सूरा अल-हाक़्का अरबी और हिंदी

सूरा अल-हाक़्का को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (52 आयत — مكية). अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf.

सूरा अल-हाक़्का पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
الْحَاقَّةُ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
सच मुच होने वाली (क़यामत)
مَا الْحَاقَّةُ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
और सच मुच होने वाली क्या चीज़ है
وَمَا أَدْرَاكَ مَا الْحَاقَّةُ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
और तुम्हें क्या मालूम कि वह सच मुच होने वाली क्या है
كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌ بِالْقَارِعَةِ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
(वही) खड़ खड़ाने वाली (जिस) को आद व समूद ने झुठलाया
فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا بِالطَّاغِيَةِ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
ग़रज़ समूद तो चिंघाड़ से हलाक कर दिए गए
وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी की तो ख़ुदा ने भी उनकी बड़ी सख्ती से ले दे कर डाली
إِنَّا لَمَّا طَغَى الْمَاءُ حَمَلْنَاكُمْ فِي الْجَارِيَةِ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
जब पानी चढ़ने लगा तो हमने तुमको कशती पर सवार किया
لِنَجْعَلَهَا لَكُمْ تَذْكِرَةً وَتَعِيَهَا أُذُنٌ وَاعِيَةٌ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
ताकि हम उसे तुम्हारे लिए यादगार बनाएं और उसे याद रखने वाले कान सुनकर याद रखें
فَإِذَا نُفِخَ فِي الصُّورِ نَفْخَةٌ وَاحِدَةٌ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
फिर जब सूर में एक (बार) फूँक मार दी जाएगी
وَحُمِلَتِ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ فَدُكَّتَا دَكَّةً وَاحِدَةً ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और ज़मीन और पहाड़ उठाकर एक बारगी (टकरा कर) रेज़ा रेज़ा कर दिए जाएँगे तो उस रोज़ क़यामत आ ही जाएगी
فَيَوْمَئِذٍ وَقَعَتِ الْوَاقِعَةُ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
और आसमान फट जाएगा
وَانشَقَّتِ السَّمَاءُ فَهِيَ يَوْمَئِذٍ وَاهِيَةٌ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
तो वह उस दिन बहुत फुस फुसा होगा और फ़रिश्ते उनके किनारे पर होंगे
وَالْمَلَكُ عَلَىٰ أَرْجَائِهَا ۚ وَيَحْمِلُ عَرْشَ رَبِّكَ فَوْقَهُمْ يَوْمَئِذٍ ثَمَانِيَةٌ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
और तुम्हारे परवरदिगार के अर्श को उस दिन आठ फ़रिश्ते अपने सरों पर उठाए होंगे
يَوْمَئِذٍ تُعْرَضُونَ لَا تَخْفَىٰ مِنكُمْ خَافِيَةٌ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
उस दिन तुम सब के सब (ख़ुदा के सामने) पेश किए जाओगे और तुम्हारी कोई पोशीदा बात छुपी न रहेगी
فَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَيَقُولُ هَاؤُمُ اقْرَءُوا كِتَابِيَهْ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
तो जिसको (उसका नामए आमाल) दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह (लोगो से) कहेगा लीजिए मेरा नामए आमाल पढ़िए
إِنِّي ظَنَنتُ أَنِّي مُلَاقٍ حِسَابِيَهْ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
तो मैं तो जानता था कि मुझे मेरा हिसाब (किताब) ज़रूर मिलेगा
فَهُوَ فِي عِيشَةٍ رَّاضِيَةٍ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
फिर वह दिल पसन्द ऐश में होगा
فِي جَنَّةٍ عَالِيَةٍ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
बड़े आलीशान बाग़ में
قُطُوفُهَا دَانِيَةٌ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
जिनके फल बहुत झुके हुए क़रीब होंगे
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا أَسْلَفْتُمْ فِي الْأَيَّامِ الْخَالِيَةِ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
जो कारगुज़ारियाँ तुम गुज़िशता अय्याम में करके आगे भेज चुके हो उसके सिले में मज़े से खाओ पियो
وَأَمَّا مَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِشِمَالِهِ فَيَقُولُ يَا لَيْتَنِي لَمْ أُوتَ كِتَابِيَهْ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
