अन-निसा · 14/176
अनुवाद उच्चारण — अन-निसा
وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُ يُدْخِلْهُ نَارًا خَالِدًا فِيهَا وَلَهُ عَذَابٌ مُّهِينٌ ۝١٤
Wa mai ya`sil laaha wa Rasoolahoo wa yata`adda hudoodahoo yudkhilhu Naaran khaalidan feehaa wa lahoo `azaabum muheen
📖 हिंदी अर्थ
और जिस शख्स से ख़ुदा व रसूल की नाफ़रमानी की और उसकी हदों से गुज़र गया तो बस ख़ुदा उसको जहन्नुम में दाख़िल करेगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعْصِ: अवज्ञा करना, आज्ञा का उल्लंघन करना।
  • يَتَعَدَّ: सीमा का उल्लंघन करना, आगे बढ़ जाना।
  • حُدُودَهُ: अल्लाह द्वारा निर्धारित की गई सीमाएँ (हुक्म, हलाल-हराम)।
  • خَالِدًا: हमेशा रहने वाला, स्थायी रूप से।
  • مُهِينٌ: अपमानित करने वाला, ज़लील करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जो व्यक्ति अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की अवज्ञा करता है, अर्थात् अल्लाह के आदेशों को नहीं मानता, उसके हुक्मों को बदलता है या उन पर अमल करना छोड़ देता है, और उनमें शक करता है, तथा अल्लाह द्वारा निर्धारित की गई सीमाओं (हलाल-हराम, फ़र्ज़ और हुक्म) का उल्लंघन करता है—तो अल्लाह उसे ऐसी आग (जहन्नम) में डालेगा जिसमें वह हमेशा रहेगा। उसके लिए ऐसा अपमानजनक और ज़लील करने वाला अज़ाब होगा जो उसे रुसवा कर देगा। यह अज़ाब उसके कुफ़्र और अवज्ञा का परिणाम है, क्योंकि उसने अल्लाह के दीन को ठुकराया और उसकी सीमाओं को तोड़ा।

फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की सीमाओं का पालन करना ही सच्ची सफलता है। जो इन सीमाओं की रक्षा करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है।
  2. यह आयत हमें अल्लाह के हुक्मों को बदलने या उनमें कमी-बेशी करने से सख़्त मना करती है। इस्लाम में हलाल-हराम का फ़ैसला सिर्फ़ अल्लाह और उसके रसूल का अधिकार है।
  3. अल्लाह का अज़ाब सिर्फ़ दर्दनाक ही नहीं, बल्कि अपमानजनक भी होगा। यह हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी इंसान को दुनिया में भी ज़लील करती है और आख़िरत में भी।
  4. यह आयत हमें अल्लाह के दीन पर पूरा भरोसा करने और उसकी हर बात को दिल से क़बूल करने की तरग़ीब देती है। जो शख़्स अल्लाह के हुक्मों को पूरे दिल से मानता है, वह जहन्नम के अज़ाब से बच जाता है और जन्नत की नेमतों का हक़दार बनता है।
  5. इस आयत में अल्लाह का डर दिलाने के साथ-साथ उसकी रहमत की ओर इशारा भी है—कि अल्लाह ने अपनी सीमाएँ साफ़ बयान कर दी हैं ताकि इंसान उन पर चलकर सुरक्षित रहे। यह अल्लाह की मेहरबानी है कि उसने हमें रास्ता दिखाया और गुमराही से बचाया।
🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अन-निसा

