अल-हाक़्का · 6/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ ۝٦
Wa ammaa `Aadun fa uhlikoo bireehin sarsarin `aatiyah
📖 हिंदी अर्थ
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَرْصَرٍ (सरसर): अत्यंत तेज़ आवाज़ वाली, प्रचंड रूप से चलने वाली ठंडी हवा।
  • عَاتِيَةٍ (आतियाह): सीमा से बाहर निकल जाने वाली, अत्यधिक प्रबल और क्रूर, जो अपनी गति और शक्ति में हद से बढ़ गई हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब अल्लाह तआला ने आद की क़ौम का ज़िक्र किया, तो फ़रमाया कि जिस तरह समूद की क़ौम को एक भयानक चीख़ (सैहा) ने हलाक किया, उसी तरह आद की क़ौम को एक अत्यंत तेज़, ठंडी और प्रचंड हवा ने तबाह कर दिया। यह हवा इतनी ज़बरदस्त थी कि उसकी आवाज़ से कान पड़ जाते थे, और उसकी ठंडक और तेज़ी ने हर चीज़ को चीर दिया। यह हवा सात रातों और आठ दिनों तक लगातार चलती रही, बिना किसी रुकावट के। अल्लाह ने इस हवा को उन पर इस कदर मुसल्लत किया कि वे ज़मीन पर गिरकर मर गए, और उनकी लाशें ऐसी दिखती थीं जैसे खोखले खजूर के तने हों। यह अज़ाब उनके कुफ्र और अल्लाह के रसूल हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) की नाफ़रमानी की सज़ा थी।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की पकड़ कितनी सख्त है। जो क़ौमें अपने नबियों को झुठलाती हैं और सरकशी पर अड़ी रहती हैं, वे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बच सकतीं। यह हवा सिर्फ़ एक प्राकृतिक घटना नहीं थी, बल्कि अल्लाह का वह लश्कर था जो उसने अपने नबी की तस्दीक़ और काफ़िरों की सज़ा के लिए भेजा। आज भी अल्लाह की कुदरत के नमूने हमारे चारों ओर मौजूद हैं — तेज़ हवाएँ, तूफ़ान और आफ़तें — ये सब हमें याद दिलाते हैं कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।

इसलिए ऐ इंसान! अपने रब की इबादत कर, उसके रसूलों की पैरवी कर, और उसकी रहमत के साये में आ जा। क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं बढ़कर है — जो उसकी तरफ़ रुजू' करता है, उसे वह बचा लेता है, जैसे उसने हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को उस भयानक हवा से बचा लिया था। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है, और वह चाहता है कि हम उसकी राह पर चलें ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 4-8 — अल-हाक़्का

4كَذَّبَتْ ثَمُودُ وَعَادٌ بِالْقَارِعَةِ
(वही) खड़ खड़ाने वाली (जिस) को आद व समूद ने झुठलाया
5فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا بِالطَّاغِيَةِ
ग़रज़ समूद तो चिंघाड़ से हलाक कर दिए गए
6وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए
7سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
8فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
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अनुवाद — अल-हाक़्का 6

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Tuesday, August 18, 2026

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