अन-निसा · 13/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
تِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۚ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝١٣
Tilka hudoodul laah; wa mai yuti`il laaha wa Rasoolahoo yudkhilhu Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; wa zaalikal fawzul `azeem
📖 हिंदी अर्थ
यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं और ख़ुदा और रसूल की इताअत करे उसको ख़ुदा आख़ेरत में ऐसे (हर भरे) बाग़ों में पहुंचा देगा जिसके नीचे नहरें जारी होंगी और वह उनमें हमेशा (चैन से) रहेंगे और यही तो बड़ी कामयाबी है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حُدُودُ اللهِ: अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ, यानी उसके आदेश और निषेध जो उसने अपने बंदों के लिए निर्धारित किए हैं।
  • يُطِعِ اللهَ وَرَسُولَهُ: अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करे।
  • جَنَّاتٍ: ऐसे बाग जिनमें पेड़ और महल हों।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: जिनके नीचे से नहरें बहती हों।
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले।
  • الْفَوْزُ الْعَظِيمُ: बड़ी कामयाबी और सफलता।

तफसीर (व्याख्या):

ये अहकाम (आदेश) जो अनाथों, महिलाओं और विरासत के संबंध में बताए गए हैं, ये अल्लाह की निर्धारित की हुई सीमाएँ हैं। ये वे कानून हैं जिन्हें अल्लाह ने अपने बंदों के लिए निर्धारित किया है ताकि वे इन पर अमल करें। ये सीमाएँ इस बात की गवाह हैं कि ये सब कुछ उस अल्लाह की ओर से हैं जो सब कुछ जानने वाला और हर चीज़ में हिकमत (समझदारी) रखने वाला है।

इसके बाद अल्लाह तआला फरमाता है कि जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करेगा—यानी जो अल्लाह के आदेशों का पालन करे और उसकी मनाही से बचे—तो अल्लाह उसे ऐसे बागों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं। वे इन बागों में हमेशा रहेंगे, कभी नहीं मरेंगे और न ही वहाँ से निकाले जाएँगे। यही वह बड़ी कामयाबी है जिसके आगे दुनिया की कोई भी सफलता कोई मायने नहीं रखती। यह अल्लाह की ओर से मिलने वाला वह इनाम है जो किसी और इनाम से तुलना नहीं की जा सकती।


फ़ायदे (लाभ):

  1. अल्लाह के निर्धारित किए हुए कानूनों की पाबंदी ही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। जो इन सीमाओं का पालन करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई पाता है।
  2. अल्लाह की आज्ञा का पालन और रसूल (ﷺ) की पैरवी एक साथ जुड़ी हुई है। जो अल्लाह की इबादत करता है लेकिन रसूल (ﷺ) की सुन्नत को नहीं अपनाता, वह इस वादे से महरूम रहता है।
  3. जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं—कोई अंत नहीं, कोई कमी नहीं। यह बात मोमिन के दिल को सुकून देती है और उसे अमल पर मजबूत करती है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि असली फ़ौज़ (कामयाबी) दुनिया की दौलत या ओहदा हासिल करना नहीं है, बल्कि अल्लाह की रज़ा और जन्नत हासिल करना है। यही वह चीज़ है जिसके लिए हमें अपनी पूरी ज़िंदगी लगा देनी चाहिए।
  5. अल्लाह ने जो हदें (सीमाएँ) निर्धारित की हैं, वे हमारे लिए रहमत हैं। इन पर अमल करना हमारे लिए आसान बनाया गया है और इनमें हमारी भलाई छिपी है।
🎧 सुनें

