अनुवाद — Tafsir
طسم - ये हुरूफ़े मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनका ज़िक्र क़ुरआन की शुरुआत में कई सूरतों में आया है। इन अक्षरों का सही मतलब सिर्फ़ अल्लाह ही जानता है, और ये क़ुरआन के मु'जिज़ा (चमत्कार) का हिस्सा हैं। ये अक्षर इस बात की तरफ़ इशारा करते हैं कि ये किताब उन्हीं हुरूफ़ से बनी है जो अरब लोग बोलते और समझते हैं, फिर भी वे इस जैसी किताब पेश नहीं कर सके। यह क़ुरआन की अज़मत और अल्लाह की क़ुदरत की निशानी है। ये हुरूफ़ हमें याद दिलाते हैं कि क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, और इसमें कोई शक नहीं। जो लोग इसे पढ़ते और समझते हैं, उनके दिलों में रोशनी पैदा होती है और वे सीधे रास्ते पर चलते हैं। ये अक्षर हमें बताते हैं कि अल्लाह ने ये किताब अपने बंदों की हिदायत के लिए उतारी है, ताकि वे दुनिया और आख़िरत की कामयाबी हासिल कर सकें। इसलिए हमें चाहिए कि क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 1-3 — अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 1
सूरा अश-शुआरा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ता सीन मीमसूरा आयत 1/227 — अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शुआरा सुनें, अश-शुआरा अनुवाद, अश-शुआरा mp3, अश-शुआरा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