और जिसका नामए आमाल उनके बाएँ हाथ में दिया जाएगा तो वह कहेगा ऐ काश मुझे मेरा नामए अमल न दिया जाता
وَلَمْ أَدْرِ مَا حِسَابِيَهْ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
और मुझे न मालूल होता कि मेरा हिसाब क्या है
يَا لَيْتَهَا كَانَتِ الْقَاضِيَةَ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
ऐ काश मौत ने (हमेशा के लिए मेरा) काम तमाम कर दिया होता
مَا أَغْنَىٰ عَنِّي مَالِيَهْ ۜ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
(अफ़सोस) मेरा माल मेरे कुछ भी काम न आया
هَلَكَ عَنِّي سُلْطَانِيَهْ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
(हाए) मेरी सल्तनत ख़ाक में मिल गयी (फिर हुक्म होगा)
خُذُوهُ فَغُلُّوهُ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
इसे गिरफ्तार करके तौक़ पहना दो
ثُمَّ الْجَحِيمَ صَلُّوهُ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
फिर इसे जहन्नुम में झोंक दो,
ثُمَّ فِي سِلْسِلَةٍ ذَرْعُهَا سَبْعُونَ ذِرَاعًا فَاسْلُكُوهُ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
फिर एक ज़ंजीर में जिसकी नाप सत्तर गज़ की है उसे ख़ूब जकड़ दो
إِنَّهُ كَانَ لَا يُؤْمِنُ بِاللَّهِ الْعَظِيمِ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
(क्यों कि) ये न तो बुज़ुर्ग ख़ुदा ही पर ईमान लाता था और न मोहताज के खिलाने पर आमादा (लोगों को) करता था
وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
तो आज न उसका कोई ग़मख्वार है
فَلَيْسَ لَهُ الْيَوْمَ هَاهُنَا حَمِيمٌ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
और न पीप के सिवा (उसके लिए) कुछ खाना है
وَلَا طَعَامٌ إِلَّا مِنْ غِسْلِينٍ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
जिसको गुनेहगारों के सिवा कोई नहीं खाएगा
لَّا يَأْكُلُهُ إِلَّا الْخَاطِئُونَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
तो मुझे उन चीज़ों की क़सम है
فَلَا أُقْسِمُ بِمَا تُبْصِرُونَ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
जो तुम्हें दिखाई देती हैं
وَمَا لَا تُبْصِرُونَ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
और जो तुम्हें नहीं सुझाई देती कि बेशक ये (क़ुरान)
إِنَّهُ لَقَوْلُ رَسُولٍ كَرِيمٍ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
एक मोअज़िज़ फरिश्ते का लाया हुआ पैग़ाम है
وَمَا هُوَ بِقَوْلِ شَاعِرٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تُؤْمِنُونَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
और ये किसी शायर की तुक बन्दी नहीं तुम लोग तो बहुत कम ईमान लाते हो
وَلَا بِقَوْلِ كَاهِنٍ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
और न किसी काहिन की (ख्याली) बात है तुम लोग तो बहुत कम ग़ौर करते हो
تَنزِيلٌ مِّن رَّبِّ الْعَالَمِينَ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
सारे जहाँन के परवरदिगार का नाज़िल किया हुआ (क़लाम) है
وَلَوْ تَقَوَّلَ عَلَيْنَا بَعْضَ الْأَقَاوِيلِ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
अगर रसूल हमारी निस्बत कोई झूठ बात बना लाते
لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
तो हम उनका दाहिना हाथ पकड़ लेते
ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
फिर हम ज़रूर उनकी गर्दन उड़ा देते
فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)
وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है
وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग (इसके) झुठलाने वाले हैं
وَإِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِرِينَ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
और इसमें शक़ नहीं कि ये काफ़िरों की हसरत का बाएस है
وَإِنَّهُ لَحَقُّ الْيَقِينِ ۝٥١
📖 अनुवाद आयत 51
और इसमें शक़ नहीं कि ये यक़ीनन बरहक़ है
فَسَبِّحْ بِاسْمِ رَبِّكَ الْعَظِيمِ ۝٥٢
📖 अनुवाद आयत 52
तो तुम अपने परवरदिगार की तसबीह करो
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69الحاقة Al-Haqqah 📚 52 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अल-हाक़्का — 52 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए