अश-शुआरा · 2/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ ۝٢
Tilka Aayaatul Kitaabil Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

ये आयतें उस किताब (क़ुरआन) की हैं जो सब कुछ स्पष्ट कर देने वाली है। यह किताब ही वह कसौटी है जो हक़ (सत्य) और बातिल (असत्य) के बीच फ़र्क़ करती है, और हर उस चीज़ को रौशन करती है जिसकी इंसान को ज़िंदगी के सफ़र में ज़रूरत है।

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि ये आयतें उस वाज़ेह और रौशन किताब की हैं, जिसके अल्फ़ाज़ साफ़ हैं और जिसके मानी भी वाज़ेह हैं। यानी यह किताब अपने नुत्फ़े (शब्दों) और मफ़हूम (अर्थ) दोनों में इतनी साफ़ और रौशन है कि किसी को भी समझने में कोई दिक़्क़त नहीं होती, बशर्ते वह सच्चे दिल से हिदायत का तालिब हो।

अल्लाह तआला इस आयत में हमें बताना चाहते हैं कि यह क़ुरआन कोई मुबहम (अस्पष्ट) या पेचीदा किताब नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रौशन किताब है जो हर उस इंसान के लिए रहनुमा है जो हक़ की तलाश में है। यह किताब इंसान को अंधेरों से निकाल कर रौशनी की तरफ़ ले जाती है, गुमराही से निकाल कर हिदायत की राह दिखाती है, और शक-ओ-शुबहात से निकाल कर यक़ीन की मंज़िल तक पहुँचाती है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन एक ऐसा खज़ाना है जिसकी कोई इंतिहा नहीं। जो शख्स इस किताब को पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यह किताब हर ज़माने और हर मकान के लिए हिदायत है। आइए! हम इस रौशन किताब को पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।



📜 आयत 1-4 — सूरा अश-शुआरा

1طسم
ता सीन मीम
2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
3لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) शायद तुम (इस फिक्र में) अपनी जान हलाक कर डालोगे कि ये (कुफ्फार) मोमिन क्यो नहीं हो जाते
4إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाज़िल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 2

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सूरा आयत 2/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 1–4. हिंदी अर्थ: اردو.





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Tuesday, September 29, 2026

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