अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अल-ह़ाक़्क़ा: यह "ह़क़्क़" (सत्य/वास्तविक) से बना है, जिसका अर्थ है "सत्य को प्राप्त करने वाली" या "अवश्य घटित होने वाली"। यहाँ इससे अभिप्राय क़ियामत (प्रलय का दिन) है, क्योंकि वह अवश्यंभावी और सत्य है, जिसमें कोई संदेह नहीं।
व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में क़ियामत के दिन का ज़िक्र कर रहे हैं, जो अवश्य ही आने वाला है। यह दिन इतना भयावह और सत्य है कि इसे "अल-ह़ाक़्क़ा" कहा गया — यानी वह घटना जो सत्य होकर रहेगी, जिसका झुठलाया जाना असंभव है। यह वह दिन है जब अल्लाह का वादा और वायदा (अच्छे का बदला और बुरे की सज़ा) पूरा होगा। इस दिन की सच्चाई को कोई इनकार नहीं कर सकता, न कोई उससे बच सकता है।
यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी, बल्कि एक दिन सब कुछ ख़त्म होगा और हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। यह दिन इतना भयानक होगा कि उसकी हक़ीक़त को समझाना मुश्किल है, लेकिन अल्लाह ने क़ुरआन में इसका वर्णन करके हमें आगाह किया है।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह का ख़ौफ़ पैदा करती है और हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ इस दुनिया के लिए न बनाएं, बल्कि उस दिन की तैयारी करें। यह हमें बताती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है, और जो लोग उस पर ईमान लाएंगे और नेक कर्म करेंगे, उनके लिए उस दिन खुशख़बरी है। क़ियामत का दिन मोमिनों के लिए इनाम का दिन होगा, जब वे अपने रब की रहमत और जन्नत के सुखों से नवाज़े जाएंगे। इसलिए हमें चाहिए कि इस दिन की सच्चाई पर यक़ीन करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें, ताकि उस दिन हम कामयाब हो सकें।
📜 आयत 1-3 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 1
सूरा अल-हाक़्का आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : सच मुच होने वाली (क़यामत)सूरा आयत 1/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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