अल-क़लम · 49/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़लम
لَّوْلَا أَن تَدَارَكَهُ نِعْمَةٌ مِّن رَّبِّهِ لَنُبِذَ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ ۝٤٩
Law laaa an tadaara kahoo ni`matum mir rabbihee lanubiza bil`araaa`i wa huwa mazmoom
📖 हिंदी अर्थ
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَدَارَكَهُ – उसे पा लिया, उसे अपनी रहमत से ढक लिया
  • نِعْمَةٌ – रहमत, कृपा, अनुग्रह
  • لَنُبِذَ – तो उसे फेंक दिया जाता
  • بِالْعَرَاءِ – खुले मैदान में, निर्जन भूमि पर
  • مَذْمُومٌ – निंदित, मलामत किया हुआ

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को सब्र की ताकीद करते हुए हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम के वाक़िए की ओर इशारा कर रहे हैं। हज़रत यूनुस को अपनी क़ौम पर ग़ुस्सा आया और उन्होंने अल्लाह की इजाज़त के बग़ैर क़ौम को छोड़कर समुद्र का रुख़ किया। उन्होंने एक जहाज़ में सवार हुए, लेकिन रास्ते में जहाज़ वालों ने क़ुरआ डाली और हज़रत यूनुस को समुद्र में डाल दिया गया। अल्लाह ने एक बड़ी मछली को हुक्म दिया कि वह उन्हें निगल ले, लेकिन उन्हें नुक़सान न पहुँचाए। हज़रत यूनुस मछली के पेट में अंधेरे में अल्लाह को पुकारते रहे।

अगर अल्लाह की रहमत और कृपा उनके साथ न होती, तो मछली उन्हें खुले निर्जन मैदान में फेंक देती, जहाँ न कोई पेड़ था, न पानी, न कोई सहारा — और वह निंदित और मलामत की हालत में होते। लेकिन अल्लाह की रहमत ने उन्हें पा लिया, उनकी दुआ क़बूल हुई, और उन्हें मछली के पेट से निकालकर एक ऐसी जगह पहुँचाया जहाँ उनके लिए खाने-पीने का इंतज़ाम किया गया। वह निंदित नहीं, बल्कि अल्लाह के प्यारे नबी बनकर निकले।

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह की रहमत उसके बंदों पर हमेशा साथ होती है, बशर्ते वह सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करें। हज़रत यूनुस की दुआ "لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنتَ سُبْحَانَكَ إِنِّي كُنتُ مِنَ الظَّالِمِينَ" ने उन्हें अंधेरे से निकाला। यह हमारे लिए सबसे बड़ा सबक़ है कि जब भी हम मुसीबत में पड़ें, तो अल्लाह की रहमत का सहारा लें, उससे दुआ करें और उसकी तरफ़ पलटें। अल्लाह की रहमत कभी निराश नहीं करती — वह हर अंधेरे से निकालने की ताक़त रखती है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि जल्दबाज़ी और ग़ुस्सा इंसान को मुसीबत में डाल सकता है, लेकिन अल्लाह की रहमत और सब्र ही कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह अपने नबी ﷺ को और हम सबको सब्र की तालीम दे रहा है — कि हर मामले में अल्लाह के फ़ैसले पर भरोसा रखो, क्योंकि उसकी रहमत हर मुसीबत से बड़ी है।



📜 आयत 47-51 — सूरा अल-क़लम

47أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ
या उनके इस ग़ैब (की ख़बर) है कि ये लोग लिख लिया करते हैं
48فَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ وَلَا تَكُن كَصَاحِبِ الْحُوتِ إِذْ نَادَىٰ وَهُوَ مَكْظُومٌ
तो तुम अपने परवरदिगार के हुक्म के इन्तेज़ार में सब्र करो और मछली (का निवाला होने) वाले (यूनुस) के ऐसे न हो जाओ कि जब वह ग़ुस्से में भरे हुए थे और अपने परवरदिगार को पुकारा
49لَّوْلَا أَن تَدَارَكَهُ نِعْمَةٌ مِّن رَّبِّهِ لَنُبِذَ بِالْعَرَاءِ وَهُوَ مَذْمُومٌ
अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो चटियल मैदान में डाल दिए जाते और उनका बुरा हाल होता
50فَاجْتَبَاهُ رَبُّهُ فَجَعَلَهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
तो उनके परवरदिगार ने उनको बरगुज़ीदा करके नेकोकारों से बना दिया
51وَإِن يَكَادُ الَّذِينَ كَفَرُوا لَيُزْلِقُونَكَ بِأَبْصَارِهِمْ لَمَّا سَمِعُوا الذِّكْرَ وَيَقُولُونَ إِنَّهُ لَمَجْنُونٌ
और कुफ्फ़ार जब क़ुरान को सुनते हैं तो मालूम होता है कि ये लोग तुम्हें घूर घूर कर (राह रास्त से) ज़रूर फिसला देंगे
अल-क़लमकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अल-क़लम 49

सूरा अल-क़लम आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अगर तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी उनकी यावरी न करती तो…

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Thursday, October 1, 2026

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