अल-हाक़्का · 2/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
مَا الْحَاقَّةُ ۝٢
Mal haaaqqah
📖 हिंदी अर्थ
और सच मुच होने वाली क्या चीज़ है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल-ह़ाक़्क़ा: क़यामत का एक नाम, जो सच्ची और अवश्यंभावी घटना है। इसे 'ह़ाक़्क़ा' इसलिए कहा गया क्योंकि यह सत्य को सत्य और असत्य को असत्य करके दिखा देगी, यानी उसमें हर सच और झूठ स्पष्ट हो जाएगा।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला ने क़यामत की अज़ीम शान और उसके हौलनाक होने को बयान करने के लिए एक पुकारने वाला सवाल पेश किया है। फ़रमाया: "वह सच्ची घटना (क़यामत) क्या है?" यह सवाल किसी को जानकारी हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि उसकी अहमियत और दहशत को ज़ाहिर करने के लिए है। गोया अल्लाह फ़रमा रहा है: तुमने उसका नाम तो सुना, लेकिन क्या तुम जानते हो कि वह क्या है? वह ऐसी सच्ची घटना है जिसके आने में कोई शक नहीं, जिसमें हर अच्छे और बुरे का हिसाब होगा, और जिसकी हौलनाकी का अंदाज़ा लगाना इंसान की समझ से बाहर है।

यह सवाल उस वक़्त के अरबों के ज़ेहन में था कि क़यामत क्या है? इसलिए अल्लाह ने उन्हें संबोधित करते हुए उसकी अज़ीम हैसियत से परिचित कराया। यहाँ 'ह़ाक़्क़ा' का ज़िक्र इसलिए किया गया कि क़यामत एक ऐसी सच्चाई है जो ज़रूर आएगी, और उस दिन हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा। यह सवाल इंसान के दिल में ख़ौफ़ पैदा करने और उसे आख़िरत की तैयारी की तरफ़ राग़िब करने के लिए है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि क़यामत कोई दूर की या मनगढ़ंत बात नहीं, बल्कि एक सच्ची और यक़ीनी घटना है। जिस इंसान को यह यक़ीन हो जाए कि उसे अपने हर अमल का हिसाब देना है, वह कभी गुनाह में मुब्तला नहीं हो सकता। यह आयत हमें दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में आख़िरत की तैयारी की तरफ़ बुलाती है — नेकी करने, अल्लाह की इबादत करने और उसकी रहमत के तलबगार बनने की। क़यामत का ख़ौफ़ हमें गुनाहों से रोकता है और अच्छे कामों की तरफ़ प्रेरित करता है। यही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-हाक़्का

1الْحَاقَّةُ
सच मुच होने वाली (क़यामत)
2مَا الْحَاقَّةُ
और सच मुच होने वाली क्या चीज़ है
3وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْحَاقَّةُ
और तुम्हें क्या मालूम कि वह सच मुच होने वाली क्या है
4كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌ بِالْقَارِعَةِ
(वही) खड़ खड़ाने वाली (जिस) को आद व समूद ने झुठलाया
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 2

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Sunday, October 11, 2026

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