अज़-ज़ुखरुफ · 1/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
حم ۝١
Haa-Meeem
📖 हिंदी अर्थ
हा मीम

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

इस आयत में "حم" (हा-मीम) एक हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) है, जो कुरआन की कई सूरतों की शुरुआत में आते हैं। ये अक्षर अपने आप में एक अर्थ रखते हैं, जिनका सही ज्ञान केवल अल्लाह तआला को है। ये अक्षर कुरआन की अज़मत और उसके मु'जिज़ा (चमत्कार) की ओर इशारा करते हैं।

तफ़सीर:

"حم" — यह उन हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत में से है जो कुरआन की शुरुआत में आते हैं। इन अक्षरों का ज़िक्र कुरआन की कई सूरतों में हुआ है, जैसे सूरत बक़रा की शुरुआत में "अलिफ़-लाम-मीम" और सूरत आले-इमरान में भी। इन अक्षरों के माध्यम से अल्लाह तआला कुरआन की अज़मत और उसकी फ़साहत (भाषा की सुंदरता) की ओर संकेत करते हैं। यह एक चुनौती है कि यह कुरआन उन्हीं अरबी अक्षरों से बना है जिन्हें तुम बोलते और समझते हो, फिर भी तुम इस जैसी एक सूरत भी नहीं बना सकते। यह कुरआन की सच्चाई और उसके अल्लाह की ओर से होने का प्रमाण है।

इन अक्षरों का असली अर्थ और मक़सद केवल अल्लाह तआला ही जानता है। हमारा ईमान है कि यह अल्लाह की किताब है, और इन अक्षरों में भी हिकमत (बुद्धिमत्ता) छिपी है। यह हमारे लिए एक इम्तिहान है कि हम उन पर ईमान लाएँ, चाहे हम उनका पूरा अर्थ न समझें।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि कुरआन एक ऐसी किताब है जो अपनी हर आयत, हर अक्षर में हिकमत रखती है। जिस किताब की शुरुआत ही इन रहस्यमय अक्षरों से हो, वह निश्चित रूप से एक महान और अद्भुत किताब है। यह हमें बताती है कि कुरआन को पढ़ना और समझना हमारी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ज़रूरत है। जब हम कुरआन पढ़ते हैं, तो हम अल्लाह से बात करते हैं, और जब अल्लाह हमसे बात करता है, तो यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। आइए, हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत में कामयाब हों। कुरआन हमारे लिए रहनुमा है, और यही हमें जन्नत की राह दिखाता है।



📜 आयत 1-3 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

1حم
हा मीम
2وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ
रौशन किताब (क़ुरान) की क़सम
3إِنَّا جَعَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
हमने इस किताब को अरबी ज़बान कुरान ज़रूर बनाया है ताकि तुम समझो
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 1

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Friday, October 2, 2026

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