अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ثَمُودُ (समूद): यह नबी सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम का नाम है।
- عَادٌ (आद): यह नबी हूद अलैहिस्सलाम की क़ौम का नाम है।
- الْقَارِعَةِ (अल-क़ारिआ): इसका अर्थ है क़ियामत, और इसे इसलिए "क़ारिआ" कहा गया क्योंकि यह दिलों को डर और खौफ़ से ज़ोर से टकराती है (क़रा'अ = टकराना)।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि समूद और आद की क़ौमों ने क़ियामत के दिन को झुठलाया। ये दोनों क़ौमें अपने-अपने नबियों — सालिह अलैहिस्सलाम और हूद अलैहिस्सलाम — के पास आईं, लेकिन उन्होंने उस दिन की सच्चाई को नहीं माना जो दिलों को हिला देगा और हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देने के लिए खड़ा कर देगा। "क़ारिआ" का नाम इसलिए रखा गया कि क़ियामत की घड़ी इतनी भयानक होगी कि वह दिलों को सहमा देगी, और हर व्यक्ति अपने किए गए अच्छे या बुरे कामों के सामने लाचार खड़ा होगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ियामत का दिन कोई मज़ाक़ या कल्पना नहीं, बल्कि एक सच्ची घटना है जो ज़रूर आएगी। समूद और आद जैसी ताक़तवर क़ौमें, जिन्होंने अपनी ताक़त और सभ्यता पर घमंड किया, आज उनके निशान भी मिट गए, लेकिन उनका झुठलाना उन्हें अल्लाह के अज़ाब से न बचा सका। हमें चाहिए कि हम इस दिन की तैयारी करें — नेक काम करें, अल्लाह की इबादत करें और उसके रसूल की सुन्नत पर चलें। यही वह रास्ता है जो हमें क़ियामत की घबराहट से सुरक्षित रखेगा और हमें जन्नत की ओर ले जाएगा। अल्लाह हमें सच्ची समझ और अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 2-6 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 4
सूरा अल-हाक़्का आयत 4 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वही) खड़ खड़ाने वाली (जिस) को आद व समूद ने…सूरा आयत 4/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 2–6. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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