📜 आयत 11-15 — अन-निसा

11يُوصِيكُمُ اللَّهُ فِي أَوْلَادِكُمْ ۖ لِلذَّكَرِ مِثْلُ حَظِّ الْأُنثَيَيْنِ ۚ فَإِن كُنَّ نِسَاءً فَوْقَ اثْنَتَيْنِ فَلَهُنَّ ثُلُثَا مَا تَرَكَ ۖ وَإِن كَانَتْ وَاحِدَةً فَلَهَا النِّصْفُ ۚ وَلِأَبَوَيْهِ لِكُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ مِمَّا تَرَكَ إِن كَانَ لَهُ وَلَدٌ ۚ فَإِن لَّمْ يَكُن لَّهُ وَلَدٌ وَوَرِثَهُ أَبَوَاهُ فَلِأُمِّهِ الثُّلُثُ ۚ فَإِن كَانَ لَهُ إِخْوَةٌ فَلِأُمِّهِ السُّدُسُ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصِي بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۗ آبَاؤُكُمْ وَأَبْنَاؤُكُمْ لَا تَدْرُونَ أَيُّهُمْ أَقْرَبُ لَكُمْ نَفْعًا ۚ فَرِيضَةً مِّنَ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ عَلِيمًا حَكِيمًا
(मुसलमानों) ख़ुदा तुम्हारी औलाद के हक़ में तुमसे वसीयत करता है कि लड़के का हिस्सा दो लड़कियों के बराबर है और अगर (मय्यत की) औलाद में सिर्फ लड़कियॉ ही हों (दो) या (दो) से ज्यादा तो उनका (मक़र्रर हिस्सा) कुल तर्के का दो तिहाई है और अगर एक लड़की हो तो उसका आधा है और मय्यत के बाप मॉ हर एक का अगर मय्यत की कोई औलाद मौजूद न हो तो माल मुस्तरद का में से मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) छटा हिस्सा है और अगर मय्यत के कोई औलाद न हो और उसके सिर्फ मॉ बाप ही वारिस हों तो मॉ का मुअय्यन (ख़ास चीज़ों में) एक तिहाई हिस्सा तय है और बाक़ी बाप का लेकिन अगर मय्यत के (हक़ीक़ी और सौतेले) भाई भी मौजूद हों तो (अगरचे उन्हें कुछ न मिले) उस वक्त मॉ का हिस्सा छठा ही होगा (और वह भी) मय्यत नें जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तालीम और (अदाए) क़र्ज़ के बाद तुम्हारे बाप हों या बेटे तुम तो यह नहीं जानते हों कि उसमें कौन तुम्हारी नाफ़रमानी में ज्यादा क़रीब है (फिर तुम क्या दख़ल दे सकते हो) हिस्सा तो सिर्फ ख़ुदा की तरफ़ से मुअय्यन होता है क्योंकि ख़ुदा तो ज़रूर हर चीज़ को जानता और तदबीर वाला है
12۞ وَلَكُمْ نِصْفُ مَا تَرَكَ أَزْوَاجُكُمْ إِن لَّمْ يَكُن لَّهُنَّ وَلَدٌ ۚ فَإِن كَانَ لَهُنَّ وَلَدٌ فَلَكُمُ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْنَ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصِينَ بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۚ وَلَهُنَّ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْتُمْ إِن لَّمْ يَكُن لَّكُمْ وَلَدٌ ۚ فَإِن كَانَ لَكُمْ وَلَدٌ فَلَهُنَّ الثُّمُنُ مِمَّا تَرَكْتُم ۚ مِّن بَعْدِ وَصِيَّةٍ تُوصُونَ بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۗ وَإِن كَانَ رَجُلٌ يُورَثُ كَلَالَةً أَوِ امْرَأَةٌ وَلَهُ أَخٌ أَوْ أُخْتٌ فَلِكُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ ۚ فَإِن كَانُوا أَكْثَرَ مِن ذَٰلِكَ فَهُمْ شُرَكَاءُ فِي الثُّلُثِ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصَىٰ بِهَا أَوْ دَيْنٍ غَيْرَ مُضَارٍّ ۚ وَصِيَّةً مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَلِيمٌ
और जो कुछ तुम्हारी बीवियां छोड़ कर (मर) जाए पस अगर उनके कोई औलाद न हो तो तुम्हारा आधा है और अगर उनके कोई औलाद हो तो जो कुछ वह तरका छोड़े उसमें से बाज़ चीज़ों में चौथाई तुम्हारा है (और वह भी) औरत ने जिसकी वसीयत की हो और (अदाए) क़र्ज़ के बाद अगर तुम्हारे कोई औलाद न हो तो तुम्हारे तरके में से तुम्हारी बीवियों का बाज़ चीज़ों में चौथाई है और अगर तुम्हारी कोई औलाद हो तो तुम्हारे तर्के में से उनका ख़ास चीज़ों में आठवॉ हिस्सा है (और वह भी) तुमने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज़ के बाद और अगर कोई मर्द या औरत अपनी मादरजिलों (ख्याली) भाई या बहन को वारिस छोड़े तो उनमें से हर एक का ख़ास चीजों में छठा हिस्सा है और अगर उससे ज्यादा हो तो सबके सब एक ख़ास तिहाई में शरीक़ रहेंगे और (ये सब) मय्यत ने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज क़े बाद मगर हॉ वह वसीयत (वारिसों को ख्वाह मख्वाह) नुक्सान पहुंचाने वाली न हो (तब) ये वसीयत ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा तो हर चीज़ का जानने वाला और बुर्दबार है
13تِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۚ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं और ख़ुदा और रसूल की इताअत करे उसको ख़ुदा आख़ेरत में ऐसे (हर भरे) बाग़ों में पहुंचा देगा जिसके नीचे नहरें जारी होंगी और वह उनमें हमेशा (चैन से) रहेंगे और यही तो बड़ी कामयाबी है
14وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُ يُدْخِلْهُ نَارًا خَالِدًا فِيهَا وَلَهُ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिस शख्स से ख़ुदा व रसूल की नाफ़रमानी की और उसकी हदों से गुज़र गया तो बस ख़ुदा उसको जहन्नुम में दाख़िल करेगा
15وَاللَّاتِي يَأْتِينَ الْفَاحِشَةَ مِن نِّسَائِكُمْ فَاسْتَشْهِدُوا عَلَيْهِنَّ أَرْبَعَةً مِّنكُمْ ۖ فَإِن شَهِدُوا فَأَمْسِكُوهُنَّ فِي الْبُيُوتِ حَتَّىٰ يَتَوَفَّاهُنَّ الْمَوْتُ أَوْ يَجْعَلَ اللَّهُ لَهُنَّ سَبِيلًا
और वह उसमें हमेशा अपना किया भुगतता रहेगा और उसके लिए बड़ी रूसवाई का अज़ाब है और तुम्हारी औरतों में से जो औरतें बदकारी करें तो उनकी बदकारी पर अपने लोगों में से चार गवाही लो और फिर अगर चारों गवाह उसकी तसदीक़ करें तो (उसकी सज़ा ये है कि) उनको घरों में बन्द रखो यहॉ तक कि मौत आ जाए या ख़ुदा उनकी कोई (दूसरी) राह निकाले
अन-निसाकुरान सूची
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अनुवाद — अन-निसा 13

सूरा अन-निसा आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं और ख़ुदा…

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Tuesday, August 18, 2026

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