अज़-ज़ुखरुफ · 3/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
إِنَّا جَعَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ۝٣
Innaa ja`alnaahu Quraanan `Arabiyyal la`allakum ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
हमने इस किताब को अरबी ज़बान कुरान ज़रूर बनाया है ताकि तुम समझो
📜

अनुवाद — Tafsir

بسم الله الرحمن الرحيم

शब्दार्थ:

  • "جَعَلْنَاهُ": हमने इसे बनाया/निर्धारित किया — यहाँ अर्थ है "हमने इसे उतारा और स्पष्ट किया"।
  • "قُرْآنًا عَرَبِيًّا": अरबी भाषा में क़ुरआन — ऐसा क़ुरआन जो अरबी भाषा में हो।
  • "تَعْقِلُونَ": तुम समझो, तर्क-बुद्धि से ग्रहण करो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी महान कृपा और दया का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि हमने इस क़ुरआन को अरबी भाषा में उतारा और इसे स्पष्ट किया। यह चुनाव अल्लाह की ओर से बेहद हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरा था, क्योंकि यह क़ुरआन उस उम्मत पर उतारा गया जिसकी भाषा अरबी थी। अल्लाह ने अपने पैग़ंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की क़ौम की भाषा में क़ुरआन उतारा ताकि वे उसके अर्थ, उसकी शिक्षाएँ और उसके प्रमाण आसानी से समझ सकें, उस पर ग़ौर-फ़िक्र कर सकें और उसकी रोशनी में अपने जीवन को ढाल सकें।

यह अल्लाह की रहमत का एक बड़ा पहलू है कि उसने अपनी किताब को ऐसी भाषा में उतारा जो उन लोगों की अपनी भाषा थी, ताकि उनके पास कोई बहाना न बचे। अगर क़ुरआन किसी और भाषा में उतारा गया होता, तो वे कह सकते थे कि हम इसे समझ नहीं पाते। लेकिन अल्लाह ने इसे उन्हीं की भाषा में उतारा ताकि वे इसे भली-भाँति समझें, और फिर इस ज्ञान को दूसरी उम्मतों तक पहुँचाएँ। यही कारण है कि क़ुरआन की भाषा अरबी रखी गई — न केवल इसलिए कि वह पैग़ंबर की भाषा थी, बल्कि इसलिए भी कि यह एक स्पष्ट, समृद्ध और व्यापक भाषा है जो गहरे अर्थों को अपने में समेट सकती है।

इस आयत में अल्लाह ने "لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ" (ताकि तुम समझो) कहकर हमें बताया कि क़ुरआन का उद्देश्य केवल पढ़ना नहीं है, बल्कि उसे समझना, उस पर चिंतन करना और उसके अनुसार जीवन जीना है। अल्लाह चाहता है कि हम अपनी बुद्धि और अक़्ल का इस्तेमाल करें, उसकी आयतों पर ग़ौर करें और सत्य को स्वीकार करें। यही क़ुरआन की असली बरकत है — जब इंसान इसे समझकर पढ़ता है, तो उसका दिल रोशन हो जाता है और उसका ईमान मज़बूत होता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन हमारे लिए कितनी बड़ी नेमत है। अल्लाह ने इसे हमारी समझ के लिए आसान बनाया है। हमें चाहिए कि हम इसे सिर्फ़ तिलावत के लिए न रखें, बल्कि इसके अर्थ को समझें, इस पर अमल करें और इसे अपनी ज़िंदगी का नक्शा बनाएँ। जब हम क़ुरआन को समझेंगे, तो हमें सही रास्ता मिलेगा, हमारे दिलों को सुकून मिलेगा और हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होंगे। अल्लाह हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अज़-ज़ुखरुफ

1حم
हा मीम
2وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ
रौशन किताब (क़ुरान) की क़सम
3إِنَّا جَعَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا لَّعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
हमने इस किताब को अरबी ज़बान कुरान ज़रूर बनाया है ताकि तुम समझो
4وَإِنَّهُ فِي أُمِّ الْكِتَابِ لَدَيْنَا لَعَلِيٌّ حَكِيمٌ
और बेशक ये (क़ुरान) असली किताब (लौह महफूज़) में (भी जो) मेरे पास है लिखी हुई है (और) यक़ीनन बड़े रूतबे की (और) पुरअज़ हिकमत है
5أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ الذِّكْرَ صَفْحًا أَن كُنتُمْ قَوْمًا مُّسْرِفِينَ
भला इस वजह से कि तुम ज्यादती करने वाले लोग हो हम तुमको नसीहत करने से मुँह मोड़ेंगे (हरगिज़ नहीं)
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
3आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 3

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Tuesday, August 18, 2026

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