अल-क़लम · 44/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
فَذَرْنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا الْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ ۝٤٤
Fazarnee wa many yukazzibu bihaazal hadeesi sanastad rijuhum min haisu laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَذَرْنِي: मुझे छोड़ दो (अर्थात यह काम मेरे ऊपर छोड़ दो)।
  • يُكَذِّبُ: झुठलाता है।
  • الْحَدِيثِ: यहाँ इससे आशय क़ुरआन है।
  • سَنَسْتَدْرِجُهُمْ: हम उन्हें धीरे-धीरे (आज़ाब की ओर) ले जाएँगे।
  • مِنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ: ऐसी जगह से जहाँ से उन्हें पता भी न चले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जो लोग इस क़ुरआन को झुठला रहे हैं, उनका मामला मुझ पर छोड़ दो। यह तुम्हारा काम नहीं कि उन्हें सज़ा दो या उनसे बदला लो। मैं ख़ुद उनका हिसाब लूँगा। यह बड़ी धमकी है — अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उन्हें धीरे-धीरे अपनी पकड़ में लेंगे। हम उन्हें नेअमतें देंगे — माल, औलाद, तंदुरुस्ती, लंबी उम्र — और वह समझेंगे कि यह हमारी ख़ुशनूदी है, हालाँकि यह उनके लिए आज़ाब का ज़रिया बनेगा। वह हर दिन गुनाहों में बढ़ते जाएँगे और उनकी सज़ा भी बढ़ती जाएगी। यह अल्लाह की चालाकी है — वह उन्हें उस रास्ते से पकड़ेगा जिसका उन्हें ज़रा भी अंदाज़ा नहीं होगा। जब वह सोचेंगे कि सब कुछ ठीक चल रहा है, तभी अचानक अल्लाह का अज़ाब आ जाएगा।

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। कभी-कभी हम देखते हैं कि बुरे लोगों के पास दौलत और ठाठ-बाठ है, तो हम सोचते हैं कि क्या अल्लाह उनसे ख़ुश है? नहीं! यह उनकी मोहलत है, उनके लिए एक चुपचाप तबाही का रास्ता है। अल्लाह रहीम है, वह फौरन सज़ा नहीं देता ताकि बंदा तौबा कर ले। लेकिन जो लोग इस रहमत को भी नहीं पहचानते और सरकशी में बढ़ते जाते हैं, उनके लिए अंजाम बहुत बुरा है।

हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को सच्चा मानें, उस पर अमल करें, और कभी भी अल्लाह की नेअमतों को देखकर धोखा न खाएँ। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसकी चाल बहुत मज़बूत है। जो लोग सीधे रास्ते पर चलते हैं, उनके लिए खुशखबरी है — अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। और जो लोग झुठलाते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ से एक ऐसा इंतज़ाम है जिससे वह बच नहीं सकते।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — अल-क़लम

42يَوْمَ يُكْشَفُ عَن سَاقٍ وَيُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ فَلَا يَسْتَطِيعُونَ
जिस दिन पिंडली खोल दी जाए और (काफ़िर) लोग सजदे के लिए बुलाए जाएँगे तो (सजदा) न कर सकेंगे
43خَاشِعَةً أَبْصَارُهُمْ تَرْهَقُهُمْ ذِلَّةٌ ۖ وَقَدْ كَانُوا يُدْعَوْنَ إِلَى السُّجُودِ وَهُمْ سَالِمُونَ
उनकी ऑंखें झुकी हुई होंगी रूसवाई उन पर छाई होगी और (दुनिया में) ये लोग सजदे के लिए बुलाए जाते और हटटे कटटे तन्दरूस्त थे
44فَذَرْنِي وَمَن يُكَذِّبُ بِهَٰذَا الْحَدِيثِ ۖ سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने दो हम उनको आहिस्ता आहिस्ता इस तरह पकड़ लेंगे कि उनको ख़बर भी न होगी
45وَأُمْلِي لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِي مَتِينٌ
और मैं उनको मोहलत दिये जाता हूँ बेशक मेरी तदबीर मज़बूत है
46أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत का) कुछ सिला माँगते हो कि उन पर तावान का बोझ पड़ रहा है
अल-क़लमकुरान सूची
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अनुवाद — अल-क़लम 44

सूरा अल-क़लम आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो मुझे उस कलाम के झुठलाने वाले से समझ लेने…

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Tuesday, August 18, 2026

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