अल-क़लम · 43/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ ۝٤٣
Khaashi`atan absaaruhum tarhaquhum zillatunw wa qad kaanoo yud`awna ilassujoodi wa hum saalimoon
📖 हिंदी अर्थ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ख़ाशि'अतन: झुकी हुई, नीची
  • अब्सारुहुम: उनकी आँखें
  • तरहक़ुहुम: उन्हें ढक लेगा, छा जाएगा
  • ज़िल्लतुन: अपमान, बेइज़्ज़ती
  • युद'अव्न: बुलाए जाते थे
  • सुजूद: सज्दा (अल्लाह की इबादत के लिए)
  • सालिमून: स्वस्थ, तंदुरुस्त, किसी बीमारी या बाधा से मुक्त

तफ़सीर:

उस दिन का दृश्य अत्यंत भयावह होगा जब ये काफ़िर और मुनाफ़िक़ लोग अपने रब के सामने हाज़िर होंगे। उनकी आँखें शर्म और डर से झुकी होंगी, वे किसी की ओर देखने की हिम्मत नहीं कर पाएँगे। उनके चेहरों पर ज़िल्लत और अपमान की छाप साफ़ दिखाई देगी, जो उन्हें पूरी तरह से ढक लेगी। यह वह अपमान होगा जो अल्लाह की ओर से उनके किए की सज़ा के रूप में आएगा।

और फिर उन्हें उनके उस कृत्य की याद दिलाई जाएगी जो उन्होंने दुनिया में किया था। उन्हें दुनिया में बार-बार सज्दे के लिए बुलाया जाता था — नमाज़ के लिए, अल्लाह की इबादत के लिए — और वे पूरी तरह स्वस्थ और सक्षम थे। उनके पास कोई बहाना नहीं था। न वे बीमार थे, न किसी मजबूरी में थे। उनके पास ताकत थी, समय था, और अवसर था। लेकिन उन्होंने घमंड और अकड़ से सज्दा करने से इनकार कर दिया। वे अपने आप को बड़ा समझते थे और अल्लाह के आगे झुकना गवारा नहीं करते थे।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ा सबक देती है। सज्दा सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि यह अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और विनम्रता का प्रतीक है। जब हम सज्दे में जाते हैं, तो हम अपने अहंकार को मिटाते हैं और यह स्वीकार करते हैं कि हम अल्लाह के छोटे बंदे हैं। यही सज्दा हमारी आत्मा को पवित्र करता है और हमें उस दिन की शर्मिंदगी से बचाता है।

आज हमारे पास वह सब कुछ है जो उनके पास था — स्वास्थ्य, समय, ताकत। क्या हम उनकी तरह घमंड करेंगे? क्या हम सज्दे से मुँह मोड़ेंगे? या क्या हम अल्लाह के सामने झुककर उसकी रहमत के हक़दार बनेंगे? यह हमारा चुनाव है। लेकिन याद रखें — जिस दिन आँखें झुक जाएँगी और ज़िल्लत छा जाएगी, उस दिन पछताने का कोई फायदा नहीं होगा। आज ही वह दिन है जब हम सज्दे में झुककर अपनी किस्मत को रोशन कर सकते हैं। अल्लाह हमें उन लोगों में से न बनाए जो सज्दे से घमंड करके मुँह मोड़ लें। आमीन।



📜 आयत 41-45 — सूरा अल-क़लम

41أَمْ لَهُمْ شُرَكَاءُ فَلْيَأْتُوا بِشُرَكَائِهِمْ إِن كَانُوا صَادِقِينَ
या (इस बाब में) उनके और लोग भी शरीक हैं तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो अपने शरीकों को सामने लाएँ
42يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
43خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
44فَذَرْنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا الْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
45وَأُمْلِي لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِي مَتِينٌ
और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — अल-क़लम 43

सूरा अल-क़लम आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी…

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Friday, October 2, 2026

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