़ुदा को मुँह दिखाना है बेधड़क बोल उठे कि ऐसा बहुत हुआ कि ख़ुदा के हुक्म से छोटी जमाअत बड़ी जमाअत पर ग़ालिब आ गयी है और ख़ुदा सब्र करने वालों का साथी है
250وَلَمَّا بَرَزُوا لِجَالُوتَ وَجُنُودِهِ قَالُوا رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ
(ग़रज़) जब ये लोग जालूत और उसकी फौज के मुक़ाबले को निकले तो दुआ की ऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
248आयत

अनुवाद — अल-बकरा 248

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Monday, September 28, 2026

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