अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَاجْتَبَاهُ: उसे चुन लिया, विशेष रूप से अपनी ओर खींच लिया।
- الصَّالِحِينَ: नेक और अच्छे लोग, जिनके विचार, कर्म और वचन सब अच्छे हों।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी यूनुस (अलैहिस्सलाम) की उस हालत का ज़िक्र किया है, जब वे अपनी क़ौम से नाराज़ होकर चले गए थे और फिर मछली के पेट में डाल दिए गए थे। उस मुसीबत में उन्होंने अल्लाह को पुकारा, और अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल की। फिर अल्लाह ने उन्हें चुन लिया—यानी उन्हें अपनी ख़ास मुहब्बत और रहमत से नवाज़ा, उनकी तौबा क़बूल की और उन्हें अपने नेक बंदों में शामिल कर लिया।
यहाँ "اجتباء" (चुन लेना) का मतलब है कि अल्लाह ने उन्हें अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए चुना और उन्हें वह मर्तबा अता किया जो सिर्फ़ चुने हुए लोगों को मिलता है। "صالحین" (नेक लोग) से मुराद वे लोग हैं जिनके दिल, ज़ुबान और अमल सब अच्छे हों—जिनकी नीयतें साफ़ हों, जो अल्लाह के हुक्म पर चलें और लोगों के साथ भलाई करें।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत कितनी बड़ी है! जब बंदा गुनाह करके भी सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ लौटता है, तो अल्लाह उसे न सिर्फ़ माफ़ करता है, बल्कि उसे अपनी ख़ास मुहब्बत से नवाज़ता है और उसे नेक लोगों में शुमार कर लेता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है—चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपनी ज़िंदगी को अच्छा बनाने की कोशिश करें।
अल्लाह हर उस बंदे को उठाता है जो उसकी तरफ़ दौड़ता है। यूनुस (अलैहिस्सलाम) की तरह, जब हम मुसीबत में अल्लाह को पुकारते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें बेहतर इंसान बनाता है। यही अल्लाह का वादा है—वह अपने बंदों को कभी निराश नहीं करता।
📜 आयत 48-52 — अल-क़लम
अनुवाद — अल-क़लम 50
सूरा अल-क़लम आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना…सूरा आयत 50/52 — अल-क़लम القلم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़लम सुनें, अल-क़लम अनुवाद, अल-क़लम mp3, अल-क़लम pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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