अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الفجر (अल-फ़ज्र): सुबह का वह समय जब रात का अंधकार समाप्त होकर प्रकाश फूटता है। यह वह क्षण है जब अंधेरे के बाद उजाला दिखाई देता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में "الفجر" (सुबह के समय) की क़सम खाई है। यह वह समय है जब रात का सन्नाटा टूटता है और दिन का उजाला फैलने लगता है। यह समय बरकत वाला है, क्योंकि यही वह घड़ी है जब बंदे अपने रब की इबादत के लिए उठते हैं, तहज्जुद की नमाज़ पढ़ते हैं, और सुबह की नमाज़ अदा करते हैं। यह समय रहमत, बरकत और क़ुबूलियत का समय है।
अल्लाह तआला ने इस समय की क़सम इसलिए खाई ताकि हमें इसकी अहमियत समझाएँ और हमें यह बताएँ कि जिस तरह सुबह का उजाला रात के अंधेरे को चीरता है, उसी तरह ईमान की रोशनी कुफ्र और ग़फ़लत के अंधेरे को ख़त्म करती है। यह हमारे लिए एक निशानी है कि अल्लाह की क़ुदरत हर दिन नया सबक़ सिखाती है — हर रात के बाद सुबह आती है, हर मुश्किल के बाद आसानी आती है, और हर अंधेरे के बाद उजाला होता है।
यह क़सम हमें यह भी सिखाती है कि हम अपने दिन की शुरुआत अल्लाह की याद और इबादत से करें, क्योंकि सुबह का समय दुआओं की क़ुबूलियत का समय है। रसूलुल्लाह ﷺ ने भी इस समय की फ़ज़ीलत बयान की है और हमें इस घड़ी में इबादत करने की तरग़ीब दी है।
यह क़सम हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और जो लोग उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं। सुबह का उजाला हमें याद दिलाता है कि अल्लाह की रहमत भी हर अंधेरे के बाद ज़रूर आती है। इसलिए हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए।
📜 आयत 1-3 — अल-फज्र
अनुवाद — अल-फज्र 1
सूरा अल-फज्र आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सुबह की क़समसूरा आयत 1/30 — अल-फज्र الفجر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फज्र सुनें, अल-फज्र अनुवाद, अल-फज्र mp3, अल-फज्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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