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خَٰشِعَةً أَبۡصَٰرُهُمۡ تَرۡهَقُهُمۡ ذِلَّةٌۖ وَقَدۡ كَانُواْ يُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ وَهُمۡ سَٰلِمُونَ  ۝٤٣ فَذَرۡنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِۖ سَنَسۡتَدۡرِجُهُم مِّنۡ حَيۡثُ لَا يَعۡلَمُونَ  ۝٤٤ وَأُمۡلِي لَهُمۡۚ إِنَّ كَيۡدِي مَتِينٌ  ۝٤٥ أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ أَجۡرًا فَهُم مِّن مَّغۡرَمٍ مُّثۡقَلُونَ  ۝٤٦ أَمۡ عِندَهُمُ ٱلۡغَيۡبُ فَهُمۡ يَكۡتُبُونَ  ۝٤٧ فَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ ٱلۡحُوتِ إِذۡ نَادَىٰ وَهُوَ مَكۡظُومٌ  ۝٤٨ لَّوۡلَآ أَن تَدَٰرَكَهُۥ نِعۡمَةٌ مِّن رَّبِّهِۦ لَنُبِذَ بِٱلۡعَرَآءِ وَهُوَ مَذۡمُومٌ  ۝٤٩ فَٱجۡتَبَٰهُ رَبُّهُۥ فَجَعَلَهُۥ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ  ۝٥٠ وَإِن يَكَادُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَيُزۡلِقُونَكَ بِأَبۡصَٰرِهِمۡ لَمَّا سَمِعُواْ ٱلذِّكۡرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُۥ لَمَجۡنُونٌ  ۝٥١ وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكۡرٌ لِّلۡعَٰلَمِينَ  ۝٥٢
सूरा अल-हाक़्का
bismillah
ٱلۡحَآقَّةُ  ۝١ مَا ٱلۡحَآقَّةُ  ۝٢ وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡحَآقَّةُ  ۝٣ كَذَّبَتۡ ثَمُودُ وَعَادُۢ بِٱلۡقَارِعَةِ  ۝٤ فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهۡلِكُواْ بِٱلطَّاغِيَةِ  ۝٥ وَأَمَّا عَادٌ فَأُهۡلِكُواْ بِرِيحٍ صَرۡصَرٍ عَاتِيَةٍ  ۝٦ سَخَّرَهَا عَلَيۡهِمۡ سَبۡعَ لَيَالٍ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًاۖ فَتَرَى ٱلۡقَوۡمَ فِيهَا صَرۡعَىٰ كَأَنَّهُمۡ أَعۡجَازُ نَخۡلٍ خَاوِيَةٍ  ۝٧ فَهَلۡ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍ  ۝٨
68:43
خَٰشِعَةً أَبۡصَٰرُهُمۡ تَرۡهَقُهُمۡ ذِلَّةٌۖ وَقَدۡ كَانُواْ يُدۡعَوۡنَ إِلَى ٱلسُّجُودِ وَهُمۡ سَٰلِمُونَ  ۝٤٣
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
68:44
فَذَرۡنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا ٱلۡحَدِيثِۖ سَنَسۡتَدۡرِجُهُم مِّنۡ حَيۡثُ لَا يَعۡلَمُونَ  ۝٤٤
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
68:45
وَأُمۡلِي لَهُمۡۚ إِنَّ كَيۡدِي مَتِينٌ  ۝٤٥
और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है
68:46
أَمۡ تَسۡـَٔلُهُمۡ أَجۡرًا فَهُم مِّن مَّغۡرَمٍ مُّثۡقَلُونَ  ۝٤٦
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है
68:47
أَمۡ عِندَهُمُ ٱلۡغَيۡبُ فَهُمۡ يَكۡتُبُونَ  ۝٤٧
या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं
68:48
فَٱصۡبِرۡ لِحُكۡمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ ٱلۡحُوتِ إِذۡ نَادَىٰ وَهُوَ مَكۡظُومٌ  ۝٤٨
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
68:49
لَّوۡلَآ أَن تَدَٰرَكَهُۥ نِعۡمَةٌ مِّن رَّبِّهِۦ لَنُبِذَ بِٱلۡعَرَآءِ وَهُوَ مَذۡمُومٌ  ۝٤٩
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
68:50
فَٱجۡتَبَٰهُ رَبُّهُۥ فَجَعَلَهُۥ مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ  ۝٥٠
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
68:51
وَإِن يَكَادُ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَيُزۡلِقُونَكَ بِأَبۡصَٰرِهِمۡ لَمَّا سَمِعُواْ ٱلذِّكۡرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُۥ لَمَجۡنُونٌ  ۝٥١
और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे
68:52
وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكۡرٌ لِّلۡعَٰلَمِينَ  ۝٥٢
और कहते हैं कि ये तो सिड़ी हैं और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन की नसीहत है
सूरा अल-हाक़्का
bismillah
69:1
ٱلۡحَآقَّةُ  ۝١
सच मुच होने वाली (क़यामत)
69:2
مَا ٱلۡحَآقَّةُ  ۝٢
और सच मुच होने वाली क्या चीज़ है
69:3
وَمَآ أَدۡرَىٰكَ مَا ٱلۡحَآقَّةُ  ۝٣
और तुम्हें क्या मालूम कि वह सच मुच होने वाली क्या है
69:4
كَذَّبَتۡ ثَمُودُ وَعَادُۢ بِٱلۡقَارِعَةِ  ۝٤
(वही) खड़ खड़ाने वाली (जिस) को आद व समूद ने झुठलाया
69:5
فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهۡلِكُواْ بِٱلطَّاغِيَةِ  ۝٥
ग़रज़ समूद तो चिंघाड़ से हलाक कर दिए गए
69:6
وَأَمَّا عَادٌ فَأُهۡلِكُواْ بِرِيحٍ صَرۡصَرٍ عَاتِيَةٍ  ۝٦
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए
69:7
سَخَّرَهَا عَلَيۡهِمۡ سَبۡعَ لَيَالٍ وَثَمَٰنِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًاۖ فَتَرَى ٱلۡقَوۡمَ فِيهَا صَرۡعَىٰ كَأَنَّهُمۡ أَعۡجَازُ نَخۡلٍ خَاوِيَةٍ  ۝٧
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
69:8
فَهَلۡ تَرَىٰ لَهُم مِّنۢ بَاقِيَةٍ  ۝٨
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है


📚Juz 29 📄566 / 604



Mishary Rashid Alafasy
Mahmoud Khalil Al-Husary
Abdurrahman As-Sudais
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
Abdul Basit Abdul Samad
Ali Al-Hudhaify
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
Abu Bakr Ash-Shaatree
Muhammad Ayyoub
Abdullah Basfar
Abdullah Al-Juhani
Maher Al Muaiqly
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पवित्र क़ुरआन


Monday, August 31, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए