अल-हाक़्का · 8/52
अनुवाद उच्चारण — अल-हाक़्का
فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ ۝٨
Fahal taraa lahum mim baaqiyah
📖 हिंदी अर्थ
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • بَاقِيَةٍ: बची हुई, शेष रहने वाली (कोई जीवित आत्मा या कोई अवशेष)।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में पूछा है: "क्या तुम उन (आद और समूद) में से किसी को भी बचा हुआ देखते हो?" यानी, क्या तुम्हें उन क़ौमों का कोई निशान या कोई जान बची हुई मिलती है? बिल्कुल नहीं! वे सब के सब इस तरह मिटा दिए गए कि उनका कोई नामो-निशान भी बाकी नहीं रहा।

यह अल्लाह का वो अज़ीम अज़ाब था जो उसने अपने नबियों को झुठलाने वालों पर नाज़िल किया। समूद की क़ौम को एक भयानक चीख़ (सैहा) ने आ लिया, जिसकी शिद्दत हद से बढ़ गई थी, और आद की क़ौम को एक बहुत तेज़, सर्द और लगातार चलने वाली हवा ने हलाक कर दिया, जो सात रातों और आठ दिनों तक लगातार चलती रही, न कभी रुकी और न कमज़ोर पड़ी। उस हवा के ज़ोर से वे लोग ऐसे गिर पड़े जैसे खोखले तने वाले खजूर के पेड़ हों।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: क्या तुम उनमें से किसी एक को भी बचा हुआ देखते हो? नहीं! वे सब के सब हलाक हो गए। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि जब वह किसी क़ौम पर अज़ाब लाता है, तो उसका कोई बचने वाला नहीं होता।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत और इबरत है। अल्लाह तआला ने अपने रसूलों को झुठलाने वाली क़ौमों का अंजाम हमारे सामने रखा है ताकि हम उनके अंजाम से सबक़ लें। यह बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और उसका वादा सच्चा है। जो लोग उसके दीन से मुँह मोड़ते हैं, वे कभी बच नहीं सकते, चाहे वे कितने भी ताकतवर क्यों न हों।

लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह तआला बड़ा रहम करने वाला और माफ़ करने वाला है। उसने हमें मौका दिया है कि हम उसकी तरफ लौटें, उसके हुक्मों को मानें और अपने गुनाहों से तौबा करें। यह आयत हमें डराती भी है और उम्मीद भी देती है — डर इसलिए कि हम उसके अज़ाब से बचें, और उम्मीद इसलिए कि जो लोग उसकी रहमत की तरफ दौड़ते हैं, उनके लिए उसकी जन्नत और खुशियाँ हैं। आओ, हम उन क़ौमों के अंजाम से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम उस अज़ाब से महफूज़ रहें जो उसने सरकशों पर नाज़िल किया।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अल-हाक़्का

6وَأَمَّا عَادٌ فَأُهْلِكُوا بِرِيحٍ صَرْصَرٍ عَاتِيَةٍ
रहे आद तो वह बहुत शदीद तेज़ ऑंधी से हलाक कर दिए गए
7سَخَّرَهَا عَلَيْهِمْ سَبْعَ لَيَالٍ وَثَمَانِيَةَ أَيَّامٍ حُسُومًا فَتَرَى الْقَوْمَ فِيهَا صَرْعَىٰ كَأَنَّهُمْ أَعْجَازُ نَخْلٍ خَاوِيَةٍ
ख़ुदा ने उसे सात रात और आठ दिन लगाकर उन पर चलाया तो लोगों को इस तरह ढहे (मुर्दे) पड़े देखता कि गोया वह खजूरों के खोखले तने हैं
8فَهَلْ تَرَىٰ لَهُم مِّن بَاقِيَةٍ
तू क्या इनमें से किसी को भी बचा खुचा देखता है
9وَجَاءَ فِرْعَوْنُ وَمَن قَبْلَهُ وَالْمُؤْتَفِكَاتُ بِالْخَاطِئَةِ
और फिरऔन और जो लोग उससे पहले थे और वह लोग (क़ौमे लूत) जो उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले थे सब गुनाह के काम करते थे
10فَعَصَوْا رَسُولَ رَبِّهِمْ فَأَخَذَهُمْ أَخْذَةً رَّابِيَةً
तो उन लोगों ने अपने परवरदिगार के रसूल की नाफ़रमानी की तो ख़ुदा ने भी उनकी बड़ी सख्ती से ले दे कर डाली
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अनुवाद — अल-हाक़्का 8

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सूरा आयत 8/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 6–10. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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