अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْكِتَابِ: किताब, यहाँ अर्थ है कुरआन।
- الْمُبِينِ: स्पष्ट, खुला हुआ, जो हर बात को साफ़ और रोशन कर दे।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में क़ुरआन की अज़ीमुश्शान किताब की क़सम खाई है। यह वह किताब है जो अपने हर लफ़्ज़ और हर मायने में वाज़ेह और रौशन है। यह किताब ही वह रहनुमा है जो इंसान को अंधेरों से निकालकर हिदायत की रोशनी की तरफ ले जाती है, और उसे वह रास्ता दिखाती है जो उसकी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी का ज़ामिन है।
यह क़ुरआन अपने अंदर वह सब कुछ रखता है जो इंसान को अपने रब की पहचान, अपनी ज़िंदगी के मक़सद और अच्छे और बुरे के फ़रक़ को समझने के लिए चाहिए। यह किताब अल्लाह की तरफ से नाज़िल की गई आख़िरी किताब है, जो अपने से पहले की सभी आसमानी किताबों की तस्दीक़ करती है और उनके मुंदरजात की हिफ़ाज़त भी करती है।
इस क़सम का मक़सद यह है कि अल्लाह तआला इस किताब की अज़मत और उसके मुक़द्दस मक़ाम को बयान करना चाहता है, ताकि इंसान इसकी तरफ रुजू करे, इस पर अमल करे और इसके ज़रिए अपनी ज़िंदगी को संवारे। यह किताब किसी इंसान का कलाम नहीं, बल्कि अल्लाह का कलाम है, जिसमें कोई कमी नहीं, कोई झोल नहीं और कोई बातिल नहीं। यह हक़ और बातिल के दरमियान फ़ैसला करने वाली है, और जो कोई इसको थाम ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि समझने, उस पर ग़ौर करने और उस पर अमल करने के लिए पढ़ें। यह किताब हमारी ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारी रहनुमाई कर सकती है, बशर्ते हम इसे अपना रहनुमा बनाएं। जो इसे अपनाएगा, वह दुनिया में इज़्ज़त पाएगा और आख़िरत में कामयाबी हासिल करेगा। अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 1-4 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 2
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : रौशन किताब (क़ुरान) की क़समसूरा आयत 2/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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