अल-क़लम · 50/52
अनुवाद उच्चारण — अल-क़लम
فَاجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصَّالِحِينَ ۝٥٠
Fajtabaahu rabbuhoo faja`alahoo minas saaliheen
📖 हिंदी अर्थ
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاجْتَبَاهُ: उसे चुन लिया, विशेष रूप से अपनी ओर खींच लिया।
  • الصَّالِحِينَ: नेक और अच्छे लोग, जिनके विचार, कर्म और वचन सब अच्छे हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने अपने नबी यूनुस (अलैहिस्सलाम) की उस हालत का ज़िक्र किया है, जब वे अपनी क़ौम से नाराज़ होकर चले गए थे और फिर मछली के पेट में डाल दिए गए थे। उस मुसीबत में उन्होंने अल्लाह को पुकारा, और अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल की। फिर अल्लाह ने उन्हें चुन लिया—यानी उन्हें अपनी ख़ास मुहब्बत और रहमत से नवाज़ा, उनकी तौबा क़बूल की और उन्हें अपने नेक बंदों में शामिल कर लिया।

यहाँ "اجتباء" (चुन लेना) का मतलब है कि अल्लाह ने उन्हें अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए चुना और उन्हें वह मर्तबा अता किया जो सिर्फ़ चुने हुए लोगों को मिलता है। "صالحین" (नेक लोग) से मुराद वे लोग हैं जिनके दिल, ज़ुबान और अमल सब अच्छे हों—जिनकी नीयतें साफ़ हों, जो अल्लाह के हुक्म पर चलें और लोगों के साथ भलाई करें।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत कितनी बड़ी है! जब बंदा गुनाह करके भी सच्चे दिल से अल्लाह की तरफ़ लौटता है, तो अल्लाह उसे न सिर्फ़ माफ़ करता है, बल्कि उसे अपनी ख़ास मुहब्बत से नवाज़ता है और उसे नेक लोगों में शुमार कर लेता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है—चाहे हमसे कितनी भी ग़लतियाँ हुई हों, अल्लाह का दरवाज़ा हमेशा खुला है। बस शर्त यह है कि हम सच्चे दिल से तौबा करें और अपनी ज़िंदगी को अच्छा बनाने की कोशिश करें।

अल्लाह हर उस बंदे को उठाता है जो उसकी तरफ़ दौड़ता है। यूनुस (अलैहिस्सलाम) की तरह, जब हम मुसीबत में अल्लाह को पुकारते हैं, तो अल्लाह हमारी मदद करता है और हमें बेहतर इंसान बनाता है। यही अल्लाह का वादा है—वह अपने बंदों को कभी निराश नहीं करता।

🎧 सुनें

📜 आयत 48-52 — अल-क़लम

48فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ الْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌ
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
49لَّوْلَا أَن تَدَارَكَهُ نِعْمَةٌ مِّن رَّبِّهِ لَنُبِذَ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
50فَاجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
51وَإِن يَكَادُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَيُزْلِقُونَكَ بِأَبْصَارِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا الذِّكْرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُ لَمَجْنُونٌ
और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे
52وَمَا هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
और कहते हैं कि ये तो सिड़ी हैं और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन की नसीहत है
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीRevelation
50आयत

अनुवाद — अल-क़लम 50

सूरा अल-क़लम आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना…

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Tuesday, August 18, 2026

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