अल-हाक़्का · 7/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ ۝٧
Sakhkharahaa `alaihim sab`a la yaalinw wa samaaniyata ayyaamin husooman fataral qawma feehaa sar`aa ka annahum a`jaazu nakhlin khaawiyah
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَخَّرَهَا: उसे (हवा को) उन पर नियुक्त किया, अर्थात उसे उन पर इस तरह भेजा कि वह उन पर हावी हो गई।
  • حُسُومًا: लगातार और लगातार आने वाली, जिसमें कोई रुकावट या अंतराल न हो।
  • صَرْعَى: मृत, गिरे हुए, बेजान।
  • أَعْجَازُ نَخْلٍ: खजूर के तनों की जड़ें।
  • خَاوِيَةٍ: खोखली, गिरी हुई, जिनमें कोई जीवन न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने आद की क़ौम के अंजाम को बयान किया है, जिन्होंने अपने पैग़म्बर ह़ूद (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया और सच्चाई को कबूल करने से इनकार कर दिया। अल्लाह ने उन पर एक ऐसी तेज़ और ठंडी हवा भेजी जो सात रातों और आठ दिनों तक लगातार चलती रही, बिना किसी रुकावट के। यह हवा इतनी भयंकर थी कि उसने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया।

इस दौरान, जो कोई भी उस इलाक़े में देखता, वह देखता कि वे लोग ज़मीन पर मरे पड़े हैं, जैसे खजूर के खोखले तने जो जड़ से उखड़कर गिर गए हों। उनके शरीर बेजान और बिखरे हुए थे, और उनमें कोई हरकत या जीवन नहीं बचा था। यह मंज़र उनके लिए अल्लाह के अज़ाब की सबसे बड़ी निशानी थी।

यह वाक़या सिर्फ़ एक तारीख़ी घटना नहीं है, बल्कि इसमें हमारे लिए बड़ी सीख है। अल्लाह की ताक़त और उसके अज़ाब से डरना चाहिए, और उसकी रहमत और माफ़ी की तरफ़ लौटना चाहिए। जो लोग अल्लाह के हुक्म से सरकशी करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होता है। यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसके फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती।

लेकिन साथ ही, यह भी याद रखें कि अल्लाह बहुत रहम करने वाला है। जो लोग उसकी तरफ़ लौटते हैं और अपनी गलतियों से तौबा करते हैं, उनके लिए उसकी रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को मानें, उसके रसूल (ﷺ) की सुन्नत पर चलें, और उससे डरते हुए उसकी रहमत की उम्मीद रखें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देगा।



📜 आयत 5-9 — सूरा अल-हाक़्का

5فَأَمَّا ثَمُودُ فَأُهْلِكُوا بِالطَّاغِيَةِ
ग़रज़ समूद तो चिंघाड़ से हलाक कर दिए गए
6وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए
7سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
8فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
9وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 7

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Wednesday, September 30, 2026

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