अल-क़लम · 48/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ الْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌ ۝٤٨
Fasbir lihkmi rabbika wa laa takun kasaahibil boot; iz naadaa wa huwa makzoom
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
  • لِحُكْمِ رَبِّكَ: अपने रब के फैसले और उसके आदेश पर।
  • كَصَاحِبِ الْحُوتِ: मछली वाले (हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम) की तरह।
  • إِذْ نَادَى: जब उन्होंने पुकारा।
  • مَكْظُومٌ: ग़म और ग़ुस्से से भरा हुआ, दिल में दबा हुआ दर्द।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को नसीहत करते हुए फ़रमाता है कि ऐ रसूल! आप अपने रब के हुक्म पर सब्र करें, और जो कुछ अल्लाह ने आपके लिए तय किया है — चाहे वह दुश्मनों की ढील हो, तकलीफ़ों का आना हो, या फ़तह में देरी — उस पर दिल से राज़ी रहें। अल्लाह की तरफ़ से जो भी फ़ैसला आए, उसे खुशी से क़ुबूल करें और बेसब्री न दिखाएँ।

फिर अल्लाह तआला आपको एक बहुत बड़ा सबक़ देते हुए कहता है: आप उस बंदे (हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम) की तरह न बनें, जिसे मछली ने निगल लिया था। यानी जल्दबाज़ी और ग़ुस्से से बचें। हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम की हिदायत से निराश होकर और उन पर ग़ुस्सा आने की वजह से उन्हें छोड़ दिया और चले गए। उन्होंने अल्लाह से उस वक़्त दुआ की जब वह अंधेरे में थे — अंधेरा समंदर का, अंधेरा मछली के पेट का, और अंधेरा रात का — और वह ग़म और ग़ुस्से से भरे हुए थे। उन्होंने पुकारा: "لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ" (तू पाक है, मैंने ज़ुल्म किया)। यह पुकार उनके दिल की गहराई से निकली थी, और अल्लाह ने उनकी दुआ क़ुबूल की और उन्हें उस मुसीबत से निकाला।

अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि जब भी मुश्किलें आएं, जब लोगों की तरफ़ से सताया जाए, जब काम में देरी हो, तो हमें सब्र करना चाहिए और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जल्दबाज़ी और ग़ुस्सा इंसान को बड़ी मुसीबतों में डाल सकता है, जैसा कि यूनुस अलैहिस्सलाम के साथ हुआ। लेकिन अल्लाह की रहमत देखिए — जब उन्होंने तौबा की और अल्लाह को पुकारा, तो अल्लाह ने उन्हें बचा लिया और उन्हें और भी बड़ा मर्तबा दिया।

यह आयत हम सबके लिए एक प्यारा पैग़ाम है: अल्लाह का फैसला हमेशा हमारे भले के लिए होता है, भले ही हमें समझ न आए। इसलिए हमें सब्र करना चाहिए, अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, और हर हाल में उसी से दुआ माँगनी चाहिए। अल्लाह अपने बंदों से बहुत प्यार करता है और जो उसकी तरफ़ रुजू करता है, उसे कभी निराश नहीं करता। याद रखिए, सब्र की जो मिठास है, वह किसी और चीज़ में नहीं। और जो अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसके लिए हर मुश्किल से निकलने का रास्ता बना देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 46-50 — अल-क़लम

46أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है
47أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं
48فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ الْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌ
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
49لَّوْلَا أَن تَدَارَكَهُ نِعْمَةٌ مِّن رَّبِّهِ لَنُبِذَ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
50فَاجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
48आयत

अनुवाद — अल-क़लम 48

सूरा अल-क़लम आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र…

सूरा आयत 48/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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