12۞ وَلَكُمْ نِصْفُ مَا تَرَكَ أَزْوَاجُكُمْ إِن لَّمْ يَكُن لَّهُنَّ وَلَدٌ ۚ فَإِن كَانَ لَهُنَّ وَلَدٌ فَلَكُمُ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْنَ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصِينَ بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۚ وَلَهُنَّ الرُّبُعُ مِمَّا تَرَكْتُمْ إِن لَّمْ يَكُن لَّكُمْ وَلَدٌ ۚ فَإِن كَانَ لَكُمْ وَلَدٌ فَلَهُنَّ الثُّمُنُ مِمَّا تَرَكْتُم ۚ مِّن بَعْدِ وَصِيَّةٍ تُوصُونَ بِهَا أَوْ دَيْنٍ ۗ وَإِن كَانَ رَجُلٌ يُورَثُ كَلَالَةً أَوِ امْرَأَةٌ وَلَهُ أَخٌ أَوْ أُخْتٌ فَلِكُلِّ وَاحِدٍ مِّنْهُمَا السُّدُسُ ۚ فَإِن كَانُوا أَكْثَرَ مِن ذَٰلِكَ فَهُمْ شُرَكَاءُ فِي الثُّلُثِ ۚ مِن بَعْدِ وَصِيَّةٍ يُوصَىٰ بِهَا أَوْ دَيْنٍ غَيْرَ مُضَارٍّ ۚ وَصِيَّةً مِّنَ اللَّهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَلِيمٌ
और जो कुछ तुम्हारी बीवियां छोड़ कर (मर) जाए पस अगर उनके कोई औलाद न हो तो तुम्हारा आधा है और अगर उनके कोई औलाद हो तो जो कुछ वह तरका छोड़े उसमें से बाज़ चीज़ों में चौथाई तुम्हारा है (और वह भी) औरत ने जिसकी वसीयत की हो और (अदाए) क़र्ज़ के बाद अगर तुम्हारे कोई औलाद न हो तो तुम्हारे तरके में से तुम्हारी बीवियों का बाज़ चीज़ों में चौथाई है और अगर तुम्हारी कोई औलाद हो तो तुम्हारे तर्के में से उनका ख़ास चीज़ों में आठवॉ हिस्सा है (और वह भी) तुमने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज़ के बाद और अगर कोई मर्द या औरत अपनी मादरजिलों (ख्याली) भाई या बहन को वारिस छोड़े तो उनमें से हर एक का ख़ास चीजों में छठा हिस्सा है और अगर उससे ज्यादा हो तो सबके सब एक ख़ास तिहाई में शरीक़ रहेंगे और (ये सब) मय्यत ने जिसके बारे में वसीयत की है उसकी तामील और (अदाए) क़र्ज क़े बाद मगर हॉ वह वसीयत (वारिसों को ख्वाह मख्वाह) नुक्सान पहुंचाने वाली न हो (तब) ये वसीयत ख़ुदा की तरफ़ से है और ख़ुदा तो हर चीज़ का जानने वाला और बुर्दबार है
13تِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۚ وَمَن يُطِعِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ يُدْخِلْهُ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
यह ख़ुदा की (मुक़र्रर की हुई) हदें हैं और ख़ुदा और रसूल की इताअत करे उसको ख़ुदा आख़ेरत में ऐसे (हर भरे) बाग़ों में पहुंचा देगा जिसके नीचे नहरें जारी होंगी और वह उनमें हमेशा (चैन से) रहेंगे और यही तो बड़ी कामयाबी है
14وَمَن يَعْصِ اللَّهَ وَرَسُولَهُ وَيَتَعَدَّ حُدُودَهُ يُدْخِلْهُ نَارًا خَالِدًا فِيهَا وَلَهُ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिस शख्स से ख़ुदा व रसूल की नाफ़रमानी की और उसकी हदों से गुज़र गया तो बस ख़ुदा उसको जहन्नुम में दाख़िल करेगा
15وَاللَّاتِي يَأْتِينَ الْفَاحِشَةَ مِن نِّسَائِكُمْ فَاسْتَشْهِدُوا عَلَيْهِنَّ أَرْبَعَةً مِّنكُمْ ۖ فَإِن شَهِدُوا فَأَمْسِكُوهُنَّ فِي الْبُيُوتِ حَتَّىٰ يَتَوَفَّاهُنَّ الْمَوْتُ أَوْ يَجْعَلَ اللَّهُ لَهُنَّ سَبِيلًا
और वह उसमें हमेशा अपना किया भुगतता रहेगा और उसके लिए बड़ी रूसवाई का अज़ाब है और तुम्हारी औरतों में से जो औरतें बदकारी करें तो उनकी बदकारी पर अपने लोगों में से चार गवाही लो और फिर अगर चारों गवाह उसकी तसदीक़ करें तो (उसकी सज़ा ये है कि) उनको घरों में बन्द रखो यहॉ तक कि मौत आ जाए या ख़ुदा उनकी कोई (दूसरी) राह निकाले
16وَاللَّذَانِ يَأْتِيَانِهَا مِنكُمْ فَآذُوهُمَا ۖ فَإِن تَابَا وَأَصْلَحَا فَأَعْرِضُوا عَنْهُمَا ۗ إِنَّ اللَّهَ كَانَ تَوَّابًا رَّحِيمًا
और तुम लोगों में से जिनसे बदकारी सरज़द हुई हो उनको मारो पीटो फिर अगर वह दोनों (अपनी हरकत से) तौबा करें और इस्लाह कर लें तो उनको छोड़ दो बेशक ख़ुदा बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अन-निसा 14

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Tuesday, August 18, 2026